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कर्नाटक: हिंदू मंदिरों से जुड़ा बिल विधानसभा से हुआ पारित, विधान परिषद में पास नहीं होने के बाद फिर हुआ था पेश

Thu, 29 Feb 2024 05:32 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: आदर्श शर्मा Updated Thu, 29 Feb 2024 05:32 PM IST
सार

हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती (संशोधन) विधेयक, 2024 पिछले सप्ताह विधान परिषद में पास नहीं हो सका। गुरुवार को इसे फिर से विधानसभा में पेश किया गया, जहां यह बिल पास हो गया। 

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Temple Bill passed in Karnataka Assembly again after its defeat in Council
कर्नाटक विधानसभा - फोटो : Karnataka Assembly

विस्तार

कर्नाटक का मंदिरों से जुड़ा एक विधेयक इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती (संशोधन) विधेयक, 2024 पिछले सप्ताह विधान परिषद में पास नहीं हो सका। पुनर्विचार के लिए इसे विधानसभा भेजा गया, जिसे फिर से एक बार कर्नाटक विधानसभा ने पास कर दिया।  
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फिर से विधानसभा में पास किया हिंदू मंदिरों से जुड़ा विधेयक
गौरतलब है कि कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती(संशोधन) विधेयक, 2024 को अब सीधे राज्यपाल के पास उनकी सहमति के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद जो कानून बन जाएगा। बता दें 21 फरवरी को विधानसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद यह विधेयक 23 फरवरी को विधान परिषद में पेश किया गया था, जहां ध्वनि मत से इसे विपक्ष ने खारिज कर दिया। 
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गुरुवार को विधानसभा में विधेयक को पेश करते हुए मुजराई मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा, विधेयक पहले विधानसभा द्वारा पारित किया गया था, लेकिन परिषद में पास न हो सकता, मैं विधानसभा से अनुरोध करता हूं कि एक बार विधेयक को पारित कर दिया जाए। इसके बाद कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर यूटी खादर ने विधेयक को मतदान के लिए रखा और जिसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
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हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती (संशोधन) विधेयक क्या है?
दरअसल, कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम, 1997 है जिसमें संशोधन के लिए यह बिल लाया गया था। बिल के जरिए अधिनयिम की धारा 17 में संशोधन करना है। इस कानून की धारा 17 में फंड के लिए एक सामान्य पूल बनाने का प्रावधान है। कर्नाटक सरकार के अनुसार, 2011 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने कानून में संशोधन किया था। इस बदलाव के जरिए सामान्य पूल फंड का उपयोग करके कम आय वाले मंदिरों की मदद करने के लिए अधिक आय के मंदिरों से धन इकट्ठा करने में सक्षम बनाया गया। बता दें कि कम आय वाले मंदिरों को 'सी' श्रेणी जबकि अधिक आय वाले को 'ए' श्रेणी में रखा गया है। 


सरकार के अनुसार, 2011 के संशोधन के जरिए पांच लाख रुपये से 10 लाख रुपये के बीच वार्षिक आय वाले मंदिरों को अपनी शुद्ध आय का पांच फीसदी हिस्सा देना होता है। वहीं ऐसे मंदिर जिनकी वार्षिक आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है तो उसे 10 फीसदी हिस्सेदारी देनी होती है।
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