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जानें, देश में कहां और कितने बजे दिखेगा सूर्यग्रहण, दिल्ली में दो घंटे 40 मिनट तक रहेगा प्रभाव

Wed, 25 Dec 2019 06:45 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 25 Dec 2019 06:45 PM IST
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surya grahan 2019 solar eclipse time in cities of India
surya grahan

26 दिसंबर 2019 को इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा। यह खंडग्रास सूर्यग्रहण है और यह सूर्य ग्रहण गुरुवार के दिन पौष मास की अमावस्या पर सुबह 08:17 मिनट से लेकर 10:57 मिनट तक रहेगा।

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देश की राजधानी दिल्ली में सुबह 8:17 बजे से 10:57 बजे तक सूर्यग्रहण देखने का मौका राजधानी वासियों को मिलेगा। हालांकि इस दौरान आंखों को सूर्य के तेज से बचाने के लिए विशेष सुरक्षा चश्मे या अन्य साधन उपयोग करने होंगे। वहीं उत्तर भारत में यह सूर्यग्रहण पूर्ण नहीं होगा, जबकि दक्षिण भारत के कई हिस्सों में पूर्ण एन्युलर यानी कुंडलाकार सूर्यग्रहण नजर आएगा।
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सूर्यग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है जिसमें सूर्य और पृथ्वी के मध्य में चंद्रमा आ जाता है। दक्षिण भारत इस यादगार खगोलीय घटना के मामले में भाग्यशाली होगा, यहां तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के कई हिस्सों में पूर्ण सूर्यग्रहण नजर आएगा।

इसके अलावा विश्व में सऊदी अरब, कतर, यूएई, ओमान, श्रीलंका, मलयेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर, उत्तरी मारियाना द्वीप आदि में इसे देखा जा सकेगा। पृथ्वी पर यह सबसे पहले कतर और ओमान में शुरू होगा, वहीं भारत में यह केरल में कासरगोड के चेरुवथुर में शुरू होगा। भारत में प्रमुख शहरों सबसे पहले मुंबई में 8:04 बजे शुरू होगा और सबसे आखिर तक अगरतला में 11:39 बजे तक देखा जा सकेगा। वहीं पोर्ट ब्लेयर में सबसे अधिक समय 3:36 घंटे तक यह रहेगा।

उत्तर भारत में प्रमुख शहरों में ग्रहण

शहर ग्रहण शुरू होगा चरम खत्म होगा
नई दिल्ली 08:17:01 09:30:53 10:57:07
चंडीगढ़ 08:19:48 09:37:29 10:54:31
श्रीनगर 08:22:51 09:30:22 10:48:11
 

 

सावधानी जरूरी है

ग्रहण के दौरान सूर्य को नग्न आंखों से देखना आंखों की सेहत के लिए नुकसानदेह होता है। इसके लिए केवल ऐसे चश्मे उपयोग किया जाना चाहिए जो आईएसओ 12312-2 सर्टिफाइड हों, यह सुझाव अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने जारी किया है। इसके अलावा वेल्डिंग के दौरान उपयोग होने वाले चश्मे या पिनहोल प्रोजेक्टर का उपयोग कर सकते हैं।

अंधविश्वासों से बचें

सूर्यग्रहण के दौरान खाना, पीना और अपने रोजमर्रा के काम करना सुरक्षित है। इससे कोई नुकसान नहीं होता।

क्या हैं फैक्ट्स

  • जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह कवर करते हुए गुजरता है और उसे पूरी तरह ढक देता तो यह पूर्ण सूर्यग्रहण होता है
  • जब सूर्य से गुजरते हुए चंद्रमा की अंतरिक्ष में स्थिति से सूर्य की ओर अधिक करीब हो जाती है तो कुंडलाकार ग्रहण होता है।
  • जब चंद्रमा सूर्य के किनारे से गुजरता है (आपकी स्थिति के अनुसार) तो वहां आंशिक ग्रहण होता है।
  • किसी एक जगह हुआ पूर्ण सूर्यग्रहण अगली बार वहीं औसतन 140 साल में होगा।

 

अगले 100 वर्षों में केवल छह सूर्यग्रहण दिखेंगे भारत से


गुरुवार को सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य एक आग के छल्ले जैसा नजर आएगा। इसका कारण यह है कि इन दिनों सूर्य पृथ्वी के अपेक्षाकृत निकट है जबकि कि चंद्रमा दूर है। अत: चंद्रमा सूर्य को पूरा नहीं ढक पाएगा और इसकी परिधि नजर आती रहेगी।

नैनीताल के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेस के वैज्ञानिक शशिभूषण पांडे के मुताबिक एन्युलर सूर्यग्रहण की विशेषता होती है कि इसमें चंद्रमा सूर्य की परिधि के अलावा शेष भाग को ढक लेता है। इसे केवल इसकी परिधि रिंग ऑफ फायर जैसी दिखाई देती है। हालांकि यह नजारा दक्षिण भारत के कुछ शहरों में ही बनेगा।

शेष स्थानों से आंशिक सूर्यग्रहण दिखेगा। भारत में इससे पहले एन्यूलर सूर्य ग्रहण 15 जनवरी 2010 को देखा गया था और अगला 21 जून 2020 को दिखाई देगा। खास बात है कि अगले 100 वर्षों में भारत से केवल छह सूर्यग्रहण ही देखे जा सकेंगे। यह वर्ष 2020, 2031, 2034, 2064, 2085 तथा 2114 में दिखाई देंगे। 

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