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तमिलनाडुः 14 साल पहले भरथ ने पुलिस हिरासत में तोड़ा था दम, नहीं मिला अब तक न्याय

Fri, 17 Jul 2020 10:27 AM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: Rohit Ojha Updated Fri, 17 Jul 2020 10:27 AM IST
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Tamil Nadu custodial death case puts focus on another victim’s 14 year fight for justice
जे बेनिक्स और आर पी जयराज की मौत के बाद जमा लोग (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

पुलिसकर्मियों की यातना से पिता और पुत्र की मौत के बाद तमिलनाडु के तूतूकुड़ी जिले के सथानकुलम में सेल्वारानी के घर पर लोगों का आना जाना लगा है। सेल्वारानी की तीन बेटियां हैं। पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर पीटे जाने की वजह से जे बेनिक्स (31) और उसके पिता आर पी जयराज (59) की मौत पिछले महीने हो गई थी। पिछले सप्ताह सेल्वारानी के घर 39 वर्षीय फेमिना स्वीटी बबीता पहुंचीं, जिनके भाई अरुण भरथ की मौत 14 साल पहले उसी पुलिस स्टेशन में कथित रूप से पुलिस द्वारा यातनाएं देने के कारण हुई थी।

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उन्होने कहा कि हर कोई हमारे दुख को समझता है, लेकिन हममें से जिन लोगों ने पुलिस की बर्बरता के कारण अपनो को खोया है। वे ही सही मायने में दर्द को समझते हैं। उन्होंने बताया कि तिरुचेंदूर रेवेन्यू डिवीजन ऑफिसर (आरडीओ) की जांच के बाद उप-निरीक्षक श्रीकुमार के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मिली। इसके बाद 2008 में तूतूकुड़ी जिला फास्ट ट्रैक कोर्ट में भरथ का मामला आया। तब से मामला लंबा खींचता ही चला गया और अभी तक केस किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा है।
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मार्च 2019 में, उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के गृह सचिव को मामले को संभालने के लिए एक विशेष पीपी नियुक्त करने का निर्देश दिया। मगर अभी भी इस फर फैसला नहीं किया गया है। सुब्बू मुथुरामालिगम, जो फेमिना के परिवार का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीकुमार ने एक डिस्चार्ज याचिका दायर की कि उसे जांच में फंसा दिया गया। इस मामले में बाकी के पुलिसकर्मियों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। मगर उसकी याचिका खारिज हो गई। जबकि भरथ ने कहा था कि कम से कम सात और पुलिसकर्मी शामिल थे।
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भरत तब 20 साल का था, जब उसकी मौत हुई। उसके भाई विजय अमरनाथ, जो पड़ोसी राज्य केरल में काम करते थे, मई 2006 में छुट्टी के लिए सथानकुलम आए थे। एक जून को भरत ने दोपहिया वाहन की चोरी के आरोप में पड़ोसी जॉनसन के खिलाफ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। जब जॉनसन को 15 जून को रिहा किया गया, तो उसने अरुण के खिलाफ मौखिक शिकायत की थी। दो दिन बाद उप-निरीक्षक श्रीकुमार भरत के घर रात 10 बजे के लगभग पहुंचे। श्रीकुमार ने भरथ को बाहर खींच लिया और एक उप-निरीक्षक सहित सात अन्य पुलिसकर्मियों ने उसे पीटा। उन्हें रोकने की कोशिश करने वाला विजय भी घायल हो गया। पुलिसवालों में से एक ने भरत को उसके गुप्तांग में लात मारी जिससे वह गिर गया।

इसके बाद भरत और विजय को एक पुलिस वैन में बांध दिया गया और सथानकुलम पुलिस स्टेशन तक ले जाया गया। वहां पहुंचने पर पुलिस ने कथित तौर पर विजय से भरथ को घर ले जाने के लिए कहा। विजय अपने भाई मुरुगेसन की मदद से भरथ को सरकारी अस्पताल ले गया। वहां, भरत को मृत घोषित कर दिया गया। भरथ की मौत के 14 साल के बाद भी मामला कोर्ट में लटका है। ना तो किसी पर कार्रवाई हुई और ना ही ठीक तरह से जांच हुई। 

पिता-पुत्र की ‘हिरासत में मौत का मामला

मुथुरामलिंगम ने कहा कि उप-निरीक्षक श्रीकुमार के खिलाफ सथानकुलम पुलिस स्टेशन में धारा 302 के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद आरडीओ ने अपनी जांच शुरू की। आरडीओ ने सब-इंस्पेक्टर काला और स्टेशन से छह कांस्टेबल का नाम क्यों नहीं बताया? सभी आठ पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया जाना चाहिए था, अदालत ने अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि चार्जशीट में उन्हें शामिल करने के लिए साक्ष्य नहीं हैं।

भरथ की मृत्यु के एक साल बाद उसकी मां की मौत हो गई। नवंबर 2009 में विजय की आत्महत्या से मृत्यु हो गई। शेष परिवार भाई राजेश विनोद और पिता, डेविड इंगराज  क्रमशः इरोड और चेन्नई में रहते हैं और काम करते हैं। 

पिता-पुत्र की ‘हिरासत में मौत का मामला

पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर पीटे जाने की वजह से जे बेनिक्स और उसके पिता आर पी जयराज की क्रमश: 20 और 23 जून को मौत हो गई थी। इस घटना के बाद देश में एक बार फिर पुलिस सुधारों की मांग ने जोर पकड़ा, जिसके बाद प्रदेश सरकार ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए। आरोप है कि सथानकुलम पुलिस द्वारा बेनिक्स और जयराज दोनों को कोविड-19 की वजह से लागू निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

इन पर अपनी मोबाइल की दुकान तय समय के बाद भी खुला रखने का आरोप था। घटना की जांच कर रहे न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मद्रास उच्च न्यायालय को बताया था कि पुलिसकर्मियों ने पुलिस थाने में पूरी रात पिता-पुत्र की लाठी से पिटाई की थी और खून के धब्बों वाली एक टेबल इसका सबूत है। उच्च न्यायालय ने पूर्व में कहा था कि सथानकुलम पुलिस थाने के कर्मियों ने साक्ष्य मिटाने के प्रयास किए। न्यायमूर्ति पी एन प्रकाश और बी पुगालेंधी ने जांच सीबी-सीआईडी को सौंपते हुए कहा था कि पुलिसकर्मी इतने बेखौफ थे कि उन्होंने पुलिस थाने में जांच के दौरान मजिस्ट्रेट को भी धमकाया। इस मामले में एक निरीक्षक समेत अब तक पांच पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है।

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