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SC: 'अमेरिकी विज्ञानी ने परमाणु ऊर्जा कानून को चुनौती दी'; अदालत ने कहा- लाइसेंस निजी पक्षों को देना खतरनाक

Tue, 17 Sep 2024 05:34 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 17 Sep 2024 05:34 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने परमाणु लाइसेंस पर रोक वाले कानून के खिलाफ याचिका खारिज कर दी है। अमेरिकी भौतिक विज्ञानी ने अपनी याचिका में कानून के उस प्रावधान को चुनौती दी थी जिसके तहत परमाणु सामग्री का सौदा करने के लिए निजी पक्षों को लाइसेंस नहीं देने का नियम है।

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Supreme Court US physicist nuclear licence to private party CJI bench junks plea
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

एक अमेरिकी भौतिक विज्ञानी की याचिका उच्चतम न्यायालय में खारिज हो गई। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में इस शख्स ने भारतीय परमाणु ऊर्जा कानून के प्रावधानों को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता की अपील खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि परमाणु सामग्री से जुड़े लाइसेंस निजी पक्षों को दिए जाने पर दुरुपयोग का खतरा है। शीर्ष अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि परमाणु का इस्तेमाल बम बनाने जैसी गतिविधियों में भी होता है। गौरतलब है कि याचिकाकर्ता ने परमाणु ऊर्जा कानून के उस प्रावधान को चुनौती दी थी जिसके तहत परमाणु सामग्री का सौदा करने की गतिविधि में निजी पक्षों पर रोक लगाने का नियम है।
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परमाणु के दुरुपयोग की आशंका के कारण लाइसेंस पर प्रतिबंध
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने इस मामले में कहा कि कानून निजी संस्थाओं को परमाणु ऊर्जा लाइसेंस देने पर रोक लगाता है। अदालत ने साफ किया कि लाइसेंस नीतिगत निर्णय हैं जिनमें अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। चीफ जस्टिस ने अपनी टिप्पणी में कहा, 'परमाणु सामग्री का इस्तेमाल बन बनाने के लिए किया जा सकता है। इसके दुरुपयोग की आशंका है, इसलिए परमाणु ऊर्जा कानून, 1962 के तहत इस पर प्रतिबंध है।'
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अदालत कार्यपालिका के तर्क में गलतियां नहीं तलाश सकती
बता दें कि अमेरिका में रहने वाले भौतिक विज्ञानी संदीप टीएस ने इस कानून की धारा 14 की वैधता को चुनौती दी थी। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि एक निजी फर्म को भी परमाणु ऊर्जा परियोजना का हिस्सा बनने की अनुमति दी गई है। इस दलील पर तीन जजों की पीठ ने कहा, अदालत कार्यपालिका के तर्क में गलतियां नहीं तलाश सकती। कोर्ट यह भी नहीं बता सकता कि संसद से पारित कानून में यह प्रावधान क्यों पेश किया गया। पीठ ने स्पष्ट किया कि  ‘दुरुपयोग’ और परमाणु हादसों की आशंका को मद्देनजर रखते हुए अदालत इस याचिका पर विचार करने की इच्छुक नहीं है। कानूनी प्रावधान को 'स्पष्ट रूप से मनमाना' नहीं कहा जा सकता।
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सरकार को प्रतिबंध लगाने का पूरा अधिकार
बता दें कि याचिका में परमाणु ऊर्जा अधिनियम की धारा 14 (1) को चुनौती दी गई थी। इस प्रावधान में परमाणु ऊर्जा उत्पादन और उपयोग पर नियंत्रण के नियमों का उल्लेख है। इसके लिए केंद्र सरकार नियमों के अधीन लाइसेंस निर्गत करती है। इसके अलावा सरकार को परमाणु ऊर्जा के उत्पादन, विकास और उपयोग या उससे संबंधित मामलों में अनुसंधान के लिए डिज़ाइन किए गए या अपनाए गए या निर्मित किसी भी संयंत्र पर प्रतिबंध लगाने का पूरा अधिकार है। 
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