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भारतीय रेलवे: कोरोना महामारी के दौर में बढ़े बेटिकट यात्री, पिछले नौ महीने में 1.78 करोड़ यात्रियों पर लगा जुर्माना
Sun, 20 Feb 2022 05:56 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 20 Feb 2022 05:56 PM IST
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कोरोनाकाल के बाद कैसे बढ़े बेटिकट यात्री।
- फोटो :
अमर उजाला/हिमांशु भट्ट
विस्तार
भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2021-22 के पहले नौ महीनों में 1.78 करोड़ ऐसे यात्रियों को पकड़ा है, जो या तो बिना टिकट यात्रा कर रहे थे या बिना बुकिंग के लगेज ले जा रहे थे। एक आरटीआई के जरिए सामने आया है कि बेटिकट यात्रियों की संख्या में यह इजाफा वित्त वर्ष 2019-20 (जब देश में कोरोना का प्रवेश नहीं हुआ था) के शुरुआती नौ महीनों से भी करीब 79 फीसदी ज्यादा है। यानी कोरोनाकाल में बेटिकट यात्रियों की संख्या करीब-करीब दोगुनी हो गई है।मध्य प्रदेश के कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ की ओर से दायर आरटीआई के जवाब में रेलवे बोर्ड ने यह जानकारी दी है। इसके मुताबिक, कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे वित्त वर्ष 2020-21 में प्रतिबंधों के बीच भी बेटिकट यात्रियों की संख्या करीब 27 लाख पाई गई थी। वहीं अप्रैल से दिसंबर 2021 के बीच करीब 1.78 करोड़ यात्री बिना टिकट या बिना बुकिंग वाले सामान के साथ सफर कर रहे थे। जुर्माने के तौर पर इन लोगों से करीब 1,017.48 करोड़ रुपये की राशि जुटाई गई थी।
क्या है बेटिकट यात्रियों की बढ़ी संख्या?
सूत्रों के मुताबिक, बेटिकट यात्रियों की संख्या बढ़ने की एक बड़ी वजह यह रही है कि प्रतिबंधों के दौरान अधिकतर एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों में सीट की बुकिंग सिर्फ ऑनलाइन या सीमित माध्यमों से हो रही थी।
पिछले दो वित्त वर्षों में कितने यात्री बेटिकट पकड़े गए?
इसी तरह कोरोनाकाल से पहले वित्त वर्ष 2019-20 में करीब 1.10 करोड़ लोग बिना टिकट के ट्रेनों में यात्रा करते पकड़े गए थे। तब रेलवे ने कुल 561.73 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला था। उधर वित्त वर्ष अप्रैल-दिसंबर 2020 के दौरान कुल 27.57 लाख लोगों को बेटिकट यात्रा करते पकड़ा गया और उन पर 143.82 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था।
यात्रियों की शिकायत- व्यस्त मार्गों पर जरूरत के मुताबिक ट्रेन नहीं
यात्रियों ने यह भी शिकायत की है कि जहां तक ट्रेन सेवाओं का संबंध है, मांग-आपूर्ति में अंतर है। वास्तव में रेलवे द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार सीट आरक्षण चार्ट को अंतिम रूप देने के बाद प्रतीक्षा सूची में शामिल 52 लाख से अधिक लोग चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में ट्रेनों से यात्रा नहीं कर सके, जो व्यस्त मार्गों पर अधिक ट्रेनों की आवश्यकता का संकेत देता है।
अधिकारी बोले- जल्द बेहतर होगी व्यवस्था
वित्तीय वर्ष 2021-2022 के सितंबर तक बुकिंग कराने वाले 52,96,741 यात्रियों की तुलना में 32,50,039 पीएनआर (यात्री नाम रिकॉर्ड) को स्वत: रद्द कर दिया गया क्योंकि उनके नाम चार्ट तैयार होने के बाद प्रतीक्षा सूची की स्थिति में थे। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘समस्या यह है कि पिछले दो वर्षों में यात्रा पर गंभीर प्रतिबंधों के बाद लोग अब अधिक से अधिक यात्रा कर रहे हैं। कुछ आपात स्थिति के कारण और कई छुट्टियों की वजह से। यात्रियों की संख्या में तो वृद्धि हुई है लेकिन ट्रेनों की संख्या, फेरों की संख्या समान बनी हुई हैं। हमने क्लोन ट्रेनें शुरू की हैं और चीजें बेहतर होंगी।’’
रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, 2019-2020 से 2021-22 तक ट्रेन सेवाओं का लाभ उठाने वाले यात्रियों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। अक्तूबर 2019 में जब नियमित ट्रेन सेवाएं चल रही थीं, ट्रेनों से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या 4.40 करोड़ थी। सितंबर 2021 में, कोविड-19 की स्थिति में सुधार के साथ यह संख्या बढ़कर लगभग सात करोड़ हो गई।