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छात्रों को देशभक्ति, राष्ट्रवाद सिखाना जरूरी: उपराष्ट्रपति
ब्यूरो अमर उजाला , नई दिल्ली
Updated Wed, 06 Sep 2017 09:31 AM IST
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उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को शिक्षक दिवस के मौके पर देशभर के 319 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2016 प्रदान किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि शिक्षक सिर्फ शिक्षक नहीं, बल्कि भारत भाग्य विधाता है, क्योंकि शिक्षकों के कंधों पर छात्रों की जिम्मेदारी होती है जो भावी देश का निर्माण करते हैं।
उप राष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों को देशभक्ति के साथ ही राष्ट्रवाद भी सिखाया जाना चाहिए। हर बच्चे को अपनी मातृभाष आनी चाहिए। उत्तर के लोगों को दक्षिण तो पूर्व के लोगों को पश्चिम की भाषा सीखनी चाहिए। इसका लाभ यह होगी कि हम अपने देश की समृद्ध विरासत को जान पाएंगे।
विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति ने शिक्षकों को सम्मानित करते हुए कहा कि देश व समाज के निर्माण में बेहतरीन सेवाओं के लिए आप सभी को पुरस्कृत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह छात्रों को मातृभाषा से जोड़ने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह अन्य भाषाओं का विरोध करते हैं।
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पढ़ें- Teachers Day: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को टीचर ने दी थी ये सलाह
नालंदा और तक्षशिला का उदाहरण देते हुए नायडू ने कहा कि शिक्षकों का यह दायित्व है कि आगामी पांच सालों में साक्षरता दर सौ फीसदी तक पहुंचे। शिक्षकों को छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ -साथ जाति, धर्म, लिंग, प्रदेश से बाहर निकालकर अनुशासन, कठिन परिश्रम, ईमानदारी के साथ एक भारत के निर्माण के बारे में सीख देनी चाहिए।
उप राष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों को आतंकवाद के प्रति जागरूक करने की भी जरूरत है। भारत के पास समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, संस्कार व संस्कृति है, जिसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। इस मौके पर नायडू ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, डॉ. बीआर अंबेडकर, पंडित मदन मोहन मालवीय और डॉ. जाकिर हुसैन को भी याद किया।
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि गुरु का सम्मान सर्वोपरि है, क्योंकि गुरु सिर्फ एक छात्र का ही नहीं, बल्कि घर, समाज से लेकर देश का निर्माण करता है। इस मौके पर 319 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार के रूप में सिल्वर मैडल, सर्टिफिकेट व पचास हजार रुपये की धनराशि दी गई।
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उप राष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों को देशभक्ति के साथ ही राष्ट्रवाद भी सिखाया जाना चाहिए। हर बच्चे को अपनी मातृभाष आनी चाहिए। उत्तर के लोगों को दक्षिण तो पूर्व के लोगों को पश्चिम की भाषा सीखनी चाहिए। इसका लाभ यह होगी कि हम अपने देश की समृद्ध विरासत को जान पाएंगे।
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विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति ने शिक्षकों को सम्मानित करते हुए कहा कि देश व समाज के निर्माण में बेहतरीन सेवाओं के लिए आप सभी को पुरस्कृत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह छात्रों को मातृभाषा से जोड़ने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह अन्य भाषाओं का विरोध करते हैं।
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नालंदा और तक्षशिला का उदाहरण देते हुए नायडू ने कहा कि शिक्षकों का यह दायित्व है कि आगामी पांच सालों में साक्षरता दर सौ फीसदी तक पहुंचे। शिक्षकों को छात्रों को किताबी ज्ञान के साथ -साथ जाति, धर्म, लिंग, प्रदेश से बाहर निकालकर अनुशासन, कठिन परिश्रम, ईमानदारी के साथ एक भारत के निर्माण के बारे में सीख देनी चाहिए।
उप राष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों को आतंकवाद के प्रति जागरूक करने की भी जरूरत है। भारत के पास समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, संस्कार व संस्कृति है, जिसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। इस मौके पर नायडू ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, डॉ. बीआर अंबेडकर, पंडित मदन मोहन मालवीय और डॉ. जाकिर हुसैन को भी याद किया।
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि गुरु का सम्मान सर्वोपरि है, क्योंकि गुरु सिर्फ एक छात्र का ही नहीं, बल्कि घर, समाज से लेकर देश का निर्माण करता है। इस मौके पर 319 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार के रूप में सिल्वर मैडल, सर्टिफिकेट व पचास हजार रुपये की धनराशि दी गई।