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Tamil Nadu Election: लाइट, कैमरा, एक्शन; विजय के प्रति दीवानगी से घटा द्रविड़ पार्टियों का रसूख
Tue, 05 May 2026 05:31 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 05 May 2026 05:31 AM IST
सार
तमिलनाडु चुनाव में विजय की पार्टी टीवीके ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। उन्होंने द्रमुक और अन्नाद्रमुक के दशकों पुराने वर्चस्व को खत्म कर दिया। विजय की फिल्मी लोकप्रियता, स्पष्ट विचारधारा और लुभावने चुनावी वादों ने उन्हें बड़ी सफलता दिलाई। जनता ने द्रविड़ पार्टियों के विकल्प के रूप में विजय को चुना है।
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थलापति विजय
- फोटो : X
विस्तार
लाइट, कैमरा और एक्शन...रुपहला पर्दा छोड़कर सियासत की दुनिया में कदम रखने वाले विजय ने पहली बार में ही ब्लॉकबस्टर सफलता के साथ तमिलनाडु की राजनीति की पूरी पटकथा बदलकर रख दी। विजय के सिनेमाई करिश्मे के आगे सत्ता की प्रबल दावेदार मानी जा रही मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की द्रमुक के साथ-साथ दूसरी दिग्गज पार्टी अन्नाद्रमुक की स्थिति तो बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरने जैसी हो गई। टीवीके नेता का जादू इस कदर छाया कि वह राजनीति के बाहुबली बन गए। मतदाताओं की विजय की पांच रील्स के प्रति दीवानगी ने कई दशकों में पहली बार राज्य में दो द्रविड़ पार्टियों का दबदबा सीमित कर दिया है।
फिल्मी छवि : स्टारडम ने पार्टी को बनाया लोकप्रिय
विजय की लोकप्रिय फिल्मी छवि टीवीके के सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने का प्रमुख कारण मानी जा रही है। लाखों लोग उन्हें सुनने और नजदीक से देखने की उम्मीद में रैलियों में उमड़ पड़ते थे। राजनीति में हाथ आजमाने के असफल प्रयास करने वाले कमल हासन और रजनीकांत जैसे कुछ सितारों के विपरीत विजय के समर्थक संगठित और सक्रिय हैं। 2021 के स्थानीय निकाय चुनावों में, उनके प्रशंसक क्लबों की ओर से समर्थित उम्मीदवारों ने 169 सीटों में से 115 सीटें जीतीं। उनके प्रशंसकों ने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को लामबंद करने के साथ-साथ सोशल मीडिया माध्यम से भी प्रचार में अहम भूमिका निभाई। टीवीके ने सोशल मीडिया पर भी मजबूत उपस्थिति बनाई है। उन्होंने कुछ ही समय में शहरी व युवा मतदाताओं के बीच गहरी पैठ बना ली।
वैचारिक स्पष्टता द्रमुक व भाजपा से रखी दूरी
विजय चुनाव से पहले ही अपने वैचारिक दृष्टिकोण को लेकर एकदम स्पष्ट दिखे। उन्होंने साफ कर दिया कि द्रमुक के साथ उनकी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है और भाजपा के साथ वैचारिक विरोध रखते हैं। उन्होंने गठबंधन की अटकलों को खारिज करते हुए साफ कहा था, कोई भी टीवीके को किसी एक रंग में नहीं रंग सकता या हमें बी टीम नहीं कह सकता। उनके स्पष्ट रुख ने जहां द्रमुक के शासन से नाखुश मतदाताओं को उन्हें चुनने का विकल्प दिया। वहीं, उत्तर-दक्षिण विभाजन, त्रिभाषा नीति और परिसीमन विवाद जैसे मुद्दों पर अन्नाद्रमुक-नीत राजग की नीतियों को लेकर संशंकित मतदाताओं ने भी उन्हें समर्थन देना ज्यादा बेहतर समझा।
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धर्मनिरपेक्षता : सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने पर जोर
विजय ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी पार्टी की विचारधारा धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय पर आधारित है और सांप्रदायिक सद्भाव के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सवाल उठाया, भले ही जीवनशैली और धर्म अलग-अलग हों, क्या हम सब भाई नहीं हैं? उन्होंने कहा, सच्ची आस्था वही है जो दूसरों की मान्यताओं के प्रति भी गहरा सम्मान रखती हो।
ऊबे मतदाता : द्रविड़ पार्टियों के दबदबे का ढूंढ़ लिया विकल्प
राज्य के मतदाता लंबे समय से चले आ रहे द्रविड़ पार्टियों के दबदबे से बुरी तरह थक चुके थे और कुछ नया आजमाना चाहते थे। दशकों तक, राज्य की राजनीति द्रमुक-अन्नाद्रमुक के इर्द-गिर्द घूमती रही, दोनों ही सामाजिक न्याय और तमिल गौरव की विरासत का दावा करती थीं, लेकिन संभवत: लोगों को ऐसा लगने लगा था कि दोनों ही पार्टियां गतिहीन हो गईं।
