{"_id":"6220de50afb9c30e8c0c3b60","slug":"supreme-court-will-not-consider-the-petition-against-distribution-of-gifts-of-parties-in-elections","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट: चुनाव में पार्टियों के उपहार बांटने के खिलाफ याचिका पर विचार नहीं करेगी शीर्ष अदालत, जानें पूरा मामला","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट: चुनाव में पार्टियों के उपहार बांटने के खिलाफ याचिका पर विचार नहीं करेगी शीर्ष अदालत, जानें पूरा मामला
Thu, 03 Mar 2022 08:57 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 03 Mar 2022 08:57 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 25 जनवरी को भाजपा नेता व वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की एक जनहित याचिका पर केंद्र व चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : amar ujala
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के दौरान मुफ्त उपहार बांटने वाली पार्टियों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा, यह एक प्रेरित याचिका है। इसमें कुछ राजनीतिक दलों को निशाना बनाया गया है।
विज्ञापन
सीजेआई एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता सुरजीत सिंह यादव के वकील वरुण कुमार सिन्हा से कहा कि हमें लगता है कि इस याचिका में एक छिपा हुआ एजेंडा है। आप विशेष दलों को क्यों निशाना बना रहे हैं। इस याचिका को जुर्माने के साथ खारिज किया जाना चाहिए क्योंकि इसमें सामान्य निर्देश मांगने के बजाय याचिकाकर्ता ने कुछ राजनीतिक दलों को निशाना बनाया है।
विज्ञापन
पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आपने किसी खास पार्टी का जिक्र क्यों किया, जैसे कि कोई और नहीं कर रहा है। पीठ ने याचिकाकर्ता के बारे में भी जानकारी मांगी। पीठ को बताया गया कि याचिकाकर्ता एनजीओ हिंदू सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे प्रचार हित याचिका बताते हुए इस पर विचार करने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता की दलील थी कि किसी राजनीतिक दल, उसके नेता, चुनाव में खड़े उम्मीदवारों का मुफ्त उपहार देने का प्रस्ताव या वादा गलत है। इसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा-123 (1)(बी) के प्रावधानों के तहत भ्रष्ट आचरण और रिश्वतखोरी में लिप्त घोषित किया जा सकता है। याचिका में पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सदस्यों व पंजाब में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर केंद्र चुनाव आयोग को जारी हुआ था नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 25 जनवरी को भाजपा नेता व वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की एक जनहित याचिका पर केंद्र व चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था। याचिका में कहा गया था कि चुनाव से पहले सार्वजनिक निधि से तर्कहीन मुफ्त उपहार का वादा या वितरण मतदाताओं को प्रभावित करता है और यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की जडे़ं हिला देता है।