मां-बाप के अंतिम संस्कार के लिए घर का सामान बेचने को मजबूर बच्चे
मैनपुरी जिले के लखनीपुर में दलित दंपति के हत्याकांड ने गांव में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। यहां सन्नाटा पसरा है। एक ओर पीड़ित परिवार में खौफ है तो वहीं दूसरी ओर आरोपी परिवार के बच्चों का कहना है कि उनके पिता को मृतक दंपति ने गाली दी थी, जिस वजह से गुस्से में उन्होंने ऐसा कर डाला।
मृतक ममता और भरत के ग्यारह, नौ और आठ साल के तीन बच्चे घर के टूटे-फूटे सामान को इकट्ठा कर रहे थे, जिसे बेचकर वो अपने माता-पिता का अंतिम संस्कार कर सकें।
आरोपी अशोक मिश्रा और उसकी पत्नी रजनी सलाखों के पीछे हैं। आरोपी के चार बच्चे पुलिस से अपनी 'बेकसूर' मां को छोड़ने के लिए गुहार लगा रहे हैं।
कोई नेता पीड़ित परिवार से मिलने नहीं पहुंचा
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक आरोपी के बच्चों का कहना है कि उनकी मां को नहीं पता था कि उनके पिता दोनों की हत्या कर देंगे। गांव में सुरक्षा के नजरिए से आरोपी के घर के बाहर पीएसी तैनात कर दी गई है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवार के लिए पांच लाख सहायता राशि देने की बात तो कही है, लेकिन वो उन्हें कब मिलेगी इसका उन्हें नहीं पता। यहां तक कि पीड़ित परिवार से मिलने के लिए कोई नेता भी अब तक नहीं पहुंचा है।
गांव के प्रधान जरमन सिंह कहते हैं कि गांव में 70 परिवार और 350 वोटर हैं। इनमें ज्यादातर दलित और मुस्लिमों की संख्या है। गांव ने कभी जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया। हम एक सप्ताह तक रामलीला करते हैं जिसमें सभी जातियों के विशेषकर दलित और मुस्लिम लोग हिस्सा लेते हैं और महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ये सब गुस्से में हो गया
गांव में किसी तरह का कोई सामुदायिक तनाव नहीं है। प्रधान कहते हैं गुरुवार को जो हुआ वो महज गुस्से की वजह से हुआ। गांव के प्रधान की तरह ही गांव के ही एक तलित जानवेद कुमार कहते हैं कि 'ये सब गुस्से में हो गया। आदमी पर जब गुस्सा सवार होता है तो उसे कुछ दिखता कहां है।
जानवेद कहते हैं कि आरोपी मिश्रा एक अच्छे आदमी थे, उनकी गांव में कभी किसी से लड़ाई नहीं हुई'। वहीं घटना स्थल से 150 मीटर दूर आरोपी मिश्रा की दोमंजिला इमारत के बाहर लोग अपना नजरिया बताने के लिए इकट्ठा हुए।
उनमें से एक शख्स ने कहा कि पैसे ने उसे अंधा कर दिया था। कुछ समय पहले उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।
आरोपी की पत्नी ने पति को उकसाया
कुछ बीघा जमीन के अलावा उसके पास कुछ नहीं था और वो काम की तलाश में फिरोजाबाद जाने वाला था। लेकिन एक्सप्रेसवे ने उसकी जिंदगी बदल थी। जमीन के एवज में उसे सरकार से बड़ी रकम मिली, जिसके बाद उसने अपना दोमंजिला मकान बनाया।
कुछ लोगों का मानना है कि आरोपी की पत्नी ने अपने पति को हत्याकांड के लिए उकसाया था। गांव के प्रधान जरमन सिंह के मुताबिक रजनी ने ममता को किसी दूसरी दुकान से 5 रुपये का बिस्किट का पैकेट खरीदते हुए देख लिया था।
उसने पति से कहा कि ममता ने पैसे देकर दूसरी दुकान से बिस्कुट का पैकेट खरीदा है जबकि उसने अभी तक उनके पंद्रह रुपए नहीं चुकाये हैं। जिसके बाद मिश्रा पर गुस्सा सवार हो गया और उसने दोनो की हत्या कर दी।
वो हमें जला देंगे अगर हम घर गए तो
घटना के कुछ वक्त बाद गांव के कुछ लोग आरोपी के घर को जला देने के लिए इकट्ठा हुए थे जिन्हें पुलिस ने रोक दिया। आरोपी के बच्चे कहते हैं कि हमारी मां की इस घटना में कोई भूमिका नहीं है।
जब पिता ने दोनों की हत्या की उस वक्त मां किचिन में थी। आरोपी का दस साल का बेटा कहता है कि पापा को उस वक्त बहुत गुस्सा आया जब भारत ने उनसे पैसे वापस मांगने पर उन्हें दो बहनों को बेचने की बात कही।
कोई भी पिता ये नहीं सुन सकता। ये अपमानजनक भाषा थी। आरोपी के बच्चों का ये भी कहना है कि वो हमें जला देंगे अगर हम घर गए तो।