Survey: घर बनाने का सपना पूरा होना मुश्किल, आधे से ज्यादा लोग आर्थिक सुरक्षा को लेकर परेशान
Survey: बजाज आलियांज लाइफ इंडियाज लाइफ गोल्स सर्वे 2023 के अनुसार भारतीयों के जीवन लक्ष्यों में अब पहले के पांच के मुकाबले अब 11 लक्ष्य शामिल हो गए हैं। जिनमें वृद्ध माता-पिता की देखभाल, बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ विदेश यात्रा और करियर भी शामिल है...
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कोरोना काल गुजर गया है, लेकिन इसका बड़ा असर अब भी लोगों की भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर रहा है। किसी अनिश्चितता की स्थिति से निपटने के लिए लोग अब परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा मजबूत बनाने को अपना पहला लक्ष्य मानने लगे हैं, तो 61 फीसदी लोग मानते हैं कि आर्थिक समस्याओं के कारण उनका घर बनाने का सपना पूरा नहीं हो पायेगा। लोग रिटायरमेंट के बाद आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा के लिए कहीं ज्यादा चिंतित हुए हैं। 67 फीसदी लोग वृद्धावस्था में स्वयं को आर्थिक रूप से असुरक्षित महसूस करते हैं। एक सर्वे में ये आकंड़े सामने आए हैं।
संतुलित जीवन सबसे बड़ी प्राथमिकता
सर्वे के मुताबिक, कोरोना ने लोगों को अपने परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए सोचने के लिए ज्यादा मजबूर किया है। अब परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए लोग निवेश करने को पहले की तुलना में ज्यादा प्राथमिकता देने लगे हैं। परिवार के लिए किसी भी अन्य सुविधा के मुकाबले 71 फीसदी लोग आर्थिक सुरक्षा देना ज्यादा महत्वपूर्ण समझते हैं। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि अब लोग संतुलित जीवन को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता मानते हैं। सर्वे में शामिल 84 फीसदी लोगों ने माना है कि बहुत उपलब्धियों की बजाय संतुलित जीवन उनकी पहली प्राथमिकता है।
हालांकि, लोगों की सोच पर आधुनिक जीवन शैली और सोशल मीडिया का खूब असर पड़ रहा है। 65 फीसदी लोग अब अपने स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा चिंतित हुए हैं और इसके लिए तुरंत या कुछ समय में कोई कार्य योजना को अमल में लाने की योजना रखते हैं। लोग इसके लिए सबसे ज्यादा अभी भी परिवार या मित्रों की सलाह पर निर्भर करते हैं।
उच्च शिक्षा के मामले में फिसड्डी
बजाज आलियांज लाइफ इंडियाज लाइफ गोल्स सर्वे 2023 के अनुसार भारतीयों के जीवन लक्ष्यों में अब पहले के पांच के मुकाबले अब 11 लक्ष्य शामिल हो गए हैं। जिनमें वृद्ध माता-पिता की देखभाल, बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ विदेश यात्रा और करियर भी शामिल हो गए हैं। महत्वपूर्ण यह है कि कोरोना काल से पूर्व के मुकाबले अब दोगुने लोग कहीं न कहीं की यात्रा करना चाहते हैं। आर्थिक सुरक्षा के लिए लोग अब भी किसी दूसरे माध्यम की बजाय लाइफ इंश्योरेंस में निवेश को ज्यादा बेहतर और सुरक्षित माध्यम मानते हैं।
उच्च शिक्षा हासिल करने के मामले में भारत के लोगों की तुलना में अभी भी बहुत पिछड़े हुए हैं। सर्वे में शामिल केवल 25 फीसदी लोग किसी न किसी क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करना चाहते हैं। इसे भी कोरोना काल का असर ही माना जा रहा है कि अब 1.6 गुना ज्यादा लोग सार्वजनिक कार्यों के लिए धनदान करने को प्राथमिकता देने लगे हैं, हालांकि इसे वे सामाजिक प्रभाव बढाने का एक माध्यम भी समझते हैं।