Tamil Nadu: आदि द्रविड़ से ईसाई धर्म में आए लोगों के लिए आरक्षण की मांग, CM ने विधानसभा में पेश किया प्रस्ताव
बुधवार को पेश किए प्रस्ताव में स्टालिन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि ईसाई धर्म अपनाने वाले आदि द्रविड़ों को आरक्षण देने के लिए कानूनों में संशोधन करें।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया। बुधवार को पेश किए प्रस्ताव में स्टालिन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि ईसाई धर्म अपनाने वाले आदि द्रविड़ों को आरक्षण देने के लिए कानूनों में संशोधन करें।
2011 जनगणना के अनुसार, तमिलनाडु की कुल जनसंख्या 7.21 करोड़ है, जिसमें से 20.01 प्रतिशत यानी 1.44 करोड़ जनसंख्या आदि द्रविड़ है।
जानिए क्या कहता है संविधान
साल 1950 में, नेहरू सरकार ने अनुसूचित जाति को केवल हिंदू धर्म मानने वाले लोगों तक सीमित करने का आदेश दिया था। जिसे 1956 में सिख और 1990 में बौद्धों तक बढ़ा दिया गया था। क्योंकि, सिख और बौद्ध धर्म को सनातन धर्म के विस्तार के रूप में देखा जाता है। संविधान का पैरा तीन (अनुसूचित जाति) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी और धर्म को मानता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा।
राज्यसभा में कानून मंत्री ने दिया था जवाब
2015 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि जब कोई व्यक्ति हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई बनता है, तो हिंदू धर्म के कारण हो रही सामाजिक और आर्थिक अक्षमता खत्म हो जाती है। इसलिए सुरक्षा देना आवश्यक नहीं रहता। इसलिए उसे हिंदू जाति से संबंधित नहीं माना जाएगा। पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में एक बार कहा था कि भारत के संविधान के अनुसार, हिंदू धर्म से एक बार ईसाई या इस्लाम धर्म में परिवर्तित होने के बाद वह व्यक्ति आरक्षण लाभ नहीं ले सकता।