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सुरक्षा एजेंसियों की चिंताः कहीं खालिस्तान की राह न बन जाए करतारपुर कॉरिडोर

Sat, 24 Nov 2018 02:37 PM IST
अनिल पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
अनिल पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 24 Nov 2018 02:37 PM IST
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Terror Looms over road to kartarpur sahib corridor, Intel agencies are on alert mode
Kartarpur Sahib - फोटो : File Photo

हाल ही में पंजाब के मंत्री नवजोत सिद्धू पाकिस्तान के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने इस्लामाबाद गए थे। वहां वे पाकिस्तानी सेना अध्यक्ष कमर जावेद बाजवा से गले मिले थे। वहीं जिक्र हुआ था कि सिख धर्मावलंबियों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर तक जाने वाले रास्ते को खोला जाना चाहिए।

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केंद्र सरकार ने भी इस कॉरिडोर को खोले जाने और विकसित करने में रुचि दिखाई है। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि इस मार्ग का दुरुपयोग भी हो सकता है। दरअसल पाकिस्तान में अभी भी खालिस्तान समर्थकों की तादाद काफी ज्यादा है और उन्हें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का समर्थन हासिल है। ऐसे में आशंका है कि इस कॉरिडोर का उपयोग करते हुए खालिस्तान समर्थक पंजाब के युवाओं को उग्रवाद के लिए उकसा सकते हैं।
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इतना ही नहीं, इस मार्ग का उपयोग नशीली दवाओं की तस्करी के लिए भी किया जा सकता है। यह बेहद दुखद लेकिन सच है कि इस महान धर्मस्थल के क्षेत्र को पाकिस्तान में खालिस्तान और आईएसआई का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां कई ब्लैकलिस्टेड खालिस्तानी आतंकियों के अड्डे आज भी सक्रिय हैं।
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अंग्रेजी अखबार मेल टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, करतारपुर कॉरिडोर खोलने के लिए पाकिस्तान की रजामंदी इस बात का सबूत है कि वह धार्मिक और मानवीय पहलु की आड़ में इस मार्ग से अपने घटिया मंसूबों को पूरा करना चाहता है। इस मार्ग को खोलने और विकसित करने को वो पूरी दुनिया में प्रचारित कर रहा है। पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा यह कहता है कि वह शांति का पक्षधर है, इसीलिए वह भारतीय श्रद्धालुओं के लिए यह मार्ग खोलने को राजी हुआ है।

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इमरान खान इस कॉरिडोर के निर्माण की नींव रखेंगे

इधर भारत सरकार ने डेरा बाबा नानक से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक एक कॉरिडोर बनाने की घोषणा की ताकि सिख श्रद्धालु गुरु नानक की कर्मस्थली करतारपुर गुरुद्वारे के दर्शन कर सकें। 

उधर इसके कुछ घंटों के भीतर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि वो बाबा गुरु नानक के 550 प्रकाश पर्व पर पहले ही कॉरिडोर बनाने की घोषणा कर चुके हैं। उन्होंने ऐलान किया कि 28 नवंबर को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इस कॉरिडोर के निर्माण की नींव रखेंगे।

आइए जानते हैं फैसले में क्या-क्या है?

डेरा बाबा नानक से लेकर अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक गुरुद्वारा दरबार सिंह करतारपुर साहिब के लिए कॉरिडोर बनाया जायेगा और इसका पूरा खर्चा केंद्र सरकार उठायेगी। माना जाता है कि पाकिस्तान में रावी नदी के किनारे मौजूद करतारपुर साहेब में गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के 18 साल बिताए थे।

  • सुल्तानपुर लोधी को हेरीटेज सिटी बनाया जायेगा जिसका नाम 'पिंड बाबे नानक दा' रखा जायेगा। यहां गुरुनानक देव जी के जीवन और उनकी शिक्षा के बारे में बताया जायेगा।
  • गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी में 'सेंटर फॉर इंटरफेथ स्टडीज' का निर्माण किया जायेगा। ब्रिटेन और कनाडा की दो यूनिवर्सिटियों में इस सेंटर के नाम के साथ नई पीठ स्थापित की जायेगी।
  • गुरुनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर खास डाक टिकट और सिक्के जारी किये जायेंगे। विदेशों में भारतीय दूतावासों में प्रकाश पर्व के संबंध में विशेष समारोह कराए जायेंगे।
  • नेशनल बुक ट्रस्ट अलग-अलग भारतीय भाषाओं में गुरुनानक देव जी की शिक्षा के बारे में जानकारी प्रकाशित करेगा। भारतीय रेलवे भी गुरुनानक देव के स्थानों तक रेलगाड़ी चलाएगी।

कहां है गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर

गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर पाकिस्तान के नारोवाल जिले में है जो लाहौर से करीब 120 किलोमीटर दूर है। ये गुरुद्वारा भारत की सीमा से करीब 3 किलोमीटर दूर है लेकिन पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव ने इसे तीर्थयात्रियों के लिए बहुत दूर बना दिया है।

भारत सरकार ने भारतीय सीमा के नजदीक एक बड़ा टेलिस्कोप लगाया है जिसके जरिए तीर्थयात्री करतारपुर गुरुद्वारे के दर्शन करते हैं। पाकिस्तान के प्रसार मंत्री फवाद चौधरी कह चुके हैं कि, "करतारपुर सीमा को खोला जा रहा है। गुरूद्वारे तक आने के लिए अब वीजा की जरूरत नहीं होगी। वहां तक आने के लिए रास्ता बनाया जायेगा।"

"दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु टिकट खरीद कर यहां आ कर और माथा टेक सकते हैं। इसी तरह का एक सिस्टम बनाने की कोशिश हो रही है।'' माना जाता है कि करतारपुर में जिस जगह गुरु नानक देव की मौत हुई थी वहां पर गुरुद्वारा बनाया गया था।

सिखों और मुसलमानों दोनों धर्मों में इस स्थान की मान्यता है। ये गुरुद्वारा शकरगढ़ तहसील के कोटी पिंड में रावी नदी के पश्चिम में स्थित है।

एक अद्भुत स्थान

कहा जाता है कि गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर कुदरत का बनाया अद्भुत स्थान है। पाकिस्तान में सिखों के और भी धार्मिक स्थान हैं- डेरा साहिब लाहौर, पंजा साहिब और ननकाना साहिब उन गांव में हैं जो भारत-पाक सीमा के करीब है।

रावी नदी में आई बाढ़ के कारण गुरुद्वारे को काफी नुकसान पहुंचा था। उसके बाद 1920-1929 तक महाराजा पटियाला ने इसे फिर से बनवाया था। इस पर 1,35,600 का खर्चा आया। साल 1995 में पाकिस्तान सरकार ने इसके कुछ हिस्सों का फिर से निर्माण करवाया था। भारत-पाक के बंटवारे में ये गुरुद्वारा पाकिस्तान की तरफ चला गया था।

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