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Supreme Court: उमर खालिद को अभी जमानत नहीं, दो जजों की पीठ 31 जनवरी को करेगी सुनवाई; UAPA के तहत लगे हैं आरोप

Wed, 24 Jan 2024 02:52 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 24 Jan 2024 02:52 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत में दो जजों की पीठ ने कहा कि 31 जनवरी को इस मामले पर सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत में बुधवार को कई और अहम मामलों की सुनवाई हुई। पढ़िए प्रमुख मामलों से जुड़ी अपडेट

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत में जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि खालिद की जमानत याचिका पर 31 जनवरी को सुनवाई होगी। कोर्ट ने प्राथमिकता के आधार पर इस मामले की सुनवाई का आदेश पारित किया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस प्रशांत कुमार ने पिछले साल नौ अगस्त को खालिद की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
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खालिद पर पूर्वोत्तर दिल्ली हिंसा मामले में गंभीर आरोप
गौरतलब है कि उमर खालिद के साथ अन्य लोगों पर फरवरी, 2020 में पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए दंगों का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाया गया है। बता दें कि हिंसा में 53 लोग मारे गए थे, जबकि 700 से अधिक घायल हुए थे। दंगों की साजिश में कथित संलिप्तता के आरोप में खालिद लंबे समय से जेल में बंद हैं। उनकी जमानत की अपील करते हुए पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने कहा, वह बहस के लिए तैयार हैं, लेकिन दुर्भाग्य से पीठ भोजनावकाश के बाद मामले की सुनवाई नहीं करेगी।
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सुप्रीम कोर्ट की पीठ उन मामलों की एक साथ सुनवाई कर रही है, जिनमें UAPA कानून के प्रावधानों को चुनौती दी गई है। खालिद ने अपनी याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। 18 अक्तूबर, 2022 को हाईकोर्ट में जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में यह मुकदमा पहले जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ में सूचीबद्ध हुआ था। बाद में जस्टिस मिश्रा के अलग होने के बाद अलग पीठ का गठन हुआ।
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दरअसल, लगभग तीन साल पहले- फरवरी, 2020 में राष्ट्रीय राजधानी में नागरिकता (संशोधन) कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ जमकर विरोध-प्रदर्शन हुए थे। हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने खालिद के अलावा शरजील इमाम और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया। खालिद और इमाम पर दंगों के मास्टरमाइंड होने के आरोप हैं। सितंबर, 2020 में गिरफ्तारी के बाद से खालिद जेल में बंद हैं।


दिल्ली पुलिस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खालिद ने साजिश में शामिल होने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कई स्तरों पर अदालत से जमानत मांगी, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। हाईकोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि खालिद का भाषण भड़काऊ था। उन्होंने बाबरी मस्जिद, कश्मीर और तीन तलाक जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए मुसलमानों के कथित दमन का जिक्र कर सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने की साजिश की।
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