यहां एक ही छत के नीचे अल्लाह की इबादत और ईश्वर की पूजा
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ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान। महात्मा गांधी का यह भजन सही मायने में अगर कहीं गाया जाता है तो वो बाबा खुदिनेश्वर धाम है। ऐसा अजीबोगरीब मंदिर आपने आज तक नहीं देखा होगा। गंगा-जमुना तहजीब का यह जीता जागता उदाहरण है। जी हां, आपने शायद ही ईश्वर और अल्लाह को कभी इतने नजदीक से देखा होगा। आज देश में भगवान और खुदा को चाहे जितना बांटने का प्रयास चल रहा हो, लेकिन बाबा खुदिनेश्वर धाम में ईश्वर-अल्लाह एक ही छत के नीचे एक साथ आपको दिख जाएंगे। इस जगह प्रतिदिन सैकड़ों लोग बाबा की पूजा अर्चना करने आते हैं। साथ ही शिव भक्त खुदनी के मजार पर भी श्रद्धा से सिर झुकाता हैं।
बिहार के दरभंगा प्रमंडल के समस्तीपुर जिले में अवस्थित बाबा खुदिनेश्वर धाम एक ऐसा आस्था स्थल हैं, जहां शिवलिंग और मजार साथ-साथ मौजूद हैं। समस्तीपुर जिला मुख्यालय से लगभग 15 किमी दूर पर स्थित है बाबा खुदिनेश्वर धाम में हिंदू और मुस्लिम दोनों का प्रवेश है। दोनों अपने-अपने रिवाजों और परंपराओं का यहां स्वतंत्र रूप से निर्वाह करते हैं। मुस्लिम हो या हिंदू यहां बाबा भोलेनाथ और खुदनी के प्रति दोनों में समान श्रद्धा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण खुदनी की शिवभक्ति है। मुस्लिम होने के बावजूद खुदनी ऐसी शिव भक्त थी कि जो अपना पूरा जीवन बाबा भोलेनाथ की सेवा में बिताया।
कहा जाता है कि समस्तीपुर के मोरबा ब्लॉक में स्थापित शिवलिंग 13वीं या 14 वीं शताब्दी की है। पहले यहां झोपड़ीनुमा मंदिर में शिवलिंग स्थापित था जिसकी पूजा कोई नहीं करता था। खुदनी को भोलेनाथ की यह उपेक्षा देखी नहीं गई और वो मुस्लिम महिला होने के बावजूद भोलेनाथ पर प्रत्येक दिन जलाभिषेक करना प्रारंभ कर दिया। बाद में वहां एक भव्य मंदिर का निर्माण भी किया गया। खुदनी के निधन के बाद वहां के लोगों ने मंदिर के गर्भ गृह में उसे दफना दिया। उस दिन से शिव भक्त जो भी मंदिर में आते हैं, वो भगवान शिवशंकर के साथ-साथ मुस्लिम महिला खुदनी के मजार पर भी श्रद्धा से
सिर झुकाता हैं।