{"_id":"5c28b06dbdec2256f16c0037","slug":"ten-agencies-do-not-have-full-power-of-interception-says-home-ministry","type":"story","status":"publish","title_hn":"विवाद बढ़ने पर सरकार ने दी सफाई, बिना मंजूरी कंप्यूटरों की निगरानी नहीं कर पाएंगी एजेंसियां","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
विवाद बढ़ने पर सरकार ने दी सफाई, बिना मंजूरी कंप्यूटरों की निगरानी नहीं कर पाएंगी एजेंसियां
Sun, 30 Dec 2018 05:18 PM IST
Shani Mishra
भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली
Published by: Shani Mishra
Updated Sun, 30 Dec 2018 05:18 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है कि केन्द्र सरकार ने किसी कम्प्यूटर से जानकारी निकालने (इंटरसेप्ट) के लिए किसी भी एजेंसी को पूर्ण शक्ति नहीं दी है। इन एजेंसियों को इस तरह की कार्रवाई के दौरान वर्तमान नियम कानून का कड़ाई से पालन करना होगा।
विज्ञापन
अधिकारी ने कहा कि कोई नया कानून, कोई नया नियम, कोई नई प्रक्रिया, कोई नई एजेंसी, कोई पूर्ण शक्ति, कोई पूर्ण अधिकार जैसा कुछ नहीं है और यह पुराना कानून, पुराना नियम, पुरानी प्रक्रिया और पुरानी एजेंसियां हैं।
विज्ञापन
अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि वर्तमान नियम शब्दश: वही है और इस में कौमा या फुल स्टॉप का भी कोई फर्क नहीं है।
गृह मंत्रालय की 20 दिसंबर की अधिसूचना में 10 एजेंसियों का नाम लिया गया था। इस अधिसूचना ने राजनीतिक भूचाल ला दिया था और विपक्ष ने सरकार पर निगरानी राज्य बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अधिसूचना में बताई गई दस एजेंसियों को 2011 से इलेक्ट्रोनिक संचारों को बीच में रोककर जानकारी हासिल की शक्ति पहले से थी।
विज्ञापन
गृह मंत्रालय ने इस साल 20 दिसंबर को इन एजेंसियों का उल्लेख करते हुए 2011 की आदर्श परिचालन प्रक्रियाओं को दोहराया था जिसमें कहा गया कि इस तरह के हर इंटरसेप्ट के लिए संबंधित प्राधिकार (केन्द्रीय गृह सचिव या राज्य गृह सचिव) से पूर्व मंजूरी की जरूरत होगी।
केन्द्र सरकार का कहना है कि कम्प्यूटर डेटा को हासिल करके जानकारी लेने और इसकी निगरानी करने के नियम 2009 में उस समय बनाए गए थे जब कांग्रेस नीत संप्रग सत्ता में थी और उसके नये आदेश में केवल उन एजेंसियों का नाम बताया है जो इस तरह का कदम उठा सकती हैं।
अधिकारी ने कहा कि अधिसूचना और कुछ नहीं बल्कि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को भेजी गई सूची है ताकि सुनिश्चित हो कि केवल अधिकृत एवं विशेष एजेंसियां संचार को बीच में रोककर जानकारी हासिल कर सकें और अनाधिकृत एजेंसियों या सेवा प्रदाताओं द्वारा दुरुपयोग नहीं हो।