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बंगाल दिवस: CM शुभेंदु अधिकारी ने चला बड़ा दांव, अब 20 जून को मनेगा उत्सव; दीदी का पोइला बैसाख वाला फैसला पलटा

Sun, 10 May 2026 02:32 AM IST
राकेश कुमार पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता। Published by: राकेश कुमार Updated Sun, 10 May 2026 02:32 AM IST
सार

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 'पोइला बैसाख' के बजाय 20 जून को 'पश्चिम बंगाल दिवस' के रूप में चुनकर राज्य की स्थापना के ऐतिहासिक आधार को प्राथमिकता दी है। अधिकारी का कहना है कि यह फैसला बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखने वाले मतदान और डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को आधिकारिक पहचान दिलाने की एक बड़ी राजनीतिक कोशिश है।

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suvendu adhikari announces june 20 as west bengal day replacing mamata banerjee choice of poila baisakh
शुभेंदु अधिकारी - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के साथ ही अब प्रतीकों और तारीखों की जंग भी तेज हो गई है। राज्य के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पद संभालते ही एक बड़ा एलान किया है। उन्होंने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार 'पश्चिम बंगाल दिवस' के आयोजन के लिए 20 जून की तारीख को आधिकारिक मंजूरी देगी। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसके लिए 'पोइला बैसाख' यानी बंगाली नववर्ष को चुना था, जिसे अब शुभेंदु सरकार बदलने जा रही है।
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20 जून ही क्यों है खास?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों से बात करते हुए इस तारीख का ऐतिहासिक महत्व समझाया। उन्होंने कहा, '20 जून 1947 वह ऐतिहासिक दिन था, जब बंगाल के भारत में शामिल होने का फैसला लिया गया था। मैं जल्द ही कैबिनेट और विधानसभा में इसे आधिकारिक बनाने का प्रस्ताव पेश करूंगा।'
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दरअसल, 20 जून 1947 को बंगाल विधानसभा के विधायकों की बैठक हुई थी। इसमें पश्चिम बंगाल के विधायकों ने भारत के साथ रहने और विभाजन के पक्ष में मतदान किया था। अधिकारी का मानना है कि इसी फैसले की वजह से आज हम एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश का हिस्सा हैं।
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यह भी पढ़ें: Khabaron Ke Khidadi: बंगाल में बनी भाजपा की पहली सरकार, विश्लेषकों ने बताया शुभेंदु के सामने कितनी चुनौतियां?


डॉक्टर मुखर्जी को दी श्रद्धांजलि
शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री सीधे भवानीपुर स्थित जनसंघ के संस्थापक डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आवास पहुंचे। वहां उन्होंने मुखर्जी और भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों के प्रयासों से ही पश्चिम बंगाल का अस्तित्व बचा रहा।

पुराना विवाद और राजभवन का रुख
यह विवाद नया नहीं है। साल 2023 में केंद्र सरकार के निर्देश पर तत्कालीन राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राजभवन में 20 जून को बंगाल दिवस मनाया था। ममता बनर्जी ने तब इसका कड़ा विरोध किया था। उन्होंने तर्क दिया था कि 20 जून विभाजन की हिंसा और रक्तपात की याद दिलाता है। तब विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित कर 'पोइला बैसाख' को राज्य दिवस घोषित किया गया था। अब शुभेंदु सरकार ने उस फैसले को पलटकर नई लकीर खींच दी है।

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