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GST Issue: जीएसटी काउंसिल से इतर 8 विपक्षी राज्यों की बैठक, वित्त मंत्री के सामने कई मांगें; अब घोषणाओं पर नजर

Wed, 03 Sep 2025 09:06 PM IST
ज्योति भास्कर डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 03 Sep 2025 09:06 PM IST
सार

विपक्ष की इस रणनीति बैठक में तमिलनाडु, तेलंगाना, पंजाब, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और झारखंड जैसे राज्यों के वित्त मंत्री या प्रतिनिधि शामिल हुए।

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Tax and revenue Issues opposition states meeting apart from GST Council many demands before Finance Minister
जीएसटी संग्रह - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

राजधानी दिल्ली में जीएसटी काउंसिल की 56वीं मीटिंग आज से शुरु हो गई है। दो दिनी इस बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी जीएसटी दरों के प्रस्तावों और सुधारों पर चर्चा होगी। इस बैठक के पहले ही विपक्ष द्वारा शासित आठ बड़े राज्यों ने जीएसटी काउंसिल में अपनी साझा रणनीति बनाने के लिए एक अलग बैठक की है।

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विपक्ष की इस रणनीति बैठक में तमिलनाडु, तेलंगाना, पंजाब, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और झारखंड जैसे राज्यों के वित्त मंत्री या प्रतिनिधि शामिल हुए। विपक्षी राज्यों का एक साझा एजेंडा है, जिसे वे काउंसिल की बैठक में पूरी ताकत से उठाने की तैयारी में हैं। राज्यों की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण मांग जीएसटी कंपनसेशन सेस जारी रखने को लेकर है।
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दरअसल, 1 जुलाई, 2017 को जब देश में जीएसटी लागू किया गया हुआ था। तब कई राज्यों को डर था कि उन्हें टैक्स का भारी नुकसान होगा, क्योंकि उनके कई पुराने टैक्स (जैसे वैट) खत्म हो रहे थे। उस दौरान केंद्र सरकार ने राज्यों को यह कहा था कि अगर जीएसटी लागू होने के बाद उनके राजस्व में 14 प्रतिशत सालाना से कम की बढ़ोतरी होती है, तो उस नुकसान की भरपाई अगले 5 वर्षों तक (यानी जून 2022 तक) केंद्र सरकार करेगी। लेकिन कोरोना महामारी के हालातों को देखते हुए इसे मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया।
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केंद्र सरकार ने कोरोना काल के दौरान राज्यों की मदद के लिए ₹2.69 लाख करोड़ का कर्ज लिया था। इस कर्ज को चुकाने के लिए कॉम्पेनसेशन सेस को मार्च 2026 तक बढ़ाया गया था। लेकिन अब मजबूत जीएसटी कलेक्शन की वजह से सरकार यह कर्ज अक्टूबर 2025 तक चुकाने की राह पर है। ऐसे में इस बैठक में कंपनसेशन सेस को 31 अक्टूबर 2025 तक बंद करने पर विचार कर सकती है।

लेकिन, विपक्षी राज्यों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति अभी भी ठीक स्थिति में नहीं है। अगर केंद्र सरकार यह भरपाई बंद कर देगी, तो उन्हें अपनी कल्याणकारी योजनाएं चलाने और विकास कार्य करने में भारी मुश्किल होगी। इसलिए, ये सभी 8 राज्य मिलकर जीएसटी काउंसिल में यह मांग रखेंगे कि 'कंपनसेशन सेस' की व्यवस्था को अगले कुछ वर्षों के लिए और बढ़ाया जाए।

जीएसटी कंपनसेशन से एक अतिरिक्त टैक्स है जो कुछ चुनिंदा लग्जरी और सिन गुड्स पर लगाया जाता है। इससे जमा हुए पैसे का इस्तेमाल उन राज्यों के राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए किया जाता था, जिन्हें जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स का घाटा हुआ था।

हाल ही में विपक्षी राज्यों के वित्त मंत्री या उनके प्रतिनिधियों ने एक बैठक की थी। विपक्ष पार्टियों द्वारा शासित इन आठ राज्यों का कहना था कि गुड्स एंड सर्विस टैक्स में स्लैब को रिस्ट्रक्चर किए जाने के सरकार के प्रस्ताव से सभी राज्यों को सालाना लगभग 1.5 लाख करोड़ से लेकर 2 लाख करोड़ रुपये तक रेवेन्यू का नुकसान होगा। ऐसे में केंद्र इस नुकसान की भरपाई करते हुए पांच साल तक मुआवजा दे। कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, पंजाब, तमिलनाडु और तेलंगाना के मंत्रियों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल सरकार के भी एक प्रतिनिधि ने टैक्स में कटौती के बाद मुनाफाखोरी से बचने के लिए एक ऐसे मैकेनिज्म को बनाए जाने की मांग की है। जिससे व्यवसायों को लाभ मिलना सुनिश्चित हो ताकि आम आदमी को फायदा मिल सके।


विपक्षी राज्यों ने सुझाव दिया है कि मौजूदा टैक्स स्लैब से मिलने वाले रेवेन्यू को बनाए रखने के लिए लग्जरी और सिन गुड्स पर 40 परसेंट के अलावा भी अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए। इससे मिलने वाली आय का एक हिस्सा राज्यों के बीच वितरित किया जाए ताकि उन्हें होने वाले रेवेन्यू नुकसान की भरपाई हो सके।

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