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Elgar Parishad Case: एल्गार परिषद केस में शीर्ष कोर्ट से महेश राउत को राहत, चिकित्सा आधार पर मिली अंतरिम जमानत

Tue, 16 Sep 2025 11:39 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 16 Sep 2025 11:39 AM IST
सार

पीठ ने कहा, 'आवेदक चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत मांग रहा है और इस तथ्य को भी ध्यान में रखते हुए कि उसे वास्तव में बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत दी गई थी, हम छह हफ्ते की अवधि के लिए चिकित्सा जमानत देने के पक्ष में हैं।'

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Supreme Court Updates: SC grants interim bail to Mahesh Raut in Elgar Parishad case Know all imp Cases
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव मामले के आरोपी महेश राउत को मंगलवार को बड़ी राहत मिली। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत दे दी। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ राउत की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद अपनी नजरबंदी को चुनौती दी थी।

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शीर्ष अदालत ने राउत की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह के इस तर्क पर गौर किया कि आरोपी रूमेटाइड अर्थराइटिस से पीड़ित है। पीठ ने कहा, 'आवेदक चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत मांग रहा है और इस तथ्य को भी ध्यान में रखते हुए कि उसे वास्तव में बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत दी गई थी, हम छह हफ्ते की अवधि के लिए चिकित्सा जमानत देने के पक्ष में हैं।'
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हाईकोर्ट ने जमानत दी, पर आदेश पर एक हफ्ते के लिए रोक लगाई
हाईकोर्ट ने राउत की जमानत याचिका स्वीकार कर ली थी, लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुरोध पर अपने आदेश पर एक हफ्ते के लिए रोक लगा दी। इसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले में उसकी रिहाई पर लगी रोक बढ़ा दी। राउत के वकील ने पहले कहा था कि कार्यकर्ता रूमेटाइड अर्थराइटिस से पीड़ित हैं और उन्हें विशेष चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है, जो जेल या जेजे अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, जहां उनकी जांच की गई है।
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मामले को समझिए...
राउत एल्गार परिषद भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी कई कार्यकर्ताओं और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं में से एक हैं। एल्गार परिषद का सम्मेलन दिसंबर 2017 में पुणे के मध्य में स्थित 18वीं सदी के महल-किले शनिवारवाड़ा में आयोजित किया गया था। जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम में दिए गए भड़काऊ भाषणों ने 1 जनवरी, 2018 को कोरेगांव-भीमा में हिंसा भड़काई। एक अन्य आरोपी सांस्कृतिक कार्यकर्ता सागर गोरखे उर्फ जगताप को सितंबर 2020 में कबीर कला मंच के अन्य सदस्यों के साथ सम्मेलन में भड़काऊ नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में है।

एक अन्य कार्यकर्ता ज्योति जगताप की जमानत याचिका पर भी सुनवाई संभव
पीठ एक अन्य कार्यकर्ता ज्योति जगताप की जमानत याचिका पर भी सुनवाई कर सकती है, जिन्हें 2020 में एल्गर परिषद-माओवादी संबंध मामले में गिरफ्तार किया गया था।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

पांच उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थायीकरण की सिफारिश
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पांच उच्च न्यायालयों में नई नियुक्तियों और स्थायीकरण को मंजूरी दे दी है। कॉलेजियम ने अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति को भी मंजूरी दे दी है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ सहित तीन सदस्यीय कॉलेजियम ने सोमवार को हुई एक बैठक में नियुक्तियों और स्थायीकरण की सिफारिश करते हुए पांच अलग-अलग प्रस्ताव पारित किए।

  • हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में कॉलेजियम ने दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं  जिया लाल भारद्वाज और रोमेश वर्मा को न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने को मंजूरी दी। कर्नाटक उच्च न्यायालय के लिए तीन न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति को मंजूरी दी गई। ये हैं- गीता कदबा भरतराज शेट्टी, मुरलीधर पाई बोरकट्टे और त्यागराज नारायण इनावली।
  • कॉलेजियम ने वर्तमान में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में कार्यरत न्यायमूर्ति कुरुबरहल्ली वेंकटरामरेड्डी अरविंद को भी न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में मंजूरी दी। त्रिपुरा उच्च न्यायालय में कॉलेजियम ने अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में कार्यरत न्यायमूर्ति बिस्वजीत पालित को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की स्वीकृति प्रदान की। 
  • मद्रास उच्च न्यायालय में भी नियुक्ति की पुष्टि हुई, जहां कॉलेजियम ने अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में कार्यरत न्यायमूर्ति एन सेंथिलकुमार और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन को न्यायालय का स्थायी न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की।
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