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SC: सुप्रीम कोर्ट ने कमला नेहरू ट्रस्ट को दी गई जमीन रद्द करने का फैसला रखा बरकरार, कहा- जनहित में हो आवंटन

Fri, 30 May 2025 08:55 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Fri, 30 May 2025 08:55 PM IST
सार

सर्वोच्च अदातल ने शुक्रवार को कहा कि औद्योगिक भूमि आवंटन का प्रबंधन पूरी तत्परता, निष्पक्षता और जनहित के अनुरूप किया जाना चाहिए। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में कमला नेहरू मेमोरियल ट्रस्ट (केएनएमटी) को दी गई 125 एकड़ भूमि को रद्द करने के यूपीएसआईडीसी के फैसले को बरकरार रखा है।

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supreme court upholds cancellation of land given to Kamla Nehru trust
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि औद्योगिक भूमि आवंटन का प्रबंधन पूरी निष्पक्षता, तत्परता और जनहित के अनुरूप किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यूपी में कमला नेहरू मेमोरियल ट्रस्ट (केएनएमटी) को दी गई 125 एकड़ भूमि को रद्द करने के उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) के फैसले को बरकरार रखा।

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जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने 1975 में शुरू की गई धर्मार्थ संस्था केएनएमटी की अपील को खारिज कर दिया। संस्था ने 2017 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने सुल्तानपुर जिले के जगदीशपुर के उतेलवा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित भूमि का आवंटन रद्द कर दिया था। 
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सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएसआईडीसी की ओर से वर्ष 2003 में पुष्पकृषि के उद्देश्य से ट्रस्ट को जल्दबाजी में भूमि का बड़ा टुकड़ा आवंटित करने तथा मुकदमा शुरू होने के बाद जगदीशपुर पेपर मिल्स लिमिटेड को वैकल्पिक आवंटन पर विचार करने में निगम द्वारा दिखाई गई उल्लेखनीय तत्परता की भी आलोचना की।
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पीठ ने कहा कि पक्षों की ओर से उठाए गए विवादों की हमारी विस्तृत जांच, तथ्यात्मक और कानूनी मैट्रिक्स के व्यापक विश्लेषण तथा परिणामी निष्कर्षों के मद्देनजर हम यूपीएसआईडीसी के आवंटन को रद्द करने का समर्थन करते हैं। साथ ही कहा कि यूपीएसआईडीसी की ओर से जगदीशपुर पेपर मिल्स लिमिटेड के पक्ष में संबंधित भूमि के लिए किया गया वास्तविक आवंटन या कोई प्रस्ताव भी अवैध तथा सार्वजनिक नीति के विपरीत घोषित किया जाता है और फलस्वरूप इसे रद्द किया जाता है। पीठ ने कहा कि यदि उक्त संभावित आवंटी से कोई बयाना राशि या भुगतान मिला है तो उसे राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा दी गई ब्याज दर के साथ वापस करने का निर्देश दिया जाता है।

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