Tamil Nadu: राज्य में अब तीन दिन की छुट्टी ले सकते हैं कर्मचारी; लेकिन काम 48 घंटे ही करना होगा, जानें सबकुछ
शुक्रवार को तमिलनाडु विधानसभा में फैक्ट्री (संशोधन) अधिनियम 2023 पारित किया गया। जिसमें राज्य के सभी कारखानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए काम के लचीले घंटे उपलब्ध कराए गए हैं। हालांकि, विधेयक का काफी विरोध भी किया गया था। कई दलों ने दावा किया था विधेयक पास होने के बाद आठ घंटे की शिफ्ट को 12 घंटे कर दिया जाएगा।
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देश में अधिकतर संस्थान आज भी ऐसे हैं, जहां कर्मचारियों को दो छुट्टियां भी नहीं मिल रही, वहीं तमिलनाडु सरकार ने विधानसभा में एक ऐतिहासिक विधेयक पारित किया। विधेयक के अनुसार, अब राज्य में कर्मचारियों को तीन दिन की छुट्टियों का विकल्प भी दिया गया है। मतलब अब सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही काम करना होगा। विधेयक में नियम तोड़ने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है। हालांकि, सरकार का दावा है कि काम के कुल घंटों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, यानी एक हफ्ते में 48 घंटे ही काम करने होंगे।
शुक्रवार को तमिलनाडु विधानसभा में फैक्ट्री (संशोधन) अधिनियम 2023 पारित किया गया। जिसमें राज्य के सभी कारखानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए काम के लचीले घंटे उपलब्ध कराए गए हैं। हालांकि, विधेयक का काफी विरोध भी किया गया था। कई दलों ने दावा किया था विधेयक पास होने के बाद आठ घंटे की शिफ्ट को 12 घंटे कर दिया जाएगा।
कारखानों के खिलाफ होगी कार्रवाई
उद्योग मंत्री थंगम थेनारासु ने आश्वासन देते हुए बताया कि कर्मचारियों के लिए सप्ताह में काम के कुल घंटों को नहीं बदला गया है। लेकिन अब कर्मचारियों के पास चार दिन काम करने और तीन दिन छुट्टी लेने का प्रावधान दिया गया है। मंंत्री का दावा है कि इससे महिला कर्मचारियों को फायदा होगा। श्रम कल्याण मंत्री सी वी गणेशन ने कहा कि तीनों दिन की छुट्टी का भुगतान किया जाएगा। छुट्टी, ओवरटाइम, वेतन आदि के मौजूदा नियमों को नहीं बदला गया है। गणेशन का कहना है कि उन कारखानों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी, जो अपने कर्मचारियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध काम करने के लिए मजबूर करेंगे।
ध्वनि मत से पारित हुआ विधेयक
विधानसभा में ध्वनि मत से फैक्ट्रीज अधिनियम 2023 को पारित किया गया है। डीएमके के बहुमत के अलावा मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) सहित अन्य पार्टियों ने भी विधेयक का समर्थन किया है। संशोधन विधेयक पेश करते हुए श्रम मंत्री ने कहा कि राज्य कारखानों का हब है, हमारे यहां श्रमिकों की संख्या काफी अधिक है।
काम 48 घंटे ही करने होंगे
मंत्री थेनारासु और गणेशन ने बताया कि काम के कुल 48 घंटों को नहीं बदला है। कर्मचारियों को सिर्फ विकल्प दिया गया है कि वे चाहें तो चार दिन में अपने 48 घंटो को पूरा कर लें और तीन दिन की छुट्टियां लें। थेनारासु का दावा है कि राज्य वैश्विक निवेशों के लिए उभर रहा है, इसलिए दुनिया भर की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संशोधन किया गया है। इस कदम से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। संशोधन से महिलाओं को अधिक लाभ मिलेगा।
कई नेताओं ने किया विरोध
विधेयक पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी राय है। सीपीआई (एम) विधायक वी पी नगईमाली ने कहा कि अधिनियम कॉरपोरेट्स का पक्ष लेगा। जबकि, सीपीआई विधायक टी रामचंद्रन का कहना है कि अगर वर्तमान परिस्थितियों में अधिनियम लागू किया जाता है, तो कर्मचारियों की वेतन वृद्धि और नौकरी की स्थायीता पर प्रहार होगा। वीसीके सदस्य का दावा है कि यह मजदूर विरोधी अधिनियम है, इससे श्रमिकों का शोषण होगा और सरकार को इसे वापस लेना चाहिए। कांग्रेस नेता सेल्वापेरुनथगाई ने कहा कि मजदूर विरोधी विधेयक कर्मचारियों से उनके अधिकारों को छीनेगा।