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Telangana: तेलंगाना में IAS अफसर के VRS पर सियासी तूफान, विपक्ष बोला- ईमानदार लोगों को किया जा रहा है परेशान

Thu, 23 Oct 2025 09:47 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 23 Oct 2025 09:47 PM IST
सार

लंगाना में वरिष्ठ आईएएस अफसर सैयद अली मुर्तजा रिजवी के वीआरएस लेने के फैसले ने सियासी हलचल मचा दी है। बीआरएस ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि ईमानदार अफसरों पर गलत काम करने का दबाव डाला जा रहा है।

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Telangana Political storm erupts over IAS officer VRS opposition says honest bureaucrats harassed
ए. रेवंत रेड्डी, सीएम, तेलंगाना - फोटो : ANI

विस्तार

तेलंगाना में वरिष्ठ आईएएस अफसर सैयद अली मुर्तजा रिजवी के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने के फैसले ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। राज्य की राजनीति में यह मामला भ्रष्टाचार और प्रशासनिक दबाव को लेकर नई बहस का कारण बन गया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि ईमानदार अफसरों को नाजायज दबाव में लाकर मजबूर किया जा रहा है।

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रिजवी, 1999 बैच के आईएएस अफसर हैं और उनके पास करीब एक दशक की सेवा बाकी थी। उन्होंने 31 अक्तूबर से वीआरएस लेने का फैसला किया, जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया। हालांकि, उन्होंने वीआरएस का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है। लेकिन इसी खामोशी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
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केंद्र मंत्री का हमला
केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने इस घटनाक्रम को तेलंगाना की नौकरशाही पर राजनीतिक दबाव की पोल करार दिया। उन्होंने कहा कि जब मंत्री अफसरों पर दबाव नहीं बना पाते तो उन्हें बलि का बकरा बना देते हैं। क्या यह कांग्रेस सरकार का प्रशासन चलाने का तरीका है? कुमार ने आरोप लगाया कि राज्य में मंत्री टेंडरों में हस्तक्षेप करते हैं, नियम तोड़ते हैं और जब पकड़े जाते हैं तो ईमानदार अफसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं।
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बीआरएस का पलटवार
बीआरएस वर्किंग प्रेसिडेंट के.टी. रामाराव (केटीआर) ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आईएएस और आईपीएस अफसर इसलिए वीआरएस ले रहे हैं क्योंकि उनसे गलत काम करने का दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि रिजवी ने आबकारी मंत्री जुपाली कृष्णा राव के दबाव में आने से इनकार कर दिया था। केटीआर ने आगे कहा कि मंत्री ने खुद राज्य सरकार को पत्र लिखकर रिजवी का इस्तीफा स्वीकार न करने की मांग की थी।


आरोप और राजनीतिक पृष्ठभूमि
आबकारी मंत्री कृष्णा राव द्वारा मुख्य सचिव को लिखे एक कथित पत्र में कहा गया कि रिजवी उच्च सुरक्षा होलोग्राम्स के टेंडर को जानबूझकर रोक रहे थे। वहीं बीआरएस ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वही तरीका अपनाया है जो पहले केसीआर की सरकार पर भ्रष्टाचार और अफसरों पर दबाव के आरोपों में झलकता था। रिजवी इस समय राजस्व विभाग (निषेध एवं आबकारी) में प्रमुख सचिव के रूप में कार्यरत हैं और इस विवाद पर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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तेलंगाना में एक आईएएस अफसर के वीआरएस से उठी यह बहस अब राजनीतिक युद्ध का रूप ले चुकी है। विपक्ष इसे ईमानदार अफसरों पर राजनीतिक प्रताड़ना बता रहा है, जबकि सरकार अब तक खामोश है। यह मामला न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है बल्कि राज्य में नौकरशाही और राजनीति के टकराव को भी उजागर करता है।


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