फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Bageshwar Baba Photo Burning Case: Bengal Congress Leader Ashutosh Chatterjee Appears Before Police

बागेश्वर बाबा की तस्वीर जलाने का आरोप: बंगाल कांग्रेस नेता पुलिस के सामने पेश, क्यों मचा सियासी घमासान?

Sun, 13 Sep 2026 07:09 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 13 Sep 2026 07:09 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल में बागेश्वर धाम के प्रमुख पुजारी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के मांसाहार संबंधी बयान पर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। तस्वीर जलाने के आरोप में कांग्रेस नेता आशुतोष चटर्जी से पुलिस ने पूछताछ की। चटर्जी ने कार्रवाई को बदले की राजनीति बताया, जबकि भाजपा युवा मोर्चा ने कांग्रेस पर हिंदुओं से जुड़े मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाया। आखिर बयान से शुरू हुआ विवाद तस्वीर जलाने और सियासी टकराव तक कैसे पहुंचा?

विज्ञापन
Bageshwar Baba Photo Burning Case: Bengal Congress Leader Ashutosh Chatterjee Appears Before Police
बाबा बागेश्वर। - फोटो : ANI

विस्तार

कोलकाता में बागेश्वर धाम के प्रमुख पुजारी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तस्वीर कथित तौर पर जलाने के मामले में पश्चिम बंगाल कांग्रेस के महासचिव आशुतोष चटर्जी रविवार को भवानीपुर पुलिस थाने पहुंचे। पुलिस ने उन्हें मामले की जांच के लिए नोटिस देकर बुलाया था। यह विवाद दुर्गा पूजा के दौरान बंगालियों के मांसाहार को लेकर शास्त्री की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था। अब इस मामले ने कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव का रूप ले लिया है।

विज्ञापन


मामला आठ सितंबर को दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर पुलिस थाने के बाहर हुए कांग्रेस के प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन शास्त्री की बंगालियों, बंगाल की संस्कृति और दुर्गा पूजा के दौरान खान-पान को लेकर की गई टिप्पणियों के विरोध में किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान शास्त्री की तस्वीर को कथित तौर पर पैरों से कुचला गया, जूते से मारा गया और फिर जला दिया गया। इसी मामले में दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस के महासचिव अतनु दास को गिरफ्तार किया जा चुका है। आशुतोष चटर्जी और दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप प्रसाद को भी आरोपी बनाया गया है।

विज्ञापन

पुलिस ने आशुतोष चटर्जी को क्यों बुलाया?

चटर्जी ने बताया कि भवानीपुर पुलिस थाने की ओर से उन्हें रविवार सुबह करीब 10 बजे नोटिस दिया गया था। इसमें उन्हें दोपहर तीन बजे मामले के जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। इसके बाद वह तय समय पर थाने पहुंचे। पुलिस की कार्रवाई उस निर्देश के बाद तेज हुई, जिसमें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 10 सितंबर को शास्त्री की तस्वीर जलाने में शामिल लोगों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस से कहा था। उन्होंने कहा था कि इस तरह की गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- शुभेंदु सरकार की बड़ी कार्रवाई: पश्चिम बंगाल में 252 मदरसों को बंद करने का आदेश; सर्वे में मिली क्या कमियां?

पुलिस कार्रवाई पर कांग्रेस नेता ने क्या कहा?

पुलिस थाने से बाहर निकलने के बाद चटर्जी ने कार्रवाई को ‘बदले की राजनीति’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इशारे पर काम कर रही है और उन लोगों को परेशान किया जा रहा है, जो बागेश्वर बाबा जैसे स्वयंभू धर्मगुरुओं की टिप्पणियों का विरोध कर रहे हैं। चटर्जी ने कहा कि बंगालियों को उनके पारंपरिक खान-पान, जीवनशैली और रीति-रिवाज छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताया और कहा कि वह कानून का पालन करेंगे।

कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं में क्यों हुई नारेबाजी?

चटर्जी के पुलिस थाने से बाहर निकलते समय कांग्रेस और भाजपा के युवा मोर्चा के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाए। भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पर हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार जैसे मुद्दों को नहीं उठाने का आरोप लगाया। वहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा पर ऐसे स्वयंभू धर्मगुरुओं का साथ देने का आरोप लगाया, जिनकी टिप्पणियों से बंगाली हिंदुओं की भावनाएं आहत होती हैं। इस टकराव ने साफ कर दिया कि मामला अब केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है।

चार बिंदुओं में समझें क्या है पूरा विवाद?

  • विवाद की शुरुआत पांच सितंबर को हावड़ा में हुए एक कार्यक्रम से हुई थी। वहां धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बंगालियों से दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन छोड़ने की अपील की थी। उन्होंने धार्मिक मौकों पर मांस खाने वाले लोगों को ‘पाखंडी’ बताया था। उनके इस बयान पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई और भवानीपुर पुलिस थाने में शिकायत देकर शास्त्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। कांग्रेस का कहना था कि बंगाल की परंपरा और खान-पान को लेकर इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती।
  • इसके बाद आठ सितंबर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भवानीपुर पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन किया। इसी प्रदर्शन के दौरान शास्त्री की तस्वीर के साथ कथित तौर पर बदसलूकी और उसे जलाने की घटना हुई। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई शुरू की और अतनु दास को गिरफ्तार कर लिया। अब आशुतोष चटर्जी और प्रदीप प्रसाद का नाम भी मामले में आरोपी के तौर पर सामने आया है। चटर्जी ने सवाल उठाया कि जिस बयान के विरोध में प्रदर्शन हुआ, उस बयान को लेकर शास्त्री के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
  • पूरे विवाद में दो अलग-अलग मुद्दे सामने आ रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस शास्त्री की टिप्पणी को बंगाल की संस्कृति, खान-पान और परंपराओं में दखल के तौर पर देख रही है। दूसरी तरफ भाजपा कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान तस्वीर जलाने की घटना को मुद्दा बना रही है। पुलिस की कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। फिलहाल मामले में कांग्रेस नेता पुलिस के सामने पेश हो चुके हैं और जांच के बीच दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
  • आशुतोष चटर्जी ने साफ कहा है कि कांग्रेस बंगाल या बंगालियों को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करने वालों के सामने नहीं झुकेगी। वहीं, तस्वीर जलाने के मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है। इस तरह दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार को लेकर दिया गया एक बयान पहले राजनीतिक विरोध, फिर प्रदर्शन और अब पुलिस केस का कारण बन गया है। आने वाले समय में इस मामले में पुलिस जांच और दोनों दलों की राजनीतिक बयानबाजी पर नजर रहेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed