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Bengal: सीएम शुभेंदु बोले- कोलकाता के बाद नदिया, फिर पूरे बंगाल में इस्कॉन संभालेगा मिड-डे मील की जिम्मेदारी
Fri, 17 Jul 2026 01:28 AM IST
Devesh Tripathi
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलकाता
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: Devesh Tripathi
Updated Fri, 17 Jul 2026 01:28 AM IST
सार
पश्चिम बंगाल सरकार ने एक अगस्त से कोलकाता के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में मिड-डे मील व्यवस्था के संचालन के लिए इस्कॉन के साथ पायलट परियोजना शुरू करने का फैसला किया है। इसके बाद इस मॉडल का विस्तार नदिया और फिर अन्य जिलों में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर गुणवत्ता वाला पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है।
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पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी
- फोटो : Suvendu Adhikari
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विस्तार
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के मिड-डे मील कार्यक्रम में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को घोषणा की कि 1 अगस्त से कोलकाता के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में मिड-डे मील की जिम्मेदारी इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) को सौंपी जाएगी। इसके बाद इस व्यवस्था का विस्तार पहले नदिया और फिर चरणबद्ध तरीके से राज्य के अन्य जिलों तक किया जाएगा।
पूर्व मेदिनीपुर के मेचेदा में आयोजित रथयात्रा समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार और इस्कॉन के बीच इस संबंध में प्रारंभिक समझौता हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य बच्चों को बेहतर और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है और इस दिशा में इस्कॉन का अनुभव उपयोगी साबित होगा।
मिड-डे मील को लेकर क्या बोले शुभेंदु अधिकारी?
मुख्यमंत्री ने कहा, "एक अगस्त से कोलकाता में इसकी शुरुआत होगी। इसके बाद नदिया और फिर राज्य के अन्य हिस्सों में इसे लागू किया जाएगा। मिड-डे मील की व्यवस्था इस्कॉन करेगा और बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।" उन्होंने इस्कॉन की सामाजिक और सेवा गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर भोजन वितरण और सामुदायिक रसोई संचालन का अनुभव रखती है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में इस्कॉन से कहा, "आगे बढ़ते रहिए, चरैवेति।"
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राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में कोलकाता नगर क्षेत्र के स्कूलों में इस्कॉन के माध्यम से मिड-डे मील शुरू करने का संकेत दिया था। इसे फिलहाल एक पायलट परियोजना के रूप में लागू किया जा रहा है। परियोजना सफल रहने पर इसे पूरे राज्य में लागू किया जा सकता है। हालांकि, इस घोषणा के साथ ही राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में बहस भी तेज हो गई है।
मिड-डे मील में अंडे पर क्या है सरकार की नीति?
अब तक राज्य के कई स्कूलों में छात्रों को सप्ताह में निर्धारित दिनों पर अंडा दिया जाता रहा है। इस्कॉन द्वारा भोजन आपूर्ति की जिम्मेदारी संभालने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या बच्चों को पहले की तरह अंडा और अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ मिलते रहेंगे। सीएम ने इस पर सीधे कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन ही उपलब्ध कराया जाएगा और पोषण मानकों से कोई समझौता नहीं होगा।
क्या है इस्कॉन का मॉडल?
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पूर्व मेदिनीपुर के मेचेदा में आयोजित रथयात्रा समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार और इस्कॉन के बीच इस संबंध में प्रारंभिक समझौता हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य बच्चों को बेहतर और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है और इस दिशा में इस्कॉन का अनुभव उपयोगी साबित होगा।
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मिड-डे मील को लेकर क्या बोले शुभेंदु अधिकारी?
मुख्यमंत्री ने कहा, "एक अगस्त से कोलकाता में इसकी शुरुआत होगी। इसके बाद नदिया और फिर राज्य के अन्य हिस्सों में इसे लागू किया जाएगा। मिड-डे मील की व्यवस्था इस्कॉन करेगा और बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।" उन्होंने इस्कॉन की सामाजिक और सेवा गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर भोजन वितरण और सामुदायिक रसोई संचालन का अनुभव रखती है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में इस्कॉन से कहा, "आगे बढ़ते रहिए, चरैवेति।"
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राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में कोलकाता नगर क्षेत्र के स्कूलों में इस्कॉन के माध्यम से मिड-डे मील शुरू करने का संकेत दिया था। इसे फिलहाल एक पायलट परियोजना के रूप में लागू किया जा रहा है। परियोजना सफल रहने पर इसे पूरे राज्य में लागू किया जा सकता है। हालांकि, इस घोषणा के साथ ही राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में बहस भी तेज हो गई है।
मिड-डे मील में अंडे पर क्या है सरकार की नीति?
अब तक राज्य के कई स्कूलों में छात्रों को सप्ताह में निर्धारित दिनों पर अंडा दिया जाता रहा है। इस्कॉन द्वारा भोजन आपूर्ति की जिम्मेदारी संभालने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या बच्चों को पहले की तरह अंडा और अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ मिलते रहेंगे। सीएम ने इस पर सीधे कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन ही उपलब्ध कराया जाएगा और पोषण मानकों से कोई समझौता नहीं होगा।
क्या है इस्कॉन का मॉडल?
- देश के कई राज्यों में सामुदायिक रसोई और भोजन वितरण का संचालन।
- "अक्षय पात्र" जैसी परियोजनाओं के माध्यम से लाखों बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने का अनुभव।
- बड़े पैमाने पर केंद्रीकृत रसोई व्यवस्था और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रणाली।
- एक अगस्त : कोलकाता में शुरुआत
- दूसरा चरण : नदिया जिला
- तीसरा चरण : राज्य के अन्य जिले
- लक्ष्य : सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्रों तक पौष्टिक भोजन पहुंचाना