तमिलनाडु: सीएम विजय पर टिप्पणी डीएमके नेताओं को पड़ी भारी, ए राजा-सेकर बाबू समेत तीन पर पुलिस ने दर्ज किया केस
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर डीएमके नेताओं पर पुलिस ने कार्रवाई की है। ए राजा, पीके सेकर बाबू और विधायक वसंतम कार्तिकेयन के खिलाफ अलग-अलग शिकायतों के आधार पर केस दर्ज किया गया है। यह विवाद विजय की विधानसभा में एमके स्टालिन की आपातकाल के दौरान MISA के तहत गिरफ्तारी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद शुरू हुआ।
विस्तार
तमिलनाडु की सियासत में मुख्यमंत्री सीएम विजय को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। हालिया पार्टी प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणी करने के आरोप में डीएमके के वरिष्ठ नेताओं ए राजा और पीके सेकर बाबू समेत तीन नेताओं के खिलाफ पुलिस ने मामले दर्ज किए हैं। पुलिस के एक अधिकारी ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की।
मामले में डीएमके के उप महासचिव ए राजा, पूर्व मंत्री पीके सेकर बाबू और पार्टी विधायक वसंतम कार्तिकेयन का नाम शामिल है। इन पर 12 सितंबर को कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में अलग-अलग थानों में मामले दर्ज किए गए हैं।
सेकर बाबू के खिलाफ नॉर्थ बीच थाने में केस
डीएमके के हार्बर विधायक और चेन्नई ईस्ट जिला सचिव पीके सेकर बाबू के खिलाफ बी1 नॉर्थ बीच पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के खिलाफ पार्टी के प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने की शिकायत के आधार पर हुई।
ए राजा पर भी दर्ज हुआ मामला
सैदापेट पुलिस ने डीएमके नेता ए राजा के खिलाफ टीवीके पदाधिकारी कार्तिक की शिकायत पर केस दर्ज किया। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान राजा ने ऊर्जा संसाधन एवं कानून मंत्री आरएन निर्मल कुमार के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
राजा ने इस मामले में सत्तारूढ़ टीवीके को चुनौती देते हुए कहा था कि उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने भी डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन के योगदान और आपातकाल के दौरान मीसा के तहत उनकी गिरफ्तारी को स्वीकार किया है।
वसंतम कार्तिकेयन पर भी कार्रवाई
कलकुरिची पुलिस ने ऋषिवंधियम से डीएमके विधायक वसंतम कार्तिकेयन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। उन पर मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है।
स्टालिन की MISA गिरफ्तारी को लेकर शुरू हुआ विवाद
दरअसल, डीएमके ने मुख्यमंत्री विजय की उन टिप्पणियों के विरोध में राज्यभर में प्रदर्शन किए थे, जो उन्होंने विधानसभा में एमके स्टालिन की आपातकाल के दौरान MISA के तहत हिरासत को लेकर की थीं। विजय ने डीएमके पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए स्टालिन की गिरफ्तारी का जिक्र किया था। इस दौरान उन्होंने जबड़े से इशारा भी किया था, जिस पर विधानसभा में डीएमके सदस्यों ने तत्काल आपत्ति जताई थी।
इसके बाद ऊर्जा संसाधन एवं कानून मंत्री आरएन निर्मल कुमार ने विधानसभा में मुख्यमंत्री की टिप्पणी का समर्थन किया। उन्होंने उस लंबे समय से चले आ रहे दावे पर सवाल उठाया, जिसके मुताबिक स्टालिन को 1975-77 के आपातकाल के दौरान MISA के तहत गिरफ्तार किया गया था। मंत्री ने कहा था कि स्टालिन के MISA बंदी होने को साबित करने वाला कोई आधिकारिक हिरासत आदेश उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर स्टालिन को MISA के तहत गिरफ्तार किया गया था तो उस गिरफ्तारी का आधिकारिक आदेश कहां है। निर्मल कुमार ने आरोप लगाया कि डीएमके इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर स्टालिन को राजनीतिक शहीद के तौर पर प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है।