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डबल मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दोषी की सजा बरकरार, फिर भी मिली रिहाई; जानें पूरा मामला

Fri, 29 May 2026 09:12 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 29 May 2026 09:12 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के डबल मर्डर केस में आरोपी गोपी चंद की हत्या और आपराधिक साजिश के मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखी है। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि आरोपी 18 साल से ज्यादा समय जेल में काट चुका है और सह आरोपियों को राहत मिल चुकी है।

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Supreme Court Verdict Double Murder Case Convicts Sentence Upheld Granted Release Know Full Story
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के चर्चित डबल मर्डर केस में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी गोपी चंद की हत्या और आपराधिक साजिश के मामले में दोषसिद्धि को बरकरार रखा है। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि आरोपी पहले ही 18 साल से ज्यादा समय जेल में बिता चुका है और उसके साथ के अन्य दोषियों को सजा में राहत मिल चुकी है। इसी आधार पर शीर्ष अदालत ने उसकी सजा को पहले से काटी गई अवधि तक सीमित करते हुए तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि यदि आरोपी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत जेल से छोड़ा जाए।

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आखिर 1984 में क्या हुआ था?
यह मामला जुलाई 1984 का है। आरोप है कि गोपी चंद, उसके भाई और अन्य लोगों ने मिलकर एक ट्रक लूटने की साजिश रची थी। इसके लिए उन्होंने सीताफल ढोने के बहाने ट्रक किराए पर लिया। यात्रा के दौरान चालक और क्लीनर की हत्या कर दी गई। बाद में दोनों के शव दिल्ली के अलीपुर और सिविल लाइंस इलाके में फेंक दिए गए और ट्रक लूट लिया गया। मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से एक आरोपी सरकारी गवाह बन गया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने किन दलीलों को खारिज किया?
सुनवाई के दौरान गोपी चंद के वकील ने अदालत में कहा कि सरकारी गवाह का बयान भरोसेमंद नहीं है और उसने खुद को बचाने के लिए दूसरों पर आरोप लगाया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि सरकारी गवाह ने खुद भी अपराध में शामिल होने की बात मानी थी। उसने बताया था कि ट्रक लूटने के लिए एक मृतक के पैर पकड़कर उसे बेहोश करने में उसने मदद की थी। अदालत ने कहा कि केवल इसलिए उसकी गवाही को झूठा नहीं माना जा सकता कि उसने अंतिम वार नहीं किया।
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अदालत ने हत्या को लेकर क्या टिप्पणी की?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रक लूटने की पूरी योजना पहले से बनाई गई थी और इसमें हिंसा होना तय था। अदालत ने साफ कहा कि जब किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से अलग किया जाता है तो बल प्रयोग होना स्वाभाविक है। कोर्ट ने माना कि चालक और क्लीनर की हत्या अचानक नहीं हुई, बल्कि यह पूरी साजिश का हिस्सा थी। अदालत ने यह भी कहा कि गोपी चंद अपने भाई और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर इस अपराध में शामिल था और उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।

फॉरेंसिक सबूतों ने कैसे मजबूत किया केस?
अदालत ने कहा कि सरकारी गवाह की गवाही को फॉरेंसिक जांच और अन्य सबूतों से भी समर्थन मिला। जांच के दौरान चालक का सिर कटा शव सिविल लाइंस इलाके से बरामद हुआ था। इसके अलावा घटनास्थल और अन्य परिस्थितियों ने भी आरोपियों के खिलाफ मजबूत आधार तैयार किया। अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट ने सही तरीके से सबूतों का मूल्यांकन किया था।


आखिर आरोपी को राहत क्यों मिली?
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन सजा में राहत दी। अदालत ने कहा कि घटना 1984 की है और आरोपी 18 साल से ज्यादा समय जेल में काट चुका है। साथ ही अन्य दोषियों को भी सजा में छूट मिल चुकी है। इसी आधार पर अदालत ने गोपी चंद की सजा को पहले से काटी गई अवधि तक सीमित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि न्याय और मानवीय आधार को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।

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