Tarang Shakti 2024: 'देखन में छोटन लगे, घाव करे गंभीर', हल्के फाइटर जेट तेजस पर क्यों फिट बैठती है यह कहावत?
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विस्तार
तमिलनाडु के सुलूर में भारतीय वायुसेना की मल्टी नेशनल एयर एक्सरसाइज 'तरंग शक्ति' के पहले चरण में जिस पर सभी लोगों की निगाहें टिकी हुईं थीं वह था भारत का स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस। हालांकि अभ्यास में एलसीए का फर्स्ट वर्जन LCA MK-1 ने हिस्सा लिया था, लेकिन जिधर देखो उधर तेजस की ही चर्चा थी। यहां तक कि विदेश से आए मेहमान भी तेजस की परफॉरमेंस को देखने को उत्सुक दिखे। पहले चरण की एयर एक्सरसाइज के आखिरी दिन जब तेजस आसमान में उड़ान भरी, तो पूरा आकाश उसकी गर्जना से गूंज उठा। तेजस के हवाई करतब वाकई दांतों तले उंगलियां चबाने वाले थे। इतनी बड़ी एक्सरसाइज में, जहां अन्य देशों के मॉर्डन फाइटर एयरक्राफ्ट जैसे यूरोफाइटर टाइफून भी अपने हवाई करतब दिखा रहे थे, तो तेजस ने न केवल टाइफून को इंगेज किया, बल्कि अपनी क्षमता से दूसरे देशों के पायलटों और उनके एयरचीफ को भी हैरान कर दिया।
जब तेजस ने यूरोफाइटर को किया इंगेज
तरंग शक्ति अभ्यास के शुरुआत में ही भारतीय वायुसेना के वाइस चीफ ऑफ एयर मार्शल एपी सिंह ने तेजस को उड़ाया था और जर्मन एयर फोर्स के यूरोफाइटर टाइफून को इंगेज किया था। यूरोफाइटर टाइफून को जर्मन एयर फोर्स चीफ लेफ्टिनेंट जनरल इंगो गेरहार्ट्ज उड़ा रहे थे। तेजस की क्षमताओं को देख कर जर्मन वायु सेना के पायलट भी हैरान रह गए थे। जर्मन लेफ्टिनेंट जनरल गेरहार्ट्ज ने कहा, मैंने उड़ान भरी, और यह बहुत अच्छा था। इस दौरान भारतीय वायुसेना का विमान तेजस आया और हमें इंगेज किया। उन्होंने यह भी कहा था कि मैं इस अभ्यास में और ज्यादा उड़ान भरने के लिए उत्सुक हूं। जर्मन वायुसेना पहली बार भारत में वायुसेना के अभ्यास में शामिल हुई है।
'साइज मायने नहीं रखता'
भारतीय वायुसेना (IAF) प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने कोयंबटूर के पास सुलूर एयरबेस पर अभ्यास के पहले चरण की समाप्ति पर मीडिया से बातचीत में कहा, इस एक्सरसाइज में अभ्यास में सबसे छोटा लड़ाकू विमान एलसीए तेजस ने साबित किया है कि साइज मायने नहीं रखता है। तेजस ने फ्रैंडली 'ब्लू फोर्स' और शत्रु 'रेड फोर्स' दोनों के हिस्से के रूप में अपनी युद्धक क्षमताओं को साबित किया है। वहीं, फ्रांसीसी और जर्मन वायुसेना प्रमुख जनरल स्टीफन मिल और लेफ्टिनेंट जनरल इंगो गेरहार्ट्ज ने मंगलवार को एलसीए एमके-1 में उड़ान भरी। चौधरी और स्पेन के वायुसेना प्रमुख एयर जनरल फ्रांसिस्को ब्राको कार्बो ने भी सुखोई-30 में उड़ान भरी। तरंग शक्ति के पहले चरण में भारत, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और स्पेन की वायु सेनाएं शामिल थीं। इसमें भाग लेने वाले विमानों में राफेल, टाइफून, एसयू-30, एलसीए, ए-400 सैन्य परिवहन विमान और एयरबस ए330 मल्टी-रोल टैंकर परिवहन शामिल थे। हालांकि ब्रिटेन इस अभ्यास में कुछ दिन हिस्सा लेने के बाद ही स्वदेश के लिए रवाना हो गया था।
सुलूर में तैनात हैं भारतीय वायुसेना के सभी LCA MK-1