चुनावी वादे : मुफ्त रेवड़ियां बांटने की रणनीति आई काम
टीवीके के चुनावी वादों ने भी राज्य के लोगों का ध्यान खींचा, जिनमें दुल्हनों के लिए आठ ग्राम सोना, परिवार की महिला मुखिया को 2,500 रुपये की मासिक सहायता और ईमानदार प्रशासन का वादा शामिल है। हालांकि, चुनाव से पहले इन कल्याणकारी उपायों के वित्तपोषण पर बहस हुई, लेकिन पार्टी ने इन्हें लागू करने का भरोसा जताया है। टीवीके ने पांच लाख सरकारी नौकरियों और पांच लाख सशुल्क इंटर्नशिप की पेशकश से भी जनता को लुभाया।
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विजय की लोकप्रिय फिल्मी छवि टीवीके के सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने का प्रमुख कारण मानी जा रही है। लाखों लोग उन्हें सुनने और नजदीक से देखने की उम्मीद में रैलियों में उमड़ पड़ते थे। राजनीति में हाथ आजमाने के असफल प्रयास करने वाले कमल हासन और रजनीकांत जैसे कुछ सितारों के विपरीत विजय के समर्थक संगठित और सक्रिय हैं। 2021 के स्थानीय निकाय चुनावों में, उनके प्रशंसक क्लबों की ओर से समर्थित उम्मीदवारों ने 169 सीटों में से 115 सीटें जीतीं। उनके प्रशंसकों ने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को लामबंद करने के साथ-साथ सोशल मीडिया माध्यम से भी प्रचार में अहम भूमिका निभाई। टीवीके ने सोशल मीडिया पर भी मजबूत उपस्थिति बनाई है। उन्होंने कुछ ही समय में शहरी व युवा मतदाताओं के बीच गहरी पैठ बना ली।
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वैचारिक स्पष्टता द्रमुक व भाजपा से रखी दूरी
विजय चुनाव से पहले ही अपने वैचारिक दृष्टिकोण को लेकर एकदम स्पष्ट दिखे। उन्होंने साफ कर दिया कि द्रमुक के साथ उनकी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है और भाजपा के साथ वैचारिक विरोध रखते हैं। उन्होंने गठबंधन की अटकलों को खारिज करते हुए साफ कहा था, कोई भी टीवीके को किसी एक रंग में नहीं रंग सकता या हमें बी टीम नहीं कह सकता। उनके स्पष्ट रुख ने जहां द्रमुक के शासन से नाखुश मतदाताओं को उन्हें चुनने का विकल्प दिया। वहीं, उत्तर-दक्षिण विभाजन, त्रिभाषा नीति और परिसीमन विवाद जैसे मुद्दों पर अन्नाद्रमुक-नीत राजग की नीतियों को लेकर संशंकित मतदाताओं ने भी उन्हें समर्थन देना ज्यादा बेहतर समझा।
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धर्मनिरपेक्षता : सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने पर जोर
विजय ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी पार्टी की विचारधारा धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय पर आधारित है और सांप्रदायिक सद्भाव के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सवाल उठाया, भले ही जीवनशैली और धर्म अलग-अलग हों, क्या हम सब भाई नहीं हैं? उन्होंने कहा, सच्ची आस्था वही है जो दूसरों की मान्यताओं के प्रति भी गहरा सम्मान रखती हो।
ऊबे मतदाता : द्रविड़ पार्टियों के दबदबे का ढूंढ़ लिया विकल्प
राज्य के मतदाता लंबे समय से चले आ रहे द्रविड़ पार्टियों के दबदबे से बुरी तरह थक चुके थे और कुछ नया आजमाना चाहते थे। दशकों तक, राज्य की राजनीति द्रमुक-अन्नाद्रमुक के इर्द-गिर्द घूमती रही, दोनों ही सामाजिक न्याय और तमिल गौरव की विरासत का दावा करती थीं, लेकिन संभवत: लोगों को ऐसा लगने लगा था कि दोनों ही पार्टियां गतिहीन हो गईं।
चुनावी वादे : मुफ्त रेवड़ियां बांटने की रणनीति आई काम
टीवीके के चुनावी वादों ने भी राज्य के लोगों का ध्यान खींचा, जिनमें दुल्हनों के लिए आठ ग्राम सोना, परिवार की महिला मुखिया को 2,500 रुपये की मासिक सहायता और ईमानदार प्रशासन का वादा शामिल है। हालांकि, चुनाव से पहले इन कल्याणकारी उपायों के वित्तपोषण पर बहस हुई, लेकिन पार्टी ने इन्हें लागू करने का भरोसा जताया है। टीवीके ने पांच लाख सरकारी नौकरियों और पांच लाख सशुल्क इंटर्नशिप की पेशकश से भी जनता को लुभाया।
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