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विद्रोहियों से जान का खतरा बताकर निलंबित सेनाधिकारी पहुंचा एससी, सीबीआई जांच का कर रहा है सामना
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Fri, 08 Jun 2018 03:51 AM IST
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सीबीअाई (फाइल फोटो)
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अज्ञात तरीकों से संपत्ति जमा करने के आरोप में सीबीआई जांच का सामना कर रहे सेना के निलंबित अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल हरप्रीत सिंह ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस एके गोयल व जस्टिस अशोक भूषण की अवकाशकालीन पीठ के सामने सिंह के वकील ने कहा कि सीबीआई की तरफ से दर्ज मामले के दौरान जब वह अप्रैल में कोर्ट में पेश होने इम्फाल गए थे तो उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गईं थीं।
हाल ही में निलंबित किए गए लेफ्टिनेंट कर्नल सिंह प्रतिनियुक्ति पर मणिपुर में असम राइफल्स की इंटेलिजेंस विंग में तैनात थे। वहां उन्होंने विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई की एक श्रृंखला चलाई थी। उनका दावा है कि इन कार्रवाईयों में करीब 100 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि कई मारे गए थे।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान लगी चोट से खुद के 60 फीसदी विकलांग होने और वर्ष 2002 में खुद को सेना मेडल दिए जाने की बात कहते हुए भ्रष्टाचार के झूठे मामले में फंसाए जाने का आरोप लगाया। साथ ही कोर्ट से अपने मामले को इम्फाल से चंडीगढ़ स्थानांतरित करने की मांग की। पीठ ने उनकी याचिका पर गर्मी के अवकाश खत्म होने के बाद शीर्ष न्यायालय की सभी पीठों के खुलने तक सुनवाई टाल दी है।
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हाल ही में निलंबित किए गए लेफ्टिनेंट कर्नल सिंह प्रतिनियुक्ति पर मणिपुर में असम राइफल्स की इंटेलिजेंस विंग में तैनात थे। वहां उन्होंने विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई की एक श्रृंखला चलाई थी। उनका दावा है कि इन कार्रवाईयों में करीब 100 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि कई मारे गए थे।
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उन्होंने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान लगी चोट से खुद के 60 फीसदी विकलांग होने और वर्ष 2002 में खुद को सेना मेडल दिए जाने की बात कहते हुए भ्रष्टाचार के झूठे मामले में फंसाए जाने का आरोप लगाया। साथ ही कोर्ट से अपने मामले को इम्फाल से चंडीगढ़ स्थानांतरित करने की मांग की। पीठ ने उनकी याचिका पर गर्मी के अवकाश खत्म होने के बाद शीर्ष न्यायालय की सभी पीठों के खुलने तक सुनवाई टाल दी है।
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