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नासिक TCS केस: प्रेगनेंसी का बहाना भी नहीं आया काम, अग्रिम जमानत देने से कोर्ट का इनकार, तलाश में जुटी पुलिस
Tue, 21 Apr 2026 04:37 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नासिक।
पीटीआई, नासिक।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 21 Apr 2026 04:37 PM IST
सार
नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के यूनिट में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामले ने तूल पकड़ लिया है। मुख्य आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। इस बीच पुलिस की तीन टीमें उसकी तलाश में जुट गई हैं।
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टीसीएस नासिक
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के नासिक यूनिट में सामने आए यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के मामले ने उद्योग जगत को झकझोर कर रख दिया है। मामले की मुख्य आरोपी निदा खान को सत्र न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। वहीं, नासिक पुलिस ने उसकी धरपकड़ के लिए जाल बिछा दिया है।
धर्मांतरण और धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ का आरोप
पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में निदा खान की भूमिका बेहद संदेहास्पद है। उस पर कर्मचारियों के जबरन धर्मांतरण में शामिल होने का गंभीर आरोप है। दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, आरोपी दानिश शेख ने पीड़िता का परिचय तौसीफ और निदा से कराया था। आरोप है कि ये लोग हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों, विशेषकर शिवलिंग, भगवान कृष्ण और द्रौपदी पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करते थे, जिससे पीड़िता को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर धर्मांतरण के लिए उकसाया जा सके।
कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
फरार निदा खान ने अपनी दो महीने की गर्भावस्था का हवाला देते हुए गिरफ्तारी से सुरक्षा मांगी थी। हालांकि, सोमवार को कोर्ट ने उसे कोई राहत नहीं दी और अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तारीख तय की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अदालत का कोई स्टे ऑर्डर नहीं है, इसलिए उसे तलाशने के लिए तीन टीमें अलग-अलग ठिकानों पर भेजी गई हैं।
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यह भी पढ़ें: Kharge in Controversy: खरगे ने प्रधानमंत्री के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की, फिर सफाई में कहा- वो डराते हैं
पीओएसएच कमेटी पर उठे सवाल
इस मामले ने कॉर्पोरेट जगत की आंतरिक शिकायतों को निपटाने वाली आंतरिक शिकायत समिति (पीओएसएच) की विफलता को भी सामने ला दिया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि टीसीएस की इस कमेटी में तकनीकी खामियां थीं। कमेटी के अधिकांश सदस्य स्थानीय नहीं थे, जिससे संवाद में बाधा आई।
अधिकारी ने सुझाव दिया कि ऐसी कमेटियों में स्थानीय सदस्यों का होना अनिवार्य होना चाहिए। साथ ही, यौन उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मामलों में सिर्फ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर निर्भर रहने के बजाय हर तीन हफ्ते में व्यक्तिगत मुलाकात करना जरूरी है।
कंपनी का रुख
जांच में सामने आया है कि इस शोषण का शिकार होने वाली अधिकांश युवतियां मध्यमवर्गीय परिवारों से हैं, जिनकी उम्र 21 से 30 वर्ष के बीच है और वेतन लगभग 20,000 रुपये प्रतिमाह है। दूसरी ओर, टीसीएस ने स्पष्ट किया है कि कंपनी ने उत्पीड़न के आरोपों में शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। हालांकि, कंपनी का यह भी कहना है कि उन्हें आंतरिक चैनलों के माध्यम से ऐसी कोई शिकायत पहले प्राप्त नहीं हुई थी। फिलहाल, नासिक पुलिस की एसआईटी कुल नौ एफआईआर की जांच कर रही है, जिसमें छेड़छाड़, मानसिक प्रताड़ना और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसे गंभीर मामले शामिल हैं।
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धर्मांतरण और धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ का आरोप
पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में निदा खान की भूमिका बेहद संदेहास्पद है। उस पर कर्मचारियों के जबरन धर्मांतरण में शामिल होने का गंभीर आरोप है। दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, आरोपी दानिश शेख ने पीड़िता का परिचय तौसीफ और निदा से कराया था। आरोप है कि ये लोग हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों, विशेषकर शिवलिंग, भगवान कृष्ण और द्रौपदी पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करते थे, जिससे पीड़िता को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर धर्मांतरण के लिए उकसाया जा सके।
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कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
फरार निदा खान ने अपनी दो महीने की गर्भावस्था का हवाला देते हुए गिरफ्तारी से सुरक्षा मांगी थी। हालांकि, सोमवार को कोर्ट ने उसे कोई राहत नहीं दी और अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तारीख तय की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अदालत का कोई स्टे ऑर्डर नहीं है, इसलिए उसे तलाशने के लिए तीन टीमें अलग-अलग ठिकानों पर भेजी गई हैं।
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पीओएसएच कमेटी पर उठे सवाल
इस मामले ने कॉर्पोरेट जगत की आंतरिक शिकायतों को निपटाने वाली आंतरिक शिकायत समिति (पीओएसएच) की विफलता को भी सामने ला दिया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि टीसीएस की इस कमेटी में तकनीकी खामियां थीं। कमेटी के अधिकांश सदस्य स्थानीय नहीं थे, जिससे संवाद में बाधा आई।
अधिकारी ने सुझाव दिया कि ऐसी कमेटियों में स्थानीय सदस्यों का होना अनिवार्य होना चाहिए। साथ ही, यौन उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मामलों में सिर्फ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर निर्भर रहने के बजाय हर तीन हफ्ते में व्यक्तिगत मुलाकात करना जरूरी है।
कंपनी का रुख
जांच में सामने आया है कि इस शोषण का शिकार होने वाली अधिकांश युवतियां मध्यमवर्गीय परिवारों से हैं, जिनकी उम्र 21 से 30 वर्ष के बीच है और वेतन लगभग 20,000 रुपये प्रतिमाह है। दूसरी ओर, टीसीएस ने स्पष्ट किया है कि कंपनी ने उत्पीड़न के आरोपों में शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। हालांकि, कंपनी का यह भी कहना है कि उन्हें आंतरिक चैनलों के माध्यम से ऐसी कोई शिकायत पहले प्राप्त नहीं हुई थी। फिलहाल, नासिक पुलिस की एसआईटी कुल नौ एफआईआर की जांच कर रही है, जिसमें छेड़छाड़, मानसिक प्रताड़ना और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसे गंभीर मामले शामिल हैं।
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