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Supreme Court: 'कोई रियायत नहीं दी जाएगी', सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की नाबालिग से दुष्कर्म के दोषियों की अपील
Wed, 11 Jun 2025 03:28 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Wed, 11 Jun 2025 03:28 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के दोषियों की आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देने वाली अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दोषियों संजय पैकरा और पुष्पम यादव की अपील खारिज कर दी। पीठ ने दो दोषियों की अपील खारिज करते हुए कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है। आपने वैन चालक के साथ मिलकर एक नाबालिग स्कूली छात्रा का अपहरण किया और उसके साथ दुष्कर्म किया। हमें इसमें किसी तरह की रियायत की जरूरत नहीं है। इसे खारिज किया जाता है।
ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने वकील संजय राठौर की याचिका खारिज की; कोर्ट रूम में महिला जज से किया था दुर्व्यवहार
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पीठ इस दलील से सहमत नहीं हुई कि लड़की की सहमति थी और जब उसे एकांत कारावास में रखा गया था।उस दौरान उसने कोई शोर नहीं मचाया। पीठ ने कहा कि वह नाबालिग है। यह साबित हो चुका है और अब किसी और बात की जरूरत नहीं है।
हाईकोर्ट ने 5 अगस्त, 2024 को 2019 के अपहरण और दुष्कर्म मामले में पैकरा, यादव और तीसरे आरोपी संतोष कुमार गुप्ता, स्कूल वैन चालक को सातवीं कक्षा की छात्रा के अपहरण और दुष्कर्म के अपराध के लिए दोषी ठहराते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने पांच अक्तूबर 2021 को तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया था। कोर्ट ने आजीवन कारावास के अलावा उन पर एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
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न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दोषियों संजय पैकरा और पुष्पम यादव की अपील खारिज कर दी। पीठ ने दो दोषियों की अपील खारिज करते हुए कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है। आपने वैन चालक के साथ मिलकर एक नाबालिग स्कूली छात्रा का अपहरण किया और उसके साथ दुष्कर्म किया। हमें इसमें किसी तरह की रियायत की जरूरत नहीं है। इसे खारिज किया जाता है।
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पीठ इस दलील से सहमत नहीं हुई कि लड़की की सहमति थी और जब उसे एकांत कारावास में रखा गया था।उस दौरान उसने कोई शोर नहीं मचाया। पीठ ने कहा कि वह नाबालिग है। यह साबित हो चुका है और अब किसी और बात की जरूरत नहीं है।
हाईकोर्ट ने 5 अगस्त, 2024 को 2019 के अपहरण और दुष्कर्म मामले में पैकरा, यादव और तीसरे आरोपी संतोष कुमार गुप्ता, स्कूल वैन चालक को सातवीं कक्षा की छात्रा के अपहरण और दुष्कर्म के अपराध के लिए दोषी ठहराते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने पांच अक्तूबर 2021 को तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया था। कोर्ट ने आजीवन कारावास के अलावा उन पर एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने युवा वकील के रवैये पर जताई नाराजगी
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को युवा वकील के रवैये पर नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी अदालती कला सीखना नहीं चाहती। न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब एक युवा वकील आदेश लिखे जाने के दौरान लापरवाही से वहां से चली गई। वकील ने अदालत को बताया कि स्थगन के लिए एक पत्र प्रसारित किया गया है। जैसे ही पीठ ने आदेश सुनाना शुरू किया वकील वहां से जाने लगीं। इस पर नाराज होकर पीठ ने कहा कि युवा पीढ़ी अदालती कला सीखना नहीं चाहती। मामलों को पढ़ना केवल 30 प्रतिशत है, बाकी 70 प्रतिशत अदालती कला है।
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को युवा वकील के रवैये पर नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी अदालती कला सीखना नहीं चाहती। न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब एक युवा वकील आदेश लिखे जाने के दौरान लापरवाही से वहां से चली गई। वकील ने अदालत को बताया कि स्थगन के लिए एक पत्र प्रसारित किया गया है। जैसे ही पीठ ने आदेश सुनाना शुरू किया वकील वहां से जाने लगीं। इस पर नाराज होकर पीठ ने कहा कि युवा पीढ़ी अदालती कला सीखना नहीं चाहती। मामलों को पढ़ना केवल 30 प्रतिशत है, बाकी 70 प्रतिशत अदालती कला है।
महिला जज की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को भेजा नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महिला न्यायिक अधिकारी की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट की रजिस्ट्री से जवाब मांगा है। याचिका में उन्होंने कहा है कि चाइल्ड केयर लीव न मिलने पर जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, तो उनकी सालाना गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में उनके खिलाफ नकारात्मक टिप्पणियां कर दी गईं।
शीर्ष कोर्ट ने 29 मई को महिला अतिरिक्त जिला जज (एडीजे) की मुख्य याचिका पर हाईकोर्ट रजिस्ट्री और राज्य सरकार को नोटिस भेजा था। इस याचिका में उन्होंने छह महीने की चाइल्ड केयर लीव न दिए जाने को चुनौती दी थी। वह अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से हैं। आज जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच को एक आवेदन के जरिए यह जानकारी दी गई कि जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, तो उसके बाद उनकी एसीआर में नकारात्मक प्रविष्टियां की गईं।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महिला न्यायिक अधिकारी की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट की रजिस्ट्री से जवाब मांगा है। याचिका में उन्होंने कहा है कि चाइल्ड केयर लीव न मिलने पर जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, तो उनकी सालाना गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में उनके खिलाफ नकारात्मक टिप्पणियां कर दी गईं।
शीर्ष कोर्ट ने 29 मई को महिला अतिरिक्त जिला जज (एडीजे) की मुख्य याचिका पर हाईकोर्ट रजिस्ट्री और राज्य सरकार को नोटिस भेजा था। इस याचिका में उन्होंने छह महीने की चाइल्ड केयर लीव न दिए जाने को चुनौती दी थी। वह अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से हैं। आज जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच को एक आवेदन के जरिए यह जानकारी दी गई कि जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, तो उसके बाद उनकी एसीआर में नकारात्मक प्रविष्टियां की गईं।