फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   swadeshi jagran manch will ask government on promoting Paytm

संघ की संस्था केंद्र सरकार से पूछेगी पेटीएम को बढ़ावा देने का राज 

Wed, 30 Nov 2016 04:13 AM IST
एम संजय/ नई दिल्ली
एम संजय/ नई दिल्ली Updated Wed, 30 Nov 2016 04:13 AM IST
विज्ञापन
swadeshi jagran manch will ask government on promoting Paytm
नोटबंदी के दौर में कैशलेस अर्थव्यवस्था का भारी लाभ उठा रही पेटीएम कंपनी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। चीन के साथ संबंधों को लेकर कंपनी पहले से ही विवादो में हैं। तो संघ की संस्था स्वदेशी जागरण मंच ने कंपनी पर निशाना साध दिया है। पेटीएम के सभी पहलूओं के अध्ययन के बाद स्वदेशी जागरण मंच सरकार से लेकर जनता के बीच कंपनी के खिलाफ आवाज उठाएगा। 
विज्ञापन


पेटीएम को बढ़ावा देने के मामले को लेकर स्वदेशी जगारण मंच जल्द ही सरकार से सवाल कर सकता है कि वह पेटीएम को इतना बढ़ावा क्यों दे रही है। तो जनता को भी वह पेटीएम के खिलाफ जागरूक करेगा। मंच को पेटीएम के मुखिया विजय शेखर शर्मा की दलिले भी रास नहीं आई हैं। चीनी कंपनी अलीबाबा के साथ रिश्तों को लेकर निशाने पर आ रहे शेखर शर्मा ने मारूती कंपनी का उदाहरण देते हुए अपना बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि सूजूकी के साथ रिश्तों के बावजूद भी जिस तरह मारूती भारतीय कंपनी है, ठीक उसी तरह उनकी कंपनी पेटीएम भी शुद्ध रूप से भारतीय है। 
विज्ञापन


मगर संघ के संगठन स्वदेशी जागरण मंच को पेटीएम प्रमुख विजय शेखर शर्मा की दलीलें रास नहीं आई हैं। स्वदेशी जगारण के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा है कि मारूती की आड़ लेकर पेटीएम का चीनी कंपनी के साथ रिश्तों का बचाव उचित नहीं है। मारूती से जुड़ी कंपनी सूजूकी जापान की है तो पेटीएम के साथ जुड़ी अलीबाबा चीन की कंपनी है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

पेटीएम के चीन से संबंधों को देश कैसे स्वीकार कर सकता है

swadeshi jagran manch will ask government on promoting Paytm
paytm - फोटो : rajendra singh bisht (babli)
अमर उजाला से बातचीत में महाजन ने कहा कि स्वदेशी जागरण मंच हमेशा से विदेशी वस्तुओं के उपयोग के विरोध में रहा है। जब देश ने चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का मानस बनाया हुआ है। तो पेटीएम के साथ चीनी कंपनी के संबंधों को देश कैसे स्वीकार कर सकता है। उन्होंने कहा कि वे पेटीएम के साथ चीनी कंपनी अलीबाबा के रिश्तों की ही नहीं कंपनी के सभी पहूलओं की समीक्षा करेंगे। महाजन ने कहा कि पेटीएम से जुड़े दस्तावेजों की गहन अध्ययन के बाद वे सरकार और जनता दोनों का दरवाजा खटखटाएंगे। 

सरकार से पूछा जाएगा कि वह पेटीएम को बढ़ावा क्यों दे रही है। तो वहीं पेटीएम की कमियों के बारे में जनता को अवगत कराया जाएगा। महाजन के अनुसार पेटीएम के साथ अलीबाबा के कारोबारी रिश्तों के अलावा कई पहलूओं की खोजबीन जरूरी है। उन्होंने कहा कि पेटीएम में अलीबाबा की करीब 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहां से डाटा इधर-उधर होने की भी चर्चाए हैं। सभी डाटा एक्सल फार्म में होने की वजह से सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है। 

स्वदेशी जगारण मंच का कहना है कि अलीबाबा के साथ पेटीएम के रिश्तों के अलावा कई सवाल हैं जिनका जवाब मिलना देश के लिए जरूरी है। क्या ऐसा कोई प्रावधान है कि इस तरह की बैंकिंग कंपनी में विदेशी कंपनी निवेश कर सकती है। क्या विदेशी मूल का व्यक्ति ऐसी कंपनियों का निदेशक हो सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed