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Terror Attack: J&K की 'भूलभुलैया' गुफाओं में छिपे 58 पाकिस्तानी आतंकी, जिंदा या मुर्दा, बाहर घसीटने की तैयारी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 10 Jun 2024 05:19 PM IST
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सार
Terror Attack: प्राकृतिक गुफाओं में छिपे बैठे आतंकियों का सफाया करने के लिए अब सुरक्षा बल, ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार और थर्मल इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि अभी तक इस तरह के उपकरणों से कोई बड़ी मदद नहीं मिल रही है। वजह, आतंकी इन उपकरणों की तकनीक से वाकिफ हैं।
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Terror Attack: Pakistani terrorists hiding in labyrinthine caves of J&K, Preparation to drag out dead or alive
दहशतगर्दों के लिए मखबिरी का काम कर रहे स्थानीय लोग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में रविवार को पाकिस्तानी आतंकियों ने वैष्णो देवी मंदिर जा रही तीर्थयात्रियों की बस पर हमला कर दिया। फायरिंग के चलते ड्राइवर का बस पर नियंत्रण नहीं रहा। नतीजा, बस गहरी खाई में जा गिरी। दस लोग मारे गए, जबकि 33 से अधिक घायल हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय बलों की खुफिया इकाई से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का कहना है, जेएंडके के घने जंगलों में स्थित प्राचीन 'भूलभुलैया' गुफाओं में '58' पाकिस्तानी दहशतगर्द छिपे हैं। लगभग 32 स्थानीय आतंकी भी उनके साथ हैं।



इसके अलावा करीब दो दर्जन ऐसे लोग हैं, जो दहशतगर्दों के लिए मुखबिरी और सप्लाई चेन का काम करते हैं। भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जेकेपी, उन प्राकृतिक गुफाओं तक पहुंच रही है, जहां पाकिस्तानी और लोकल आतंकी छिपे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के सीक्रेट प्लान के मुताबिक, आतंकी जिंदा या मुर्दा, लेकिन वे बाहर घसीटे जाएंगे।


जम्मू क्षेत्र के पुंछ और राजौरी इलाके में बीहड़ जंगल हैं। इन्हीं जंगलों में अनेक प्राकृतिक गुफाएं मौजूद हैं। गत वर्ष सेना प्रमुख, जनरल मनोज पांडे ने कमांडरों की एक बैठक में यह निर्देश दिया था कि प्राकृतिक गुफाओं में छिपे बैठे आतंकियों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जाए। उनके ठिकानों पर जोरदार प्रहार किया जाए। इसके बाद कई स्थानों पर सुरक्षा बलों के खास ऑपरेशन शुरु किए गए हैं। पीर पंजाल रेंज के तहत आने वाले राजौरी-पुंछ के वन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की टीमें पहुंच रही हैं। ऑपरेशन में सीआरपीएफ का कोबरा दस्ता, जो जंगल वॉरफेयर में एक्सपर्ट है, उसकी मदद ली जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, कई प्राकृतिक गुफाओं में पाकिस्तानी दहशतगर्द छिपे हुए हैं। कुछ गुफाएं ऐसी जगह पर स्थित हैं, जहां तक सुरक्षा बलों की सीधी पहुंच नहीं है। आतंकी, ऊंचाई का फायदा उठाते हैं। गत वर्ष दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग के कोकेरनाग जंगल क्षेत्र में छह सात दिन चले ऑपरेशन में दो आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया था। यहां पर आतंकी, प्राकृतिक गुफा में छिपे हुए थे। जब सुरक्षा बलों ने गुफा की तरफ चढ़ाई की, तो आतंकियों ने फायरिंग कर दी। उस हमले में भारतीय सेना का एक कर्नल, एक मेजर और एक डीएसपी शहीद हो गए थे। ऑपरेशन के छठे दिन, एक अन्य जवान की बॉडी मिली थी। उसके बाद भी जंगलों में आतंकियों ने हमलों को अंजाम दिया। पिछले माह जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में आतंकवादियों ने भारतीय वायुसेना के वाहन पर हमला किया था। उस हमले में एक सैनिक शहीद हुआ, जबकि कई अन्य सैनिक घायल हो गए थे।

प्राकृतिक गुफाओं में छिपे बैठे आतंकियों का सफाया करने के लिए अब सुरक्षा बल, ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार और थर्मल इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि अभी तक इस तरह के उपकरणों से कोई बड़ी मदद नहीं मिल रही है। वजह, आतंकी इन उपकरणों की तकनीक से वाकिफ हैं। वे इसके तोड़ का कोई न कोई तरीका ढूंढ लेते हैं। सुरक्षा बलों की टीम, अब प्राकृतिक गुफाओं में छिपे आतंकियों को बाहर निकालने का जो तरीका अपना रही है, वह करो या मरो का है। यानी किसी भी तरह से आतंकी, जिंदा या मुर्दा, गुफा से बाहर आना चाहिए।

भूलभुलैया के रास्तों वाली प्राकृतिक गुफाओं में अब बड़े हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा। इनमें स्नाइपर्स गन, मोर्टार, अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर, रॉकेट और भारी मशीनगन शामिल है। जहां पर भी आतंकियों के छिपने की पुख्ता सूचना मिले, वहीं उक्त हथियारों का प्रयोग किया जाए। गुफाओं में प्रवेश मार्ग को लेकर ड्रोन से सूचनाएं जुटाई जा रही हैं। घने जंगल में खुफिया एजेंसियों को उन रास्तों पर लगाया गया है, जहां से आतंकियों की सप्लाई चेन जारी रहती है। डेरा की गली के जंगल में विशेष बलों को उतारा जा रहा है। यहां पर दर्जनों प्राकृतिक गुफाएं मौजूद हैं। ये गुफाएं, आतंकवादियों के छिपने के लिए एक कारगर ठिकाना साबित हो रही हैं।

जम्मू-कश्मीर में मारे गए आतंकी ...
साल      आतंकी मारे गए
2018-       257
2019-       157
2020-       221
2021-       180
2022-       187
2023-        35  (20 जुलाई तक)

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की भर्ती ...
साल        आतंकी      
2018-       187        
2019-       121
2020-       181
2021-       142
2022-       91

अब हाइब्रिड आतंकी बन रहे बड़ा खतरा
सुरक्षा बलों के सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों के दौरान घाटी में बड़ी घुसपैठ नहीं हुई है। ये सभी विदेशी आतंकी कई वर्षों से घाटी में कहीं पर छिपे हों। हालांकि अब इनके ठिकाने का पता चल रहा है। गुफाओं तक अब सुरक्षा बलों की पहुंच बन रही है। मौजूदा समय में 32 लोकल और 58 विदेशी यानी पाकिस्तानी आतंकी सक्रिय हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस, आईबी, आर्मी एवं अन्य एजेंसियां आतंकियों के ठिकाने तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। सीमा पार के आतंकी संगठन, पाकिस्तानी आतंकियों को बचाना चाहते हैं। वे ज्यादा से ज्यादा हाइब्रिड आतंकी तैयार कर रहे हैं। हाइब्रिड आतंकियों की मदद से ही टारगेट किलिंग की वारदात को अंजाम दिया जाता है। ये आतंकी, पब्लिक के बीच ही अंडर ग्राउंड वर्कर बनकर काम करते हैं। इन पर पुलिस या आम जनता को शक नहीं होता, क्योंकि ये उनके बीच में ही रहते हैं।

आतंकियों को आसानी से ट्रैक नहीं कर सकते
जम्मू कश्मीर में गत वर्ष 'जी-20' की बैठक से कुछ दिन पहले आतंकियों ने भारतीय सेना के वाहन पर हमला किया था। उसमें पांच जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद राजौरी के कंडी जंगलों में बनी गुफाओं में छिपे आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में भी सेना के पांच जवानों ने शहादत दी। पहले आईईडी ब्लास्ट और फिर जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग की गई। 'पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट' (पीएएफएफ) के प्रवक्ता तनवीर अहमद राथर ने अपने बयान में इन हमलों की जिम्मेदारी ली थी। पीएएफएफ ने इन हमलों का एक वीडियो भी जारी किया था। उसमें कहा गया कि सुरक्षा बलों को वे यानी आतंकी जैसा चाहते हैं, वैसा ही करने के लिए मजबूर कर देते हैं। सुरक्षा बल, उनके ट्रैप में आ जाते हैं। सुरक्षा बलों से जुड़े एक अधिकारी बताते हैं, पाकिस्तान से आए आतंकी, जम्मू कश्मीर के जंगलों में छिपे हैं। वे सामान्य फोन से बातचीत नहीं करते। यही वजह है कि उन्हें आसानी से ट्रैक नहीं किया जा सकता। सुरक्षा बलों को ज्यादातर सूचनाएं मुखबिरों के माध्यम से ही मिलती हैं। हालांकि मुखबिरों की सूचना को क्रॉस चैक किया जाता है, लेकिन कई बार इंटेल इनपुट, पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होता। उस स्थिति में जोखिम या नुकसान की संभावना बनी रहती है।

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