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तमिलनाडु: सीएम विजय के 'ड्रीम प्रोजेक्ट' के विरोध में उतरे मछुआरे, कहा- सचिवालय बना तो खत्म हो जाएगा रोजगार
Tue, 29 Sep 2026 02:14 PM IST
अमन मौर्या
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: अमन मौर्या
Updated Tue, 29 Sep 2026 02:14 PM IST
सार
तमिलनाडु सरकार के 1,200 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित नए सचिवालय कॉम्प्लेक्स का डीएमके, एआईएडीएमके समेत सहयोगी दल जैसे वामपंथी पार्टियों और वीसीके पार्टियों ने विरोध जताया है।
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तमिलनाडु में मछुआरों का प्रदर्शन
- फोटो : ANI
विस्तार
मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार द्वारा प्रस्तावित सचिवालय प्रोजेक्ट को लेकर कई राजनीतिक पार्टियों ने विरोध जताया है। इनमें डीएमके और एआईएडीएमके जैसी प्रमुख विपक्षी पार्टियों के साथ-साथ उनके सहयोगी दल जैसे वामपंथी पार्टियों और वीसीके भी शामिल हैं। पट्टिनापक्कम के मछुआरे कृष्णन ने विजय सरकार के प्रस्ताव को लेकर निराशा जताई और कहा कि मछुआरा समुदाय कई पीढ़ियों से इस इलाके में रह रहा है और मछली पकड़ने का काम कर रहा है। मछुआरे ने कहा कि हमें लगा था कि एमजीआर के बाद सीएम विजय मछुआरा समुदाय के दोस्त होंगे, लेकिन यहां सचिवालय कॉम्प्लेक्स बनाने का उनका यह फैसला हमारे लिए बहुत बड़ा झटका है। सीएम विजय से मछुआरे ने सचिवालय के लिए प्रस्तावित 25 एकड़ जमीन पर मछुआरों के लिए घर बनाने की गुजारिश की।
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मछुआरों ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
कृष्णन ने कहा कि 'यह हमारी आजीविका है, हम कहां जाएंगे? हमें उम्मीद है कि हमारी चिंताएं सीएम तक जरूर पहुंचेंगी और जल्द ही इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी। उसने बताया कि पट्टिनापक्कम इलाके के 10 से ज्यादा बस्तियों के मछुआरों ने पहले ही इस प्रस्ताव का विरोध किया था और प्रोजेक्ट के लिए जारी सरकारी आदेश को वापस लेने की मांग की थी। इसके अलावा कई गांवों के प्रतिनिधियों ने भी संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित करते हुए चेतावनी दी थी कि यदि 21 सितंबर तक सरकार द्वारा यह आदेश वापस नहीं लिया गया तो वे प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे।
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मछुआरों की मुख्य चिंता क्या है?
मछुआरों के अनुसार, तमिलनाडु सरकार ने पट्टिनापक्कम में करीब 1,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एक नया सचिवालय कॉम्प्लेक्स बनाने का प्रस्ताव पास किया था। मछुआरों के अनुसार, सरकार के इस प्रोजेक्ट से पूरे मछुआरा समुदायों की आजीविका पर बुरा असर पड़ सकता है साथ ही इलाके में रहने वाले करीब 20,000 स्कूली बच्चों का भी जीवन प्रभावित होगा। मछुआरों ने बताया कि इस इलाके में मुख्यमंत्री आवास होने के कारण पहले से ही हमें मछली बेचने में पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में यदि यहां सचिवालय कॉम्लेक्स बनाया जाता है, तो पूरा समुदाय, उसकी आजीविका और प्रभावित होगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मछुआरों को पुलिस और मत्स्य विभाग की ओर से भी दबाव का सामना करना पड़ रहा है, खासकर बड़े सरकारी कार्यक्रमों के दौरान।
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समुदाय की सरकार से क्या है मांग?
नोचिकुप्पम से मुल्ली कुप्पम तक के मछुआरे मुख्यमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए सचिवालय क्षेत्र में जाते समय प्रभावित होते रहे हैं। इस दौरान विभाग हमें मछली पकड़ने नहीं देता है। मछुआरों के अनुसार, हम पहले से ही काफी दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट से उनके पारंपरिक काम पर और बुरा असर पड़ेगा साथ ही तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भी मुश्किलें पैदा होंगी। मछुआरा समुदाय ने राज्य सरकार इस आदेश को वापस लेने और उनकी चिंताओं पर ध्यान देने मांग की है।
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मछुआरों ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
कृष्णन ने कहा कि 'यह हमारी आजीविका है, हम कहां जाएंगे? हमें उम्मीद है कि हमारी चिंताएं सीएम तक जरूर पहुंचेंगी और जल्द ही इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी। उसने बताया कि पट्टिनापक्कम इलाके के 10 से ज्यादा बस्तियों के मछुआरों ने पहले ही इस प्रस्ताव का विरोध किया था और प्रोजेक्ट के लिए जारी सरकारी आदेश को वापस लेने की मांग की थी। इसके अलावा कई गांवों के प्रतिनिधियों ने भी संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित करते हुए चेतावनी दी थी कि यदि 21 सितंबर तक सरकार द्वारा यह आदेश वापस नहीं लिया गया तो वे प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे।
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मछुआरों की मुख्य चिंता क्या है?
मछुआरों के अनुसार, तमिलनाडु सरकार ने पट्टिनापक्कम में करीब 1,200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एक नया सचिवालय कॉम्प्लेक्स बनाने का प्रस्ताव पास किया था। मछुआरों के अनुसार, सरकार के इस प्रोजेक्ट से पूरे मछुआरा समुदायों की आजीविका पर बुरा असर पड़ सकता है साथ ही इलाके में रहने वाले करीब 20,000 स्कूली बच्चों का भी जीवन प्रभावित होगा। मछुआरों ने बताया कि इस इलाके में मुख्यमंत्री आवास होने के कारण पहले से ही हमें मछली बेचने में पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में यदि यहां सचिवालय कॉम्लेक्स बनाया जाता है, तो पूरा समुदाय, उसकी आजीविका और प्रभावित होगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मछुआरों को पुलिस और मत्स्य विभाग की ओर से भी दबाव का सामना करना पड़ रहा है, खासकर बड़े सरकारी कार्यक्रमों के दौरान।
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समुदाय की सरकार से क्या है मांग?
नोचिकुप्पम से मुल्ली कुप्पम तक के मछुआरे मुख्यमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए सचिवालय क्षेत्र में जाते समय प्रभावित होते रहे हैं। इस दौरान विभाग हमें मछली पकड़ने नहीं देता है। मछुआरों के अनुसार, हम पहले से ही काफी दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट से उनके पारंपरिक काम पर और बुरा असर पड़ेगा साथ ही तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भी मुश्किलें पैदा होंगी। मछुआरा समुदाय ने राज्य सरकार इस आदेश को वापस लेने और उनकी चिंताओं पर ध्यान देने मांग की है।