फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   CJI Chandrachud supreme court verdict same gender marriage legal validation

Supreme Court: समलैंगिक शादी को कानूनी मान्यता मिलने का सवाल, CJI चंद्रचूड़ की संविधान पीठ सुनाएगी बड़ा फैसला

Mon, 16 Oct 2023 07:55 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 16 Oct 2023 07:55 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से जुड़ी याचिका पर बड़ा फैसला सुनाएगा। शीर्ष अदालत में इस मुद्दे पर विस्तार से सुनवाई हो चुकी है। फैसला चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ को सुनाना है।

विज्ञापन
CJI Chandrachud supreme court verdict same gender marriage legal validation
supreme court - फोटो : ANI

विस्तार

बड़े संवैधानिक मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ के फैसले निर्णायक होते हैं। शीर्ष अदालत में प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ को ऐसे ही संवेदनशील मुद्दे- समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता के सवाल पर फैसला सुनाना है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ, 17 अक्तूबर को इस मामले पर बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाएगी।
विज्ञापन


10 दिनों की मैराथन सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित
समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर चुकी पीठ ने 11 मई को फैसला सुरक्षित रखा था। सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली इस पीठ में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, जस्टिस एस रवींद्र भट, जस्टिस हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा भी हैं। संविधान पीठ में 10 दिनों की मैराथन सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था।
विज्ञापन


18 अप्रैल को शुरू हुई सुनवाई
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सूत्रों ने कहा कि फैसला मंगलवार को सुनाया जाएगा। इसके बाद फैसले से जुड़ी अहम जानकारी शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपडेट की जाएगी। बता दें कि शीर्ष अदालत ने 18 अप्रैल को मामले में दलीलें सुनना शुरू किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


सरकार की दलील- समलैंगिक विवाह पर संवैधानिक घोषणा से बचे सुप्रीम कोर्ट
दलीलों के दौरान, केंद्र ने शीर्ष अदालत से कहा था कि समलैंगिक विवाह के लिए कानूनी मान्यता की मांग करने वाली याचिकाओं पर अदालत को संवैधानिक घोषणा करने से बचना चाहिए। सरकार ने कहा था कि कोई भी संवैधानिक घोषणा "कार्रवाई का सही तरीका" नहीं हो सकती है, क्योंकि अदालत पूर्वाभास, परिकल्पना नहीं कर सकती। सरकार के अनुसार, समलैंगिक विवाह के परिणामों को समझने और उनसे निपटने में भी अदालत सक्षम नहीं होगी।


याचिका का पुरजोर विरोध
केंद्र ने अदालत को यह भी बताया था कि उसे समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर सात राज्यों से प्रतिक्रियाएं मिली हैं। सरकार के मुताबिक राजस्थान, आंध्र प्रदेश और असम की सरकारों ने ऐसे विवाह के लिए कानूनी मान्यता की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं के तर्क का पुरजोर विरोध किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed