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'पहले चोर हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद': राम मंदिर चंदे को लेकर गोविंदानंद सरस्वती ने लगाया आरोप, जांच की मांग

Thu, 25 Jun 2026 03:35 AM IST
निर्मल कांत एएनआई, मुंबई।
एएनआई, मुंबई। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 25 Jun 2026 03:35 AM IST
सार

स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर राम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े दान और एकत्र सोना-चांदी की कथित चोरी और गबन के गंभीर आरोप लगाए और कहा कि ट्रस्ट बनने के बाद केवल आधिकारिक रूप से ही दान एकत्र किया जा सकता था। उन्होंने क्या आरोप लगाया है, पढ़िए रिपोर्ट-

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Swami Govindananda Saraswati accuses Joshimath Shankaracharya over Ram Mandir donations
स्वामी गोविंदानंद सरस्वती - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई

विस्तार

स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने बुधवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर चोरी और गबन के गंभीर आरोप लगाए। स्वामी गोविंदानंद सरस्वती, दिवंगत जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के दीक्षित शिष्य हैं। 
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गोविंदानंद सरस्वती ने क्या आरोप लगाया?
गोविंदानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि पांच फरवरी 2020 को जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हुआ, तभी से दान और धन संग्रह का पूरा अधिकार उसी ट्रस्ट के पास था। इसके दो दिन बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अलग से 'राम राम ग्राम ग्राम' अभियान शुरू किया। देशभर से सोना और कीमती वस्तुएं एकत्र करना जारी रखा। 
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उन्होंने कहा, यह चोरी यहां से शुरू नहीं हुई। यह तब शुरू हुई, जब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की स्थापना हुई। देशभर से दान इकट्ठा किया जाने लगा। लेकिन उस समय यह चोरी सामने नहीं आई। हम इसे सबूतों के साथ पेश करना चाहते हैं। आजकल फर्जी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती देश भर में घूम रहे हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती हमारे गुरुजी के पास आए, दस्तावेज चुराए और दूसरों से झूठ बोला। हमारे पूज्य गुरुदेव ने करोड़ों रुपये, सोना और चांदी इकट्ठा किए। यह काम उन्होंने सिर्फ अयोध्या में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में किया। यह सब राम जन्मभूमि पर राम मंदिर बनाने के लिए इकट्ठा किया गया था। बाद में इसे राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपने की बात थी। 
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'इसी बीच, हमारे पूज्य गुरुदेव का 2022 में निधन हो गया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यह सारा सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुएं ले लीं और श्री विद्या मठ में रख दीं। हमने इस मामले में एसआईटी को पत्र लिखा है। हम आपको सबूत दिखाएंगे। यह बहुत चौंकाने वाला मामला है। एक बार जब राम जन्मभूमि पर ट्रस्ट बन जाता है, तो आधिकारिक रूप से पैसा एकत्र करने की जिम्मेदारी किसकी होती है? यह राम जन्मभूमि ट्रस्ट की जिम्मेदारी है। लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने क्या किया?'

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'अवैध रूप से एकत्र किया सोना'
गोविंदानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि 1000 से अधिक गांवों से अवैध रूप से सोना इकट्ठा किया गया। उन्होंने दावा किया कि वाराणसी में दानकर्ताओं को विशेष रूप से अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से पूर्व निर्धारित विक्रेताओं की सूची से सोना खरीदने के लिए कहा गया। गोविंदानंद ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार के आदेशों का सीधा उल्लंघन था, जिनमें दान देने की शक्ति केवल आधिकारिक ट्रस्ट के पास ही केंद्रित की गई थी।

उन्होंने कहा, यह राम जन्मभूमि ट्रस्ट की जिम्मेदारी है। लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने क्या किया? राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट 5 फरवरी 2020 को बना था, जिसका मतलब है कि उस तारीख के बाद किसी को भी पैसा इकट्ठा करने का अधिकार नहीं है। लेकिन 7 फरवरी 2020 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने खुद वाराणसी में बैठकर यह घोषणा की कि वह काशी में ‘राम राम ग्राम ग्राम अभियान’ शुरू कर रहे हैं राम लला के बाल मंदिर के लिए सोना इकट्ठा करने के लिए। क्या यह गलत नहीं है?   

 
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