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Tamil Nadu: 'राज्य में नहीं होने देंगे लागू'; CAA के विरोध में स्टालिन, बोले- संविधान की मूल संरचना के खिलाफ

Tue, 12 Mar 2024 03:31 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: श्वेता महतो Updated Tue, 12 Mar 2024 03:31 PM IST
सार

लोकसभा चुनाव से पहले सीएए के नियमों को लागू करने पर तमिलनाडु के सीएम ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सीएए केवल भारत के लोगों को विभाजित करेगा।

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Tamil Nadu Chief Minister MK Stalin says the Citizenship Amendment Act will not be implemented in the state
एमके स्टालिन - फोटो : ANI

विस्तार

देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के नियम लागू होने पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इसका विरोध किया। उन्होंने सीएए को विभाजनकारी और बेकार बताते हुए खारिज कर दिया। सीएम स्टालिन ने कहा कि वह इसे राज्य में लागू नहीं होने देंगे।
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लोकसभा चुनाव से पहले सीएए के नियमों को लागू करने पर तमिलनाडु के सीएम ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सीएए और उसके नियम संविधान की मूल संरचना के खिलाफ है। सीएम स्टालिन ने कहा, "इससे किसी को कुछ लाभ नहीं मिलने वाला है।" 
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उन्होंने आगे कहा, "यह केवल भारत के लोगों को विभाजित करेगा। सरकार का रुख है कि यह कानून पूरी तरह से अनुचित है। यह ऐसा है, जिसे निरस्त कर देना चाहिए।" उन्होंने आधिकारिक सूचना में बताया, "तमिलनाडु सरकार किसी भी तरह से सीएए को यहां लागू करने का मौका नहीं देगी।"
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तमिलनाडु में सत्तारूढ़ पार्टी द्रमुख के अध्यक्ष स्टालिन ने बताया कि सीएए धर्मनिरपेक्ष, अल्पसंख्यक और श्रीलंका से तमिलनाडु आए शरणार्थियों के खिलाफ है।

सीएम स्टालिन को राज्य में सीएए लागू करने से रोकने की शक्ति नहीं: अन्नामलाई
भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने मंगलवार को कहा कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के पास कानून के तहत ऐसी कोई शक्ति नहीं है, जिससे वह राज्य में सीएए लागू होने के खिलाफ कोई रुख अख्तियार कर सकें। राज्य सूची, संघीय सूची व समवर्ती सूची और कानून से संबंधित शक्तियों के पृथक्करण जैसे सांविधानिक प्रावधानों को रेखांकित करते हुए, भाजपा नेता ने कहा कि स्टालिन ने संविधान के तहत पद की शपथ ली है।

अन्नामलाई ने कहा कि स्टालिन राजनीतिक रूप से सीएए का विरोध कर सकते हैं, लेकिन वह तमिलनाडु में केंद्रीय कानून को लागू करने के खिलाफ आधिकारिक रुख नहीं अपना सकते। उनके पास संविधान के तहत सीएए व संबंधित नियमों को लागू नहीं करने का निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि स्टालिन ने इस तरह के रुख पर जोर दिया, तो क्या वह मुख्यमंत्री पद की शपथ के खिलाफ जाएंगे।


आखिर क्या है नागरिकता संशोधन कानून?
नागरिकता संशोधन विधेयक से अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अवैध प्रवासियों को नागरिकता के लिए पात्र बनाने के लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया गया है। नागरिकता संशोधन विधेयक 9 दिसंबर 2019 को लोकसभा में प्रस्तावित किया गया था। 9 दिसंबर 2019 को ही विधेयक सदन से पारित हो गया। 11 दिसंबर 2019 को यह विधेयक राज्यसभा से पारित हुआ था।
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