भारतीय वायुसेना प्रमुख ने कहा कि यह पहली बार था जब एलसीए एमके-1 ने इतने बड़े सैन्य अभियान में हिस्सा लिया और हमें इसके प्रदर्शन पर गर्व है। तेजस 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' में हमारी सफलता का प्रतीक है। हम भविष्य में देश के भीतर और बाहर एयर कॉम्बैट ड्रिल्स में इस तेजस का और अधिक इस्तेमाल करेंगे। बता दें, कि भारतीय वायुसेना के पास लगभग 40 एलसीए एमके-1 हैं और ये सभी सुलूर में तैनात हैं। बता दें, भारत छह दशकों में सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय अभ्यास की मेजबानी कर रहा है, जिसमें दुनिया भर की लगभग 30 वायु सेनाएं दो चरणों में हिस्सा ले रही हैं।
फ्रांसीसी वायुसेना के पायलट का जीता दिल
फ्रांसीसी वायुसेना के राफेल पायलट 38 साल के मेजर एलेक्सिस गैलोजो ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि उन्होंने एलसीए एमके-1 के साथ और उसके खिलाफ कई मिशनों में हिस्सा लिया। लेकिन मैं तेजस फाइटर जेट की क्षमताओं से बेहद प्रभावित हूं। उन्होंने कहा, "इसकी रफ्तार और परफॉरमेंस शानदार है और यह कई तरह के मिशनों को अंजाम दे सकता है।
तरंग शक्ति का दूसरा और आखिरी चरण 29 अगस्त से 14 सितंबर तक जोधपुर में आयोजित किया जाएगा। पहले चरण की तरह, दूसरे चरण में भी लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, स्पेशल ट्रांसपोर्ट प्लेन, उड़ान के दौरान हवा में ईंधन भरने वाले और हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली (AWACS) विमान सहित 70-80 विमान हिस्सा लेंगे। दूसरे चरण में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, संयुक्त अरब अमीरात और सिंगापुर जैसे देश शामिल होंगे। भारत के दो मुख्य रक्षा साझेदार रूस और इस्राइल अपने देश में चल रहे घटनाक्रमों में बिजी होने के कारण इस अभ्यास में भाग नहीं ले रहे हैं।
तेजस की डिलीवरी पर संकट
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने एलसीए एमके-1 की क्षमताओं की तारीफ ऐसे वक्त में की है, जब इसके एडवांस एडिशन LCA MK-1A की डिलीवरी में देरी हो रही है। चौधरी ने एक सवाल के जवाब में कहा, अगर हमारे पास पर्याप्त संख्या में एलसीए एमके-1ए होते, तो सभी तेजस जहाज तरंग शक्ति में हिस्सा लेते। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को 83 LCA MK-1A की डिलीवरी को लेकर भी संशय के बादल मडंरा रहे हैं। इससे पहले एचएएल को पहले तेजस की डिलीवरी 31 मार्च, 2024 तक करनी थी। लेकिन अब पहला विमान अब नवंबर 2024 तक ही मिलने की संभावना है। क्योंकि तेजस को इंजन सप्लाई करने वाली अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस एचएएल को F404 इंजन की डिलीवरी में देरी कर रही है। इंजन की डिलीवरी में करीब 10 महीने की देरी हो रही है। साथ ही, तेजस में लगे कई सिस्टम्स के सर्टिफिकेशन में भी देरी हो रही है।
दुनिया को ताकत दिखाने का मौका
तरंग शक्ति अभ्यास ने देश को अपनी स्वदेशी सैन्य क्षमताओं को दुनिया को दिखाने का मौका दिया है। इसमें लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव और इसका मिलिट्री वर्जन रुद्र भी शामिल है। इस अभ्यास में दृश्य सीमा के भीतर और बाहर लड़ाकू मिशन, बड़ी फोर्स के साथ मुठभेड़, एय़र मोबिलिटी ऑपरेशंस, डायनेमिक टारगेटिंग, कम रोशनी में संचालन, हाई वैल्यू एयर एसेट प्रोटक्शन और उसे नष्ट करना, हवा से हवा में ईंधन भरने के मिशन और कॉम्बैट सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शामिल थे।