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ताशकंद कनेक्टिविटी सम्मेलन: एस. जयशंकर ने कहा- कोई भी गंभीर संपर्क पहल एकतरफा नहीं हो सकती 

Sat, 17 Jul 2021 01:41 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 17 Jul 2021 01:41 AM IST
सार

  • ताशकंद कनेक्टिविटी सम्मेलन में एक क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस में एस जयशंकर ने कहा कि संपर्क की कोशिशें आर्थिक व्यवहार्यता और वित्तीय दायित्व पर आधारित होने चाहिए और ये कर्ज का बोझ बढ़ाने वाले नहीं होने चाहिए।

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Tashkent Connectivity Conference: S Jaishankar says no serious connectivity initiative can be one sided
विदेश मंत्री एस जयशंकर - फोटो : twitter.com/DrSJaishankar

विस्तार

विदेशमंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को ताशकंद में कहा कि संपर्क निर्माण भरोसे का काम है और इसे कम से कम निर्धारित कानूनों के अनुरूप होना चाहिए क्योंकि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सबसे बुनियादी सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि कोई भी गंभीर संपर्क पहल एकतरफा नहीं हो सकती है।

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ताशकंद कनेक्टिविटी सम्मेलन में एक क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस में एस जयशंकर ने कहा कि संपर्क की कोशिशें आर्थिक व्यवहार्यता और वित्तीय दायित्व पर आधारित होने चाहिए और ये कर्ज का बोझ बढ़ाने वाले नहीं होने चाहिए। उनके इस बयान को चीन के महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (बीआरआई) के संदर्भ में देखा जा रहा है।
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जयशंकर ने कहा, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सबसे बुनियादी सिद्धांत
एस जयशंकर ने कहा कि कोई भी गंभीर संपर्क पहल कभी भी एकतरफा नहीं हो सकती है और असली मुद्दे मानसिकता के हैं, न कि विवादों के क्योंकि ऐसे संपर्क से किसी को फायदा नहीं होने वाला है जिसमें सिद्धांत की बात तो की जाए लेकिन आचरण इसके विपरीत हो। दुनियाभर में बीआरआई की आलोचना बढ़ती जा रही है क्योंकि इसके चलते कई देश चीन के कर्ज के तले दबते जा रहे हैं।
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विदेशमंत्री ने कहा कि मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के बीच संपर्क (कनेक्टिविटी) का विस्तार करते समय केवल भौतिक अवसंरचना को ही नहीं, बल्कि इसके सभी आयामों को देखने की जरूरत है।

सम्मेलन ‘सेंट्रल एंड साउथ एशिया : कनेक्टिविटी’ का आयोजन दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से उज्बेकिस्तान की मेजबानी में हुआ है। इसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और लगभग 35 देशों के नेता शामिल हुए।

बता दें कि जयशंकर ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे के दो दिन के दौरे के बाद ताशकंद पहुंचे थे, जहां उन्होंने गनी के साथ यह मुलाकात एक बहुस्तरीय संपर्क सम्मेलन से इतर की। इस दौरान उन्होंने ताशकंद में बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमीन के साथ भी बैठक की। उन्होंने ट्वीट में इसकी भी जानकारी देते हुए कहा, यह हमारे संबंधों की प्रगति को जांचने का अच्छा मौका रहा।

अफगानिस्तान पर विचार-विमर्श करने पर राजी हुए ईयू अधिकारी और जयशंकर

विदेशमंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को विदेश मामलों के लिए यूरोपीय संघ के उच्च प्रतिनिधि जोसेप बोरेल फोंटेलस से मुलाकात की। दोनों अफगानिस्तान के हालात पर लगातार विचार-विमर्श करने पर राजी हुए। साथ ही दोनों ने यूरोपीय संघ और भारत के सामने आ रही चुनौतियों पर चर्चा की। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने 8 मई को हुए सम्मेलन के बाद भारत और ईयू के बीच सहयोग में हुई प्रगति पर भी चर्चा की।

जयशंकर ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। ईयू और भारतीय नेताओं की मई में वर्चुअल बैठक हुई थी। इसमें वैश्विक चुनौतियों, कोरोना महामारी से उत्पन्न दिक्कतों, पर्यावरण की समस्या, कारोबार और निवेश समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई थी। इसके अलावा जयशंकर ब्रिटेन के मंत्री लॉर्ड तारिक अहमद से भी मिले। इस दौरान दोनों ने द्विपक्षीय सहयोग पर बात की।

जयशंकर ने की चरक, सुश्रुत, ब्रह्मगुप्त का जिक्र करने के लिए उज्बेक राष्ट्रपति की सराहना 

विदेशमंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शोवकत मिर्जियोयेव की संपर्क इतिहास में चरक, सुश्रुत, ब्रह्मगुप्त का उल्लेख करने के लिए सराहना की। उन्होंने ट्वीट किया कि मेरा स्वागत करने के लिए उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति मिर्जियोयेव का धन्यवाद। हमारे संपर्क इतिहास में चरक, सुश्रुत, ब्रह्मगुप्त का जिक्र करने के लिए उनकी सराहना करता हूं। भारत और उज्बेकिस्तान अंतर क्षेत्रीय संपर्क को आगे बढ़ा रहे हैं। 

सुश्रुत लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व में थे। उन्होंने सुश्रुत संहिता लिखी जो चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में प्राचीन भारतीयों की उपलब्धियों को बताती है। वहीं चरक का चिकित्सा की आयुर्वेद प्रणाली में महत्वपूर्ण योगदान था और उन्होंने चरक संहिता लिखी। इसके अलावा ब्रह्मगुप्त ने गणित और खगोल विज्ञान पर महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखे।

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