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Tamil Nadu: AIADMK ने द्रमुक से कहा- फैक्ट्री एक्ट में किया गया संशोधन 'मजदूर विरोधी'; जानें पूरा मामला

Sat, 22 Apr 2023 08:04 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 22 Apr 2023 08:04 PM IST
सार

राज्य की द्रमुक सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए अन्नाद्रमुक ने कहा कि विधानसभा में 21 अप्रैल को पारित संशोधन से श्रमिकों के हितों को तगड़ा झटका लगा है।

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Take back anti labour amendment to Factories Act AIADMK tells DMK govt
ई के पलानीस्वामी - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) शनिवार को द्रमुक सरकार से कारखाना अधिनियम 1948 में एक संशोधन को रद्द करने की मांग की। तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी  दावा किया कि यह एक दिन में बारह घंटे काम करने वाला मजदूर विरोधी संशोधन है। इसने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से इस तरह के 'जनविरोधी कदमों' को वापस लेने का आग्रह किया। 

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राज्य सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए अन्नाद्रमुक ने कहा कि विधानसभा में 21 अप्रैल को पारित संशोधन से श्रमिकों के हितों को तगड़ा झटका लगा है।  केंद्र के 'व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020' की ओर इशारा करते हुए अन्नाद्रमुक महासचिव ई के पलानीस्वामी ने कहा कि इसे लागू करना राज्यों के लिए वैकल्पिक बना दिया गया था।
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संशोधन की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को इसे तत्काल वापस लेना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो उनकी पार्टी कार्यकर्ताओं के कल्याण को ध्यान में रखते हुए इसे रोकने के लिए सभी कदम उठाएगी। पलानीस्वामी ने एक बयान में कहा कि जब वह विपक्ष के नेता थे, तब मौजूदा मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने तमिलनाडु में इसे लागू करने का कड़ा विरोध किया था।

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उन्होंने कहा, नए प्रावधानों को लागू करने के खिलाफ तर्क देते हुए स्टालिन ने तब 'अम्मा सरकार' को अल्टीमेटम दिया था। स्टालिन को तब जारी उनके बयान को पढ़ना चाहिए। अन्नाद्रमुक प्रमुख ने स्टालिन पर जोसेफ गोएबल्स को फॉलो करने का आरोप लगाया जो एक सच को छिपाने के लिए बार-बार झूठ का सहारा लेता था। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री को जनविरोधी कदमों को वापस लेना चाहिए। 

उन्होंने आरोप लगाया कि वाम दलों और विदुथलाई चिरुथैगल काची सहित द्रमुक के सहयोगी दलों ने संशोधन के खिलाफ विधानसभा से वॉकआउट किया था और यह राज्य सरकार की श्रमिक विरोधी प्रवृत्ति पर प्रकाश डालता है।  संशोधन विधेयक पारित होने के समय अन्नाद्रमुक के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे क्योंकि उन्होंने दिन में सदन का बॉयकॉट किया था।

पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने कहा कि द्रमुक ने विपक्ष में रहते हुए सड़क परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण का विरोध किया था, जो केवल एक नाटक था। अन्नाद्रमुक नेता ने दावा किया कि सत्ता में आने के बाद अब वह जबरन जमीन पर कब्जा कर रही है। एनईईटी और सार्वजनिक क्षेत्र के एनएलसी के लिए भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ द्रमुक ने केंद्र को आत्मसमर्पण दस्तावेज दिया है।


श्रम एवं कल्याण मंत्री सी वी गणेशन ने शुक्रवार को कारखाना अधिनियम, 1948 में संशोधन के लिए विधेयक पेश करते हुए कहा कि राज्य प्रमुख विनिर्माण कंपनियों का केंद्र है और यहां देश के सबसे अधिक कारखाने और औद्योगिक श्रमिक हैं। गणेशन ने कहा, राज्य सरकार द्वारा कई उद्योगों और उद्योग संघों से अनुरोध प्राप्त हुए थे कि वे लचीले कामकाजी घंटों के लिए वैधानिक प्रावधान करके काम के घंटे में सुधार लाएं। यह बताते हुए कि इससे श्रमिकों, विशेष रूप से महिला कर्मचारियों, उद्योग और अर्थव्यवस्था को कितने लाभ हो सकते हैं।

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