विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने CPEC पर चीन को दिखाया आईना
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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान से होकर चीन जाने वाले आर्थिक गलियारा(सीपीईसी) मामले में उसे आईना दिखाया है। विदेश मंत्री ने साफ कहा कि सीपीईसी मामले में चीन को दोबारा सोचना पड़ेगा। विदेश मंत्री ने यहां चीन के प्रयास पर सीधे सवालिया निशान लगाया। उन्होंने कहा कि भारत कनेक्टिविटी के खिलाफ नहीं है। कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट को तो हम मानते हैं, लेकिन सवाल यह है कि इसका स्वरुप क्या है।
यह कनेक्टिविटी क्या आपस में सलाह मशविरे की बिनाग पर हो रही है, क्या यह किसी देश की संप्रभुता पर सवाल तो खड़े नहीं कर रही है....आदि..आदि। विदेश मंत्री ने कहा कि जिस तरह से चीन ने सीपीईसी की रुपरेखा तैयार की है और यह भारत के जम्मू-कश्मीर वाले हिस्से से होकर गुजरेगा, वह भारत की संप्रभुता पर असर डालेगा। विदेश मंत्री ने अपने अंदाज को सख्त करते हुए कहा कि इस परियोजना को लेकर चीन को दोबारा सोचना पड़ेगा।
चीन को एनएसजी पर दे दिया जवाब
चीन द्वारा एनएसजी पर सवाल उठाने का जवाब दे दिया है। विदेश मंत्री ने कहा कि चीन कहता है कि एनएसजी को लेकर उसका विरोध भारत विशेष पर नहीं है। चीन कहना है कि गैर एनपीटी(जिन देशों ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया) देशों को एनएसजी की सदस्यता नहीं मिलनी चाहिए।
सुषमा स्वराज का कहना है कि उसके इस सवाल का उत्तर फ्रांस है। इसका जवाब उसे दिया जा चुका है। सुषमा ने कहा कि चीन भारत और पाकिस्तान का सवाल उठाता है तो हमारा कहना है कि 2008 में भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से परमाणु सामग्री को लेकर विश्वसनीयता हासिल हो चुकी है। इसलिए बारत की तुलना पाकिस्तान से न की जाए।
उठाएंगे चीन के हेलीकाप्टर का मुद्दा
चीन के सामने उत्तराखंड में उसके हेलीकाप्टर उतरने का मुद्दा भारत उठाएगा। विदेश मंत्री ने कहा कि हम इसे अपने समकक्ष के समक्ष उठाएंगे। हालांकि विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों की सीमा रेखाएं निर्धारित नहीं हैं। ऐसे में कई बार हमारी तरफ से या उनकी तरफ से इस तरह की अनजाने में त्रुटि हो जाती है, लेकिन इसके बाद भी यह मुद्दा उठाया जाएगा।