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सुप्रीम कोर्ट: पीपीई किट के निर्यात पर रिजर्व बैंक की रोक बरकरार, फैसले में कही बड़ी बात
Mon, 06 Dec 2021 10:45 PM IST
सुरेंद्र जोशी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 06 Dec 2021 10:45 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह प्रतिबंध लोकतंत्र के हित में है। कुछ लोगों की कारोबार करने की 'निरंकुश आजादी' को बनाए रखने के लिए आम जनता के कल्याण को न्यायिक रूप से खत्म नहीं किया जा सकता।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social Media
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कोरोना महामारी के दौरान पीपीई किट निर्यातक को साख पत्र जारी करने से इनकार करने के रिजर्व बैंक के निर्णय को कायम रखा है। रिजर्व बैंक के मर्चेंटिंग ट्रेड ट्रांजेक्शन (MTT) के तहत जारी कुछ दिशा-निर्देशों की वैधता को शीर्ष कोर्ट ने बरकरार रखा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह प्रतिबंध लोकतंत्र के हित में है। कुछ लोगों की कारोबार करने की 'निरंकुश आजादी' को बनाए रखने के लिए आम जनता के कल्याण को न्यायिक रूप से खत्म नहीं किया जा सकता।
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चंद्रचूड़, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने फार्मास्युटिकल्स का कारोबार करने वाली एक फर्म के निदेशक की रिजर्व बैंक के निर्णय के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया। कंपनी ने अपनी अपील में कहा था कि उनकी कंपनी को अमेरिका में निर्यात करने के लिए चीन से पीपीई किट आयात करके बिचौलिये के रूप में व्यापार करने से प्रतिबंधित किया गया। रिजर्व बैंक का यह व्यापार प्रतिबंध, संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (जी) के तहत प्रदत्त व्यापार की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
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याचिका खारिज करते हुए आदेश में कहा कि इस कोर्ट को यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए है कि संविधान में दी गई अधिकार और स्वतंत्रता की गारंटी निजी कारोबार को बढ़ावा देने का हथियार न बन जाए और वह जनहित में बनाए गए नियमों को अक्षम न कर दे। पीठ की ओर से जस्टिस चंद्रचूड ने 55 पेज के फैसले में लिखा कि यह अदालत का दृष्टिकोण नहीं था कि न्यायिक समीक्षा की शक्ति तब तक ठंडे बस्ते में रखी जाती है जब तक कि सार्वजनिक स्वास्थ्य पर संकट खत्म नहीं हो जाता। यह अदालत सरकार की ज्यादतियों से बचाव के लिए संवैधानिक वॉचडॉग की भूमिका निभाती रहेगी।
शीर्ष कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब नियामक निकायों के कदमों पर सवाल उठाया जाता है तो यह अदालत न्यायिक समीक्षा से परहेज नहीं करती है। वह ऐसे मामलों में यह देखती है कि संबंधित कदमों का जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा। ऐसे मामलों में यह महत्वपूर्ण नहीं है कि इन कदमों से मूलभूत अधिकारों की रक्षा हो रही है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आठ अक्टूबर, 2020 के फैसले को मान्य करते हुए रिजर्व बैंक के एमटीटी दिशानिर्देशों को वैध माना। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि निर्यात की अनुमति नहीं देने का निर्णय पीपीई उत्पादों के पर्याप्त घरेलू स्टॉक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक उपाय था। इससे अपीलकर्ता के मौलिक अधिकारों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ा।