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तेलंगाना: पुलिस ने जंजीरों में जकड़े 73 लोगों को कराया मुक्त, अवैध रूप से चल रहा था वृद्धाश्रम
Sat, 25 Jan 2020 09:17 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: Sneha Baluni
Updated Sat, 25 Jan 2020 09:17 AM IST
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पुलिस ने वृद्धाश्रम से 73 लोगों को बचाया
- फोटो : ANI
तेलंगाना पुलिस ने हैदराबाद के बाहरी इलाके में मौजूद एक वृद्धाश्रम से 73 लोगों को मुक्त कराया है। इनमें से ज्यादातर मानसिक रोग और मानसिक विकारों से पीड़ित हैं। इन्हें वृद्धाश्रम में चेन से बांधकर रखा गया था। पुलिस का कहना है कि आश्रम का स्टाफ इलाज और देखभाल के नाम पर उनपर अत्याचार करता था। इसमें 21 महिलाएं शामिल हैं।
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नगाराम गांव के आश्रम में होने वाला अत्याचार तब सामने आया जब पड़ोसियों ने जंजीरों में जकड़े हुए लोगों की चीख-पुकार सुनी और पुलिस को फोन करके बुलाया। केयरटेकर के खिलाफ माता– पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। आश्रम में मौजूद सभी लोगों को अस्पताल भेजा गया है।
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पुलिस ने कहा, 'वृद्धाश्रम के प्रबंधन के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज किया गया है। हमें शिकायत मिली थी कि मनोरोगी और मानसिक रूप से परेशान व्यक्तियों को घर के अंदर जंजीरों में कैद करके रखा गया है और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। मामले में जांच जारी है।'
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Telangana: Police says, "Case of cheating registered against the management of the old age home after a complaint was received that Psychiatric patients&mentally disturbed persons are being confined in a house with chains & being treated inhumanly. Investigation underway."(23.01) https://t.co/2UD2rz3r2i
— ANI (@ANI) January 25, 2020
पुलिस के अनुसार शैक रतन जॉन पॉल, के भरती और तीन अन्य लोग मिलकर दो घरों में ममता वृद्धाश्रम चलाते हैं। यह पाया गया कि वे एक मनोरोग पुनर्वास केंद्र चला रहे थे और उन्होंने मानसिक रोगियों, मानसिक रूप से परेशान व्यक्तियों और कुछ शराबियों को इन घरों में रखा था।
पुलिस ने पाया कि केयरटेकर्स मे 52 पुरुषों को एक घर में रखा था और दूसरे घर में 21 महिलाओं को अस्वास्थ्यकर स्थिति में चेन से बांधकर रखा गया था। सूत्रों का कहना है कि इन असहाय लोगों को कई बार अनुशासन में रखने के लिए डंडों से पीटा जाता था।
केयरटेकर्स प्रति व्यक्ति के परिवार से देखभाल और इलाज करने के नाम पर हर महीने 10 हजार रुपये लिया करते थे। सूत्रों का कहना है कि केयकटेकर्स के पास इस तरह के लोगों का सही इलाज करने के लिए उचित डिग्री नहीं है। इसके अलावा उनका मनोरोग पुनर्वास केंद्र अपंजीकृत है।