Telangana election: तेलंगाना में तैयार हो रहा 'एम फैक्टर' के लिए विशेष रोड मैप, कांग्रेस ने खेला कुछ ऐसा दांव
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राजस्थान के बाद तेलंगाना में विधानसभा का चुनाव होगा। कहने को तो दक्षिण भारत के गेटवे वाले इस राज्य में असली लड़ाई बीआरएस के साथ ही हो रही है। लेकिन भाजपा और कांग्रेस ने सियासी तौर पर जिस तरीके से फील्डिंग तैयार की है, उसका असर न सिर्फ अगले साल होने वाले लोकसभा के चुनाव, बल्कि अलग-अलग राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी दिखने वाला है। भाजपा ने जहां खुलकर राज्य में मुसलमान को दिए गए चार फीसदी आरक्षण को समाप्त करने का एलान किया है। वहीं कांग्रेस ने अलग से मुसलमानों के लिए जारी किए गए घोषणा पत्र से 'एम फैक्टर' को साधने की एक बड़ी सियासी चाल चली है। सियासी जानकारों का मानना है कि इस राज्य में चुनावी परिणाम जो भी हों, लेकिन 'एम फैक्टर' के लिहाज से देश के अलग-अलग हिस्सों में तेलंगाना को एक बड़ी राजनीतिक प्रयोगशाला के तौर पर देखा जा रहा है।
तकरीबन साढ़े तीन करोड़ आबादी वाले तेलंगाना राज्य में 13 फीसदी आबादी मुस्लिम है। सियासी जानकारों का कहना है कि राज्य की 119 विधानसभा सीटों में एक तिहाई से ज्यादा सीटें मुस्लिम प्रभावित हैं। यानी तेलंगाना की करीब 46 सीटों पर मुस्लिम मतदाता हार जीत का फैसला करते हैं। वरिष्ठ पत्रकार एन सुदर्शन कहते हैं कि अगर राज्य की सभी सीटों का आकलन करें, तो हैदराबाद की 10 सीटों पर औसतन 40 फ़ीसदी मुसलमान प्रभावी रूप से न सिर्फ मतदाता हैं, बल्कि हार-जीत उसके वोट पर ही निर्भर करती है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के अलावा 20 सीटें ऐसी हैं, जहां पर औसतन 20 फीसदी मुसलमान निर्णायक मतदाता के तौर पर पहचाना जाता है। जबकि राज्य की 16 सीटों पर औसतन 14 फ़ीसदी मतदाता मुसलमान हैं और यही हार जीत का फैसला भी करते हैं।
सियासी जानकारों का मानना है कि हैदराबाद की 10 सीटों में से 7 सीटों पर तो असदुद्दीन ओवैसी का जबरदस्त प्रभाव है। यही वजह है कि यह सभी सीटें उनके खाते में हैं। इसमें निजामाबाद, करीमनगर, नालगोंडा, महबूबनगर, रंगारेड्डी, हैदराबाद और मेंडक शामिल हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि तेलंगाना में मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए बीआरएस ने कई ऐसी योजनाएं शुरू की हैं, जिससे मुसलमानों के लिए कांग्रेस को सियासत में बड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। लेकिन इन सब के बीच पार्टी ने एक ऐसा रास्ता भी तैयार किया है, जो सफल होने पर देश के अलग-अलग हिस्सों में मुस्लिम मतदाताओं के लिए एक बड़ी सियासी नजीर भी साबित हो सकती है। तेलंगाना के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक एनडी राव कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने मुसलमानों को संदेश देने के लिए अलग से घोषणा पत्र जारी किया है। उनका मानना है कि पार्टी ऐसा करके मुसलमानो को अपने पक्ष में करने और पूरे देश में यह संदेश देने की कोशिश में लगी है कि मुसलमान की सबसे हितैषी पार्टी कांग्रेस ही है।
तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता डी आर रेड्डी कहते हैं कि उनकी पार्टी लगातार मुसलमानों के हित में आवाज बुलंद करती आई है। जबकि केसीआर सरकार की योजनाओं में मुसलमानों के लिए न तो कोई पारदर्शिता है और न ही उनके लिहाज से पार्टी कोई काम कर रही है। सियासी जानकार बताते हैं कि कांग्रेस ने तेलंगाना में मुसलमान के लिए विशेषकर लागू की जाने वाली योजनाएं और घोषणाओं से न सिर्फ तेलंगाना के 13 फ़ीसदी मुसलमान को अपने पक्ष में करने का सियासी दांव खेल है, बल्कि इसका असर वह देश के अलग-अलग राज्यों में भी देखना चाहती है। कांग्रेस ने सरकार बनने पर अल्पसंख्यक कल्याण कोष में 4000 करोड रुपये अतिरिक्त देने की बात कर मुसलमानों को अपना सबसे बड़ा हितैषी बनाने का एक बड़ा खाका खींचा है। वरिष्ठ पत्रकार एनडी राव कहते हैं कि तेलंगाना में जिस तरीके से कांग्रेस और बीआरएस लगातार मुस्लिमों के लिए योजनाओं का पूरा खाका तैयार करके सियासी मैदान में उतरे हैं, उसमें चुनावी फायदा कितना होगा यह तो चुनाव परिणाम बताएंगे। लेकिन कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों खासतौर से मुसलमानों के लिए अलग से घोषणा पत्र में जो वादे किए हैं, उसका आने वाले चुनाव में निश्चित तौर पर बड़े स्तर पर इस्तेमाल कर सियासी नफे को आगे बढ़ाया जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दरअसल तेलंगाना में जिस तरीके से भाजपा ने मुसलमानों को दिए गए चार फीसदी अतिरिक्त आरक्षण को खत्म करने की बात कही है, उसके बाद से ही सियासत ऊफान पर है। सियासी जानकार एन सुदर्शन कहते हैं कि बीआरएस की योजनाओं में मुसलमान जिस तरीके से प्राथमिकता में रहते हैं, उसी का काउंटर करने के लिए भाजपा ने आक्रामक रूप से मुसलमान को दिए गए आरक्षण को खत्म करने की बात कही है। कांग्रेस ने भी इसी नब्ज को समझते हुए मुसलमानों के लिए विशेष योजनाओं को शुरू करने के साथ-साथ नौकरियों में विशेष प्राथमिकता देने और उनके लिए अतिरिक्त मदद करने का आश्वासन दिया है। हालांकि सुदर्शन कहते हैं कि तेलंगाना में कांग्रेस ने जहां सिर्फ तीन मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, वहीं बीआरएस ने पांच मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं।