तेलंगाना में जल विवाद पर घमासान: 'केसीआर और हरीश राव फांसी के हकदार', BRS नेताओं पर सीएम रेड्डी का तीखा हमला
तेलंगाना में नदी जल बंटवारे को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के केसीआर और हरीश राव पर कड़े बयान के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया है, जिस पर बीआरएस ने तीखी आपत्ति जताई है।
विस्तार
तेलंगाना में नदी जल विवाद को लेकर सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) और उनके भतीजे एवं पूर्व सिंचाई मंत्री टी. हरीश राव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीआरएस सरकारके दौरान कृष्णा और गोदावरी नदी जल के उपयोग में तेलंगाना के साथ अविभाजित आंध्र प्रदेश से भी ज्यादा अन्याय हुआ।
सत्तारूढ़ कांग्रेस नेताओं को सिंचाई मंत्री द्वारा दी गई प्रस्तुति के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर नदी जल के मामले में हुए अन्याय के लिए केसीआर और हरीश राव को फांसी देने की बात कही जाए, तो यह गलत नहीं होगा। उन्होंने दिवंगत तेलंगाना कवि कालोजी नारायण राव के कथन का हवाला देते हुए कहा कि शोषण करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख जरूरी है, चाहे वे बाहरी हों या अपने ही लोग।
सिंचाई परियोजनाओं पर भी उठाए सवाल
रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि कलेश्वरम परियोजना और पालमुरु-रंगारेड्डी लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट की लागत को जानबूझकर कई गुना बढ़ाया गया। उन्होंने दावा किया कि इन परियोजनाओं में न तो समय पर डीपीआर तैयार हुआ और न ही पारदर्शिता बरती गई, जिससे राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
विधानसभा में बहस का खुला न्योता
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां 26/11 के आतंकी अजमल कसाब को भी लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद सजा दी गई थी। साथ ही उन्होंने केसीआर को विधानसभा सत्र में आकर नदी जल और लंबित परियोजनाओं पर बहस करने का खुला न्योता दिया। यह टिप्पणी बीते दो वर्षों से केसीआर की विधानसभा में गैरहाजिरी पर एक राजनीतिक कटाक्ष भी मानी जा रही है।
बीआरएस का पलटवार, बयान पर जताई नाराजगी
रेवंत रेड्डी के इस बयान पर बीआरएस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री एक तरफ विधानसभा में आने का न्योता दे रहे हैं और दूसरी तरफ उनके नेताओं की मौत की बात कर रहे हैं। बीआरएस ने कांग्रेस पर तेलंगाना के हितों को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया है।
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