{"_id":"596853424f1c1b58088b486b","slug":"tension-on-india-pak-border-worry-cross-border-brides","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरहद पार की दुल्हनों को सता रहा है जंग और अपनों से बिछड़ने का डर ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सरहद पार की दुल्हनों को सता रहा है जंग और अपनों से बिछड़ने का डर
amarujala.com- Presented by: अभिषेक मिश्रा
Updated Fri, 14 Jul 2017 10:47 AM IST
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- फोटो : HT
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पंजाब के मलेरकोटला की गलियों में हंसी और खुशी ही नजर रही थी। यह ईद का माहौल था, लेकिन ऐसा क्या था इस ईद में जो गलियों को इतना गुलजार कर रहा था। यह एक मुस्लिम बाहुल्य इलाका है, जहां लड़कियों की शादी पाकिस्तान तक में होती है। ईद के मौके पर भारत आने के लिए बहुतों को वीजा मिला, जिसने इस मौके की खुशी को दोगुना कर दिया।
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1947 में जब भारत का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान का निर्माण हुआ, उस वक्त मलेरकोटला एक शांति के टीले की तरह नजर आता था। बाद में यह एक ऐसी जगह बन गई, जहां लोग अपने बच्चों की शादी पाकिस्तान में करते हैं, और पाकिस्तान के लोग भारतीयों से। 1981 में पाकिस्तान में शादी कर चुकी रजिया बानो का कहना है कि यह परिवारों के बीच संबंध बनाए रखने का एक जरिया है।
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वहीं अब लोगों को दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव से डर लग रहा है। लोगों का कहना है कि किसी भी दिन जंग छिड़ सकती है। तनबीर के कहा, 'मुझे डर है कि ये लोग किसी भी दिन सीमा को बंद कर सकते हैं और पता नहीं मैं अपनी बीमार मां से दोबारा मिल भी पाउंगी या नहीं।'
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गुलफरीन बेगम जो अपने घर 25 सालों बाद लौटी हैं, उनका कहना है कि मेरे कागजात में थोड़ी कमी होने के कारण वह मेरा वीजा हर बार रिजेक्ट कर देते थे। आखिर में मैंने अपना जन्म स्थान बदला और फिर मुझे नया पासपोर्ट मिला। गुलफरीन बेगम अपनी पिता की मौत पर भी नहीं आ सकी थी। वहीं गुलफरीन पहली बार अपने भाई अकबर खां से मिली जो उनकी शादी वक्त पैदा भी नहीं हुआ था।