SC Updates: चेक बाउंस मामले में SC का बड़ा फैसला; शनि शिंगणापुर मंदिर के लिए सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को कई मामले सुनवाई के लिए रखे गए हैं। इनमें से ऑनलाइन बेटिंग एप्स और अवैध फोन टैपिंग मामले के मुख्य आरोपी तेलंगाना खुफिया विभाग के पूर्व प्रमुख प्रभाकर राव की याचिका पर सुनवाई होनी है।
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मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'हम सोमवार को बैठेंगे। हम अन्य सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों पर बोझ नहीं डालेंगे, जिन्हें नए मामलों की सुनवाई के लिए देर रात तक केस फाइलों का अध्ययन करना पड़ता है। मैं किसी अन्य बेंच को परेशान नहीं करूंगा।' उन्होंने आगे कहा कि रजिस्ट्री मामले की तात्कालिकता का पता लगाएगी और मामले को सूचीबद्ध करेगी। मुख्य न्यायाधीश कांत ने आगे कहा, 'यह निश्चित नहीं है कि एक या दो बेंच बैठेंगी, यह सब मामलों की संख्या पर निर्भर करेगा। हम बेंच के गठन के लिए उचित आदेश पारित करेंगे।' मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने उन कनिष्ठ वकीलों से भी 22 दिसंबर को अपने मामले पर बहस करने को कहा। मुख्य न्यायाधीश ने एक कनिष्ठ वकील से कहा, 'हम इस मामले की सुनवाई सोमवार को तभी करेंगे जब आप अपना पक्ष रखेंगे।' सुप्रीम कोर्ट क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों के लिए 22 दिसंबर से 2 जनवरी, 2026 तक बंद रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट से पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भुल्लर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनके खिलाफ दर्ज दो एफआईआर में सीबीआई जांच पर रोक लगाने की मांग की थी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत के नेतृत्व वाली न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट भुल्लर की इसी तरह की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। अधिकारी ने हाईकोर्ट के 4 दिसंबर के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें सीबीआई की कार्यवाही पर रोक लगाने की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया गया था। उनकी याचिका की सुनवाई जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी गई थी।
पीएम मोदी के खिलाफ टिप्पणी करने वाले शख्स को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बेंगलुरु निवासी एक शख्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया। पोस्ट में कहा गया था कि प्रधानमंत्री को उन लोगों के लिए कोई पछतावा या पश्चाताप नहीं है, जिनका उन्होंने अपमान किया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर आलोचनात्मक पोस्ट करने के आरोप में 24 वर्षीय गुरुदत्त शेट्टी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने आदेश दिया, 'याचिकाकर्ता ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का खुलेआम दुरुपयोग किया है। हम इस स्तर पर कोई राहत नहीं दे सकते।' हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि आरोपी कानून के अनुसार उचित अधिकार क्षेत्र वाले हाईकोर्ट में जाने के लिए स्वतंत्र हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए पटना हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने मुकदमे की शुरुआती अवस्था में ही 'रोविंग इन्क्वायरी' कर गलती की। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट को यह जांच नहीं करनी चाहिए थी कि चेक किसी कर्ज या देनदारी के भुगतान के लिए दिया गया था या नहीं। यह मुद्दा ट्रायल के दौरान तय किया जाना चाहिए।
मामला निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 से जुड़ा है, जो चेक बाउंस को अपराध मानती है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि 20 लाख रुपये का चेक, जो माल की आपूर्ति के बदले दिया गया था, बाउंस हो गया। मजिस्ट्रेट ने शिकायत पर संज्ञान लेकर आरोपी को समन जारी किया था, जिसे हाई कोर्ट ने बाद में रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि शिकायत में प्रथम दृष्टया अपराध के सभी जरूरी तत्व मौजूद हों, तो शुरुआती चरण में केस को खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने शिकायत बहाल करते हुए कहा कि उसने चेक की वैधता पर कोई अंतिम राय नहीं दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शनि शिंगनापुर मंदिर से जुड़े प्रशासनिक विवाद में अहम अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें मंदिर ट्रस्ट को दोबारा नियंत्रण सौंपा गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जब ट्रस्ट का कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त हो रहा हो, तब सैकड़ों करोड़ रुपये की श्रद्धालुओं की भेंट किसी ऐसी संस्था को सौंपना उचित नहीं है। इसी कारण अदालत ने नासिक मंडलायुक्त को मंदिर का प्रशासक नियुक्त किया है।
आदेश के अनुसार, मंडलायुक्त उप-विभागीय मजिस्ट्रेटों की मदद से मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज को देखेंगे। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक शिंगणापुर ट्रस्ट अधिनियम, 2018 के तहत नई समिति का गठन नहीं हो जाता। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी कहा कि वह नई समिति के गठन की स्पष्ट समय-सीमा बताए। अदालत ने साफ किया कि उसका उद्देश्य श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की संपत्ति दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।