SC Updates: गंगा किनारे अतिक्रमण पर सुप्रीम चिंता, केंद्र-बिहार से पूछा- अवैध निर्माण हटाने को क्या कदम उठाए
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सुप्रीम कोर्ट ने गंगा किनारे अतिक्रमण को लेकर चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र और बिहार सरकार से इस पर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह पूछते हुए कि गंगा किनारे अवैध निर्माण हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने अधिकारियों द्वारा प्रस्तावित तरीके और समय अवधि के अलावा मौजूदा अतिक्रमणों की संख्या भी जानना चाहा। पीठ ने कहा, 'हम जानना चाहेंगे कि गंगा नदी के किनारे ऐसे सभी अतिक्रमणों को हटाने के लिए अधिकारियों ने क्या कदम उठाए हैं।' अदालत ने पटना निवासी अशोक कुमार सिन्हा द्वारा एजजीटी के 30 जून, 2020 के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने वक्फ कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दी याचिका
जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने वक्फ अधिनियम में हाल ही में किए गए संशोधनों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। एनसी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के निर्देश पर और भारत के अल्पसंख्यकों के हित में, जेकेएनसी ने वक्फ संशोधन अधिनियम को चुनौती दी है। हमारे विधायक अर्जुन सिंह राजू, एडवोकेट रेयाज खान और हिलाल लोन ने न्याय की मांग करते हुए एक रिट याचिका दायर की है। पार्टी ने इसे मुस्लिम समुदाय के धार्मिक मामलों में सांविधानिक रूप से खतरनाक हस्तक्षेप करार दिया है।
येदियुरप्पा के भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा की उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के एक मामलों पर दोबारा सुनवाई शुरू करने के कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 5 जनवरी, 2021 को बंगलूरू निवासी शिकायतकर्ता ए आलम पाशा की याचिका स्वीकार करते हुए येदियुरप्पा और पूर्व उद्योग मंत्री मुरुगेश आर निरानी व कर्नाटक उद्योग मित्र के पूर्व प्रबंध निदेशक शिवास्वामी केएस के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश का मामला पुनः शुरू किया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि अभियुक्तों के पदमुक्त होने के बाद दोबारा शिकायत दर्ज करने पर पूर्व अनुमति की अनिवार्यता लागू नहीं होती। हालांकि, अदालत ने पूर्व आईएएस अधिकारी वीपी बालिगर को मामले में दोषमुक्त कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में येदियुरप्पा की ओर से दलील दी गई कि भ्रष्टाचार निवारण (पीसी) अधिनियम की धारा 17ए के तहत लोक सेवक के खिलाफ जांच के लिए पूर्व सरकारी अनुमति जरूरी है। वहीं, शिकायतकर्ता ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 156(3) का हवाला देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट को बिना अनुमति के जांच का आदेश देने का अधिकार है।