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शिक्षकों की नियुक्ति मेरिट पर हो, वरना पिछड़ जाएंगे अल्पसंख्यक संस्थान : सुप्रीम कोर्ट
Tue, 07 Jan 2020 01:16 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Tue, 07 Jan 2020 01:16 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि अल्पसंख्यक संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति में मेरिट को नजरअंदाज किया गया, तो वे पीछे छूट जाएंगे। शीर्ष अदालत ने कहा, आयोग को अल्पसंख्यक संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्त व नामित करने का अधिकार है। संस्थान के प्रबंधन को आयोग द्वारा शिक्षक की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश को मानना होगा। शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग अधिनियम-2008 के प्रावधानों को सही ठहराया।
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जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग कानून को वैध और सांविधानिक करार देते हुए कहा, यह अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता। पीठ ने यह भी कहा कि ये प्रावधान न केवल राष्ट्रहित में हैं, बल्कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के हित में भी हैं। इन संस्थानों में मेरिट को महत्व नहीं दिया गया तो इनका उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।
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शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ के उस फैसले को दरकिनार कर दिया, जिसमें अधिनियम की धारा-8,10,11 और 12 को असांविधानिक करार दिया था। हालांकि इससे पहले हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इन प्रावधानों को सही ठहराया था, लेकिन खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को पलट दिया था।
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दरअसल मदरसा प्रबंधन समितियों का कहना था कि सरकारी मदद से चल रहे मदरसे के लिए राज्य सरकार दिशानिर्देश तो बना सकती है, लेकिन उसे शिक्षकों की नियुक्ति का अधिकार नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अल्पसंख्यक संस्थानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आयोग में इस्लाम व संस्कृति के जानकारों को जगह दी गई है।