फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Tajmahal tomb covered by red dust

लाल पत्थरों की कटाई से निकलने वाले धूल के कण पहुंच रहे गुंबद तक

Sun, 10 Jul 2016 03:34 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो/ अमर उजाला, आगरा Updated Sun, 10 Jul 2016 03:34 AM IST
विज्ञापन
Tajmahal tomb covered by red dust
ताजमहल - फोटो : Getty
ताजमहल की संगमरमरी दीवारें यमुना में प्रदूषण के कारण पनपे ‘काइरोनोमस’ कीड़ों के स्राव से हरी हो गई थीं, लेकिन अब पूरे स्मारक पर स्टोन डस्ट की लाल परत चढ़ गई है। 197 करोड़ रुपये के ताजगंज प्रोजेक्ट के तहत दर्जनों की संख्या में स्टोन कटर, ग्राइंडर चलाए जा रहे हैं, वहीं दर्जनों डीजल वाहन प्रवेश द्वारों तक पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन


एएसआई की जांच में कई सैंपलों में स्टोन डस्ट मिला है, वहीं मीनारों से कार्बन के कणों के सैंपल भी जांचे जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने दो साल पहले 2014 में ताजमहल के तीनों ओर ताजगंज के विकास के लिए प्रोजेक्ट शुरू किया।
विज्ञापन


नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) ने पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन कर रिपोर्ट दीं, जिसमें इस प्रोजेक्ट में पत्थरों को बाहर से काटकर लाने, केवल दो जनरेटर चलाने, मशीनों से कटाई और धूल न उड़ने देने की सिफारिशें की गई थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

ताजमहल के आसपास के पेड़ गायब

Tajmahal tomb covered by red dust
ताजमहल - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा

ताजगंज प्रोजेक्ट का काम कर रही फर्म ने पहले ही दिन से सत्ता की हनक में सभी नियम कानूनों की धज्जियां उड़ा दीं। कोबल स्टोन की जगह रेड स्टोन के 66 के ब्लॉक बनाने के लिए पत्थर ताजगंज में रोड पर ही काटे जा रहे हैं। लाल पत्थरों को काटने और लगाने के दौरान ग्राइंडिंग करने से जो धूल उड़ रही है, वह ताजमहल की मुख्य गुंबद और मीनारों पर जमा होती रही। 

एएसआई ने जांच के लिए जब मीनारों और गुंबद से सैंपल एकत्र किए तो खुलासा हुआ कि इसमें रेड स्टोन डस्ट पार्टिकल सबसे ज्यादा हैं। एएसआई अधिकारी ताजमहल के मड पैक के दौरान लाल डस्ट के पाए जाने से परेशान हैं और दिल्ली मुख्यालय से इसकी विस्तृत जांच के लिए अनुमति मांगी है।

ताजमहल के तीनों प्रवेश द्वारों पर ताजगंज प्रोजेक्ट के लिए सैकड़ों पेड़ तो काटे गए, लाल पत्थरों की कटाई और ग्राइंडिंग के दौरान धूल भी उड़ी। लाल पत्थर सड़क पर बिछाने के बाद रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था भी खत्म हो गई। प्रोजेक्ट से पहले नीरी ने पर्यावरण पर अध्ययन किया था और अब फिर से नीरी की टीम अध्ययन करने आएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed