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ताजमहल के 22 कमरों का रहस्य : जानिए कब से शुरू हुआ विवाद, याचिका दायर करने वाले ने क्या-क्या दावे किए?

Tue, 10 May 2022 01:35 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Tue, 10 May 2022 01:35 PM IST
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सार
ये पहली बार नहीं है जब ताजमहल को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। इसके पहले भी कई बार दावा किया जाता रहा है कि ताजमहल एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया है। आइए हम आपको बताते हैं कि ताजमहल को लेकर कब से विवाद शुरू हुआ? कब-कब इसको लेकर लोगों ने सवाल खड़े किए और हाल ही में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले भाजपा नेता ने क्या-क्या दावे किए हैं? 
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Taj Mahal 22 Room Mystery Know When and How to Controversy Started in Taj Mahal Bjp Leader Claims Petition
ताजमहल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ताजमहल को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अयोध्या के भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने याचिका दायर की है। डॉ. सिंह ने अपनी याचिका में ताजमहल के उन 22 कमरों को खोलकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से सर्वे कराने की मांग की है, जो लंबे वक्त से बंद हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि ताजमहल में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और शिलालेख हो सकते हैं। अगर सर्वे होता है तो इससे मालूम चलेगा कि ताजमहज में हिंदू मूर्तियां और शिलालेख हैं या नहीं? 


ये पहली बार नहीं है जब ताजमहल को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। इसके पहले भी कई बार दावा किया जाता रहा है कि ताजमहल एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया है। आइए हम आपको बताते हैं कि ताजमहल को लेकर कब से विवाद शुरू हुआ? कब-कब इसको लेकर लोगों ने सवाल खड़े किए और हाल ही में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले भाजपा नेता ने क्या-क्या दावे किए हैं? 

1934 में खुले थे ताजमहल के कमरे

ताजमहल
ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
इतिहासकार प्रो. एसपी वर्मा बताते हैं कि ताजमहल में मकबरे के नीचे 22 कमरे बने हैं। इन्हीं कमरों को लेकर बार-बार सवाल उठता रहा है। वर्मा कहते हैं कि यह आधिकारिक नहीं है, लेकिन सही है कि आखिरी बार साल 1934 में इन कमरों को खोला गया था। तब यह देखने के लिए की कहीं अंदर से ताजमहल में कोई क्षति तो नहीं पहुंच रही है। 

कब शुरू हुआ ताज का विवाद? 
इतिहासकार प्रो. विजय बहादुर से हमने यही सवाल पूछा। उन्होंने कहा, 'यह कोई 60 और 70 के दशक की बात है। तब के समय के इतिहासकार रहे पीएन ओक ने एक के बाद एक कई लेख लिखने शुरू किए। इसमें ताजमहल को लेकर अलग-अलग दावे किए। बाद में उनकी ताजमहज को लेकर दो किताबें आईं। एक का नाम 'ट्रू स्टोरी ऑफ ताज' और दूसरे का नाम 'द ताज महल इज तेजो महालय- अ शिव टेंपल' था। इसमें उन्होंने दावा किया कि ताजमहल एक शिव मंदिर है, जिसे तेजोमहालय के नाम जाना जाता था। 

ओक ने यह भी दावा किया था कि अगर ताज के अंदर जांच और खुदाई हो तो उनकी ये बातें बिल्कुल सटीक निकलेंगी। उस दौरान ओक ने आगरा रेड फोर्ट, काबा समेत कई ऐतिहासिक स्थलों को लेकर दावा किया था कि ये हिंदूओं की बनाई इमारतें हैं, जिसे मुस्लिम आक्रांताओं ने समय-समय पर कब्जा कर लिया और इतिहास भी बदल डाला। 

 

ओक ने क्या तर्क दिया और कौन सा सिद्धांत अपनाया? 
पीएन ओक ने 'ट्रू स्टोरी ऑफ ताज' में लिखा, 'यह एक शिव मंदिर या राजपूताना महल था, जिसे शाहजहां ने कब्जा कर मकबरे में बदल दिया।' ओक ने दावा किया कि ताजमहल से हिंदू अलंकरण और चिन्ह हटा दिए गए और जहां नहीं हटा पाए उन्हें बंद कर दिया। ओक के अनुसार, जिन कमरों में उन वस्तुओं और मूल मंदिर के शिव लिंग को छुपाया गया है, उन्हें सील कर दिया गया है। उन्होंने अपनी किताब में दावा किया है कि मुमताज महल को उनकी कब्र में दफनाया ही नहीं गया था। अपने दावे के समर्थन में ओक ने यमुना नदी की ओर के ताजमहल के दरवाजों के काठ की कार्बन डेटिंग के परिणाम दिए हैं।
 

इतिहासकार पीएन ओक
इतिहासकार पीएन ओक - फोटो : अमर उजाला
ओक ने और क्या-क्या तर्क दिया?
  • किसी भी मुस्लिम इमारत के नाम के साथ कभी महल शब्द प्रयोग नहीं हुआ है। 'ताज' और 'महल' दोनों ही संस्कृत मूल के शब्द हैं। 
  • एक कब्रस्थल को संस्कृत शब्दों से क्यों नामांकित किया जाएगा? 
  • संगमरमर की सीढ़ियां चढ़ने के पहले जूते उतारने की परंपरा चली आ रही है। यह परंपरा हिंदू मंदिरों में निभाई जाने वाली परंपरा है। मकबरे में जूता उतारने की अनिवार्यता नहीं रही है। 
  • संगमरमर की जाली में 108 कलश चित्रित हैं और उसके ऊपर 108 कलश आरूढ़ हैं। हिंदू मंदिर परंपरा में भी 108 की संख्या को पवित्र माना जाता है।
  • ताजमहल शिव मंदिर को इंगित करने वाले शब्द 'तेजोमहालय' शब्द का अपभ्रंश है। तेजोमहालय मन्दिर में अग्रेश्वर महादेव प्रतिष्ठित थे। 
  • ताजमहल के दक्षिण में एक पुरानी पशुशाला है। वहां तेजोमहालय के पालतू गायों को बांधा जाता था। मुस्लिम कब्र में गौशाला होना असंगत है। 
  • ताजमहल के पश्चिमी छोर में लाल पत्थरों के कई उपभवन हैं, जो कब्रिस्तान को देखते हुए सही नहीं लगते। 
  • ताज परिसर में 400 से 500 कमरे तथा दीवारें हैं। कब्रस्थल पर इतने सारे रिहाइशी स्थल क्यों होंगे?

कब-कब बढ़ा विवाद? 

2015 : लखनऊ के हरीशंकर जैन ने आगरा के सिविल कोर्ट में ताजमहल को लार्ड श्रीअग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजोमहालय मंदिर घोषित करने को याचिका दायर की थी। इसका आधार बटेश्वर में मिले राजा परमार्दिदेव के शिलालेख को बताया गया था। 2017 में केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए ताजमहल में कोई मंदिर या शिवलिंग होने या उसे तेजोमहालय मानने से इंकार कर दिया था। बाद में जिला जज ने याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि जैन ने फिर से रिवीजन के लिए याचिका दायर की। ताजमहल के बंद हिस्सों की वीडियोग्राफी कराने से संबंधित याचिका एडीजी पंचम के यहां अभी विचाराधीन है।

2017 : जब उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तब राज्यसभा सांसद रहे विनय कटियार ने ताजमहल का मुद्दा उठाया। अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि के आंदोलन में भी विनय कटियार आगे थे। कटियार ने 'ताजमहल' को 'तेजोमहल' घोषित करते हुए योगी आदित्यनाथ को यह सलाह दी कि 'उन्हें चाहिए कि वह ताजमहल जाएं और उसमें हिंदू चिह्नों को खुद देख लें।'

2022 : पिछले महीने यानी मार्च में अयोध्या तपस्वी छावनी से जुड़े संत जगद्गुरु परमहंसाचार्य आगरा गए थे। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि भगवा कपड़े पहनने की वजह से उन्हें ताजमहल में नहीं घुसने दिया गया। बाद में परमहंसाचार्य ने भी कहा कि ये ताजमहल तेजो महल है। इसका सही इतिहास पढ़ाया जाना चाहिए। 
 

याचिका में क्या-क्या दावे किए हैं?

ताजमहल
ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह का कहना है कि 1600 ई. में आए तमाम यात्रियों ने अपने यात्रा संस्मरण में राजा मानसिंह के महल का वर्णन किया है। ताजमहल 1653 में बना और 1951 में औरंगजेब का एक पत्र सामने आया जिसमें वह लिखता है कि अम्मी के मकबरे की मरम्मत कराने की जरूरत है। 

कहा जाता है कि ये तेजोमहल राजा मान सिंह का ही था। इससे जुड़ा एक अभिलेख जयपुर स्थित सिटी पैलेस संग्रहालय में है। इसमें जिक्र है कि राजा मान सिंह की हवेली के बदले में शाहजहां ने राजा जय सिंह को चार हवेलियां दी थीं। यह फरमान 16 दिसंबर 1633 का है। इसमें राजा भगवान दास की हवेली, राजा माधो सिंह की हवेली, रूपसी बैरागी की हवेली और चांद सिंह पुत्र सूरज सिंह की हवेलियां देने का उल्लेख है। इसके अलावा शाहजहां के फरमान में उल्लेख है कि उन्होंने जय सिंह से संगमरमर मंगवाया था। इस पत्र को आधार मानकर दावा किया जाता है कि जितना संगमरमर शाहजहां ने मंगवाया था, उससे ताजमहल का निर्माण नहीं हो सकता।
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