सबरीमाला मंदिर: सोने की परत चढ़ाने मामले में नया मोड़, विस्तृत जांच पर अड़ा TDB; हाईकोर्ट से दखल की करेगा अपील
सबरीमाला मंदिर की द्वारपालक मूर्तियों पर 1998 से 2025 तक चढ़ाई गई सोने की परत की जांच के लिए त्रावणकोर देवस्वं बोर्ड हाई कोर्ट का रुख करेगा। टीडीबी अध्यक्ष पीएस प्रसंथ ने बताया कि जांच विजय माल्या द्वारा किए गए सोने के दान से शुरू होगी। इसमें सोने की मात्रा और जिम्मेदार लोगों की गहन जांच की जाएगी।
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केरल के सबरीमाला मंदिर में 1998 से 2025 तक द्वारपालक मूर्तियों पर चढ़ाई गई सोने की परत की जांच अब केरल हाई कोर्ट की निगरानी में हो सकती है। इस बात की जानकारी त्रावणकोर देवस्वं बोर्ड (टीडीबी) अध्यक्ष पीएस प्रसंथ ने दी। उन्होंने बताया कि बोर्ड इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाएगा। इस विसतृत जांच में सोने की मात्रा और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी।
उन्होंने बताया कि बोर्ड के स्थायी वकील को इस मामले में याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। हाई कोर्ट के पूजा अवकाश के बाद यह याचिका दायर की जाएगी। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कितनी मात्रा में सोना उपयोग किया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
विजय माल्या के सोने के दान के बाद से शुरू होगी जांच
बोर्ड के अध्यक्ष प्रसंथ ने बताया कि यह जांच सितंबर 1998 से शुरू होगी, जब उद्योगपति विजय माल्या ने सोना दान किया था। उस समय यह कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के तहत होता था और रिकॉर्ड की प्रक्रिया ठीक से व्यवस्थित नहीं थी। उन्होंने कहा कि उस समय की कार्यप्रणाली मेरे लिए अज्ञात है, लेकिन अब जांच के जरिए सब कुछ सामने लाया जाएगा।
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पोत्ती पर लगे आरोपों की भी जांच
जब मीडिया ने प्रायोजक उन्नीकृष्णन पोत्ती पर लगे आरोपों को लेकर सवाल किया तो प्रसंथ ने कहा कि उन्हीं ने पहले टीडीबी पर आरोप लगाए थे। अब वे खुद जांच के घेरे में हैं। हमने पहले ही उन्हें इस प्रक्रिया से अलग कर दिया था। वहीं चेन्नई स्थित 'स्मार्ट क्रिएशन्स' नाम की एजेंसी, जिसे द्वारपालक मूर्तियों की सोने की परत चढ़ाने का कार्य सौंपा गया था।
इस बात को लेकर प्रसंथ ने कहा कि यह एक अधिकृत एजेंसी है और बोर्ड को उस पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि हमने उनके वॉरंटी पर भरोसा करके उन्हें काम सौंपा। बोर्ड की ओर से कोई चूक नहीं हुई और मूर्तियों की प्लेट्स को सुरक्षित तरीके से भेजा गया।
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2019 के टीडीबी के आदेश पर भी दी सफाई
इसके साथ ही प्रसंथ ने यह भी स्पष्ट किया कि 2019 में जारी टीडीबी के आदेश में यह नहीं लिखा था कि पोत्ती खुद सोने की प्लेट्स को संभालेंगे। आदेश में कहा गया था कि थिरुवाभरणम कमिश्नर की निगरानी में प्लेट्स की परत चढ़ाई जाए, जिसमें पोत्ती प्रायोजक होंगे। इस आदेश को कैसे लागू किया गया, इसकी जांच जरूरी है।