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SC Updates: केरल में चर्चों के प्रबंधन को लेकर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश, पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें

Wed, 18 Dec 2024 06:20 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 18 Dec 2024 06:20 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने केरल में चर्चों के प्रबंधन और प्रशासन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। पीठ ने राज्य सरकार से यह भी कहा कि यदि स्थिति बिगड़ती है तो वह प्रेरक दृष्टिकोण अपनाए।

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Supreme Court Updates: SC orders to maintain status quo regarding management of churches in Kerala
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केरल में जैकोबाइट सीरियन चर्च और मलंकारा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च गुटों के बीच विवाद में चर्चों के प्रबंधन और प्रशासन पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि दोनों गुटों ने 3 दिसंबर को जैकोबाइट सीरियन चर्च को दिए गए निर्देश का पालन करने में असमर्थता जताई थी। इसमें छह चर्चों का प्रशासन मलंकारा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च गुट को सौंपने का निर्देश दिया गया था। पीठ ने राज्य सरकार से कहा कि यदि स्थिति बिगड़ती है तो वह प्रेरक दृष्टिकोण अपनाए। पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है और मामले की अगली सुनवाई 29 और 30 जनवरी, 2025 को तय की गई है।

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यौन उत्पीड़न और हत्या के दोषी की मौत की सजा को शीर्ष कोर्ट ने 25 साल जेल में बदला
सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में चार वर्षीय बच्चे के यौन उत्पीड़न और हत्या के दोषी व्यक्ति को मिली मौत की सजा को मंगलवार को रद्द कर दिया। लेकिन इसे बिना किसी छूट के 25 साल की जेल की सजा में तब्दील कर दिया। जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने अपराध को बेहद खौफनाक करार दिया लेकिन कहा कि यह दुर्लभतम की श्रेणी में नहीं आता।

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बिना सुनवाई किसी को अनिश्चित काल तक जेल में नहीं रख सकते
प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान गड़बड़ी पैदा करने की साजिश में आरोपी प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्य को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत दे दी कि बिना सुनवाई के किसी को अनिश्चित काल के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि संरक्षित गवाहों के बयान में ऐसा कुछ भी विशेष नहीं कहा गया है जिसके आधार पर आरोपी अतहर परवेज को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोपित बनाया जा सके। पीठ ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि सुनवाई जल्द पूरी होने की संभावना नहीं है। ऐसे में जैसा कि इस अदालत के विभिन्न फैसलों, जिनका हवाला दिया गया है, में कहा गया है अपीलकर्ता को अनिश्चित काल तक जेल में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

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किसी फैसले के लिए हाईकोर्ट न्यायिक अधिकारी से नहीं मांग सकता स्पष्टीकरण
राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से जिला एवं सत्र न्यायाधीश के विरुद्ध की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट किसी मामले में लिए गए निर्णय के लिए न्यायिक अधिकारी से स्पष्टीकरण नहीं मांग सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि स्पष्टीकरण केवल प्रशासनिक पक्ष से ही मांगा जा सकता है।

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ एक न्यायिक अधिकारी अयूब खान की दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से उसके विरुद्ध की गई कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों से व्यथित था। हाईकोर्ट ने पाया था कि न्यायिक अधिकारी ने जमानत आवेदन को खारिज करते समय हाईकोर्ट के पिछले निर्णय के अनुसार अभियुक्त के आपराधिक इतिहास का विवरण शामिल नहीं किया था। हाईकोर्ट ने पाया कि यह अनुशासनहीनता के समान है और अवमानना के बराबर भी हो सकता है। हाईकोर्ट ने अयूब खान से स्पष्टीकरण मांगा था। हाईकोर्ट के एकल जज ने न्यायिक अधिकारी के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां कीं, जिसमें कहा गया कि वह न्यायिक अनुशासनहीनता के लिए उत्तरदायी है और आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश का ध्यान आकर्षित किया है।

